Amos · chapter 9 · verse 5
Amos 9:5 in Hindi
सेनाओं के परमेश्वर यहोवा के स्पर्श करने से पृथ्वी पिघलती है, और उसके सारे रहनेवाले विलाप करते हैं; और वह सब की सब मि की नदी के समान जो जाती है, जो बढ़ती है फिर लहरें मारती, और घट जाती है।
Senaaom ke parameshvar yahovaa ke sparsh karane se pruthvee pighalatee hai, aur usake saare rahanevaale vilaap karate haim; aur vah sab kee sab mi kee nadee ke samaan jo jaatee hai, jo badhatee hai phir laharem maaratee, aur ghat jaatee hai.
Amos 9:5 in English
- King James Version (KJV)
- And the Lord GOD of hosts [is] he that toucheth the land, and it shall melt, and all that dwell therein shall mourn: and it shall rise up wholly like a flood; and shall be drowned, as [by] the flood of Egypt.
- World English Bible (WEB)
- For the Lord, the GOD of Armies, is he who touches the land and it melts, and all who dwell in it will mourn; and it will rise up wholly like the River, and will sink again, like the River of Egypt.
- American Standard Version (ASV)
- For the Lord, Jehovah of hosts, [is] he that toucheth the land and it melteth, and all that dwell therein shall mourn; and it shall rise up wholly like the River, and shall sink again, like the River of Egypt;
- Bible in Basic English (BBE)
- For the Lord, the God of armies, is he at whose touch the land is turned to water, and everyone in it will be given up to sorrow; all of it will be overflowing like the River, and will go down again like the River of Egypt;
- Darby Translation (DBY)
- And the Lord Jehovah of hosts is he that toucheth the land, and it melteth, and all that dwell therein shall mourn; and it shall wholly rise up like the Nile, and sink down as the river of Egypt.
- Webster's Bible (WBS)
- And the Lord GOD of hosts [is] he that toucheth the land, and it shall melt, and all that dwell in it shall mourn: and it shall rise up wholly like a flood; and shall be drowned, as [by] the flood of Egypt.
- Young's Literal Translation (YLT)
- And [it is] the Lord, Jehovah of Hosts, Who is striking against the land, and it melteth, And mourned have all the inhabitants in it, And come up as a flood hath all of it, And it hath sunk — like the flood of Egypt.
Read in context
- 3चाहे वे कर्म्मेल में छिप जाएं, परन्तु वहां भी मैं उन्हें ढूंढ़- ढूंढकर पकड़ लूंगा, और चाहे वे समुद्र की थाह में मेरी दृष्टि से ओट हों, वहां भी मैं सर्प को उन्हें डसने की आज्ञा दूंगा।
- 4और चाहे शत्रु उन्हें हांककर बंधुआई में ले जाएं, वहां भी मैं आज्ञा देकर तलवार से उन्हें घात कराऊंगा; और मैं उन पर भलाई करने के लिये नहीं, बुराई की करने के लिये दृष्टि करूंगा।।
- 5सेनाओं के परमेश्वर यहोवा के स्पर्श करने से पृथ्वी पिघलती है, और उसके सारे रहनेवाले विलाप करते हैं; और वह सब की सब मि की नदी के समान जो जाती है, जो बढ़ती है फिर लहरें मारती, और घट जाती है।
- 6जो आकाश में अपनी कोठरियां बनाता, और अपने आकाशमण्डल की नेव पृथ्वी पर डालता, और समुद्र का जल घरती पर बहा देता है, उसी का नाम यहोवा है।।
- 7हे इस्राएलियों, यहोवा की यह वाणी है, क्या तुम मेरे लेखे कूशियों के समान नहीं हो? क्या मैं इस्राएल को मि देश से और पलिश्तियों को कप्तोर से नहीं निकाल लाया? और अरामियों को कीर से नहीं निकाल लाया?
Cross references
- Amos 8:8 आमोस 8:8क्या इस कारण भूमि न कांपेगी? और क्या उन पर के सब रहनेवाले विलाप न करेंगे? यह देश सब का सब मि की नील नदी के समान होगा, जो बढ़ती है, फिर लहरें मारती, और घट जाती है।।
- Micah 1:3–4 मीका 1:3–4कयोंकि देख, यहोवा अपने पवित्रास्थान से बाहर निकल रहा है, और वह उतरकर पृथ्वी के ऊंचे स्थानों पर चलेगा। और पहाड़ उसके नीचे गल जाएंगे, और तराई ऐसे फटेंगी, जैसे मोम आग की आंच से, और पानी जो घाट से नीचे बहता है।
- Psalm 46:6 भजन संहिता 46:6जाति जाति के लोग झल्ला उठे, राज्य राज्य के लोग डगमगाने लगे; वह बोल उठा, और पृथ्वी पिघल गई।
- Isaiah 64:1 यशायाह 64:1भला हो कि तू आकाश को फाड़कर उतर आए और पहाड़ तेरे साम्हने कांप उठे।
- Revelation 20:11 प्रकाशितवाक्य 20:11फिर मैं ने एक बड़ा श्वेत सिंहासन और उस को जो उस पर बैठा हुआ है, देखा, जिस के साम्हने से पृथ्वी और आकाश भाग गए, और उन के लिये जगह न मिली।
- Psalm 93:3–4 भजन संहिता 93:3–4हे यहोवा, महानदों का कोलाहल हो रहा है, महानदों का बड़ा शब्द हो रहा है, महानद गरजते हैं। महासागर के शब्द से, और समुद्र की महातरंगों से, विराजमान यहोवा अधिक महान है।।
- Habakkuk 3:10 हबक्कूक 3:10पहाड़ तुझे देखकर कांप उठे; आंधी और जलप्रलय निकल गए; गहिरा सागर बोल उठा और अपने हाथों अर्थात् लहरों को ऊपर उठाया।
- Hosea 4:3 होशे 4:3इस कारण यह देश विलाप करेगा, और मैदान के जीव- जन्तुओं, और आकाश के पक्षियों समेत उसके सब निवासी कुम्हला जाएंगे; और समुद्र की मछलियां भी नाश हो जाएंगी।।
- Matthew 7:27 मत्ती 7:27और मेंह बरसा, और बाढ़ें आईं, और आन्धियां चलीं, और उस घर पर टक्करें लगीं और वह गिरकर सत्यानाश हो गया।।
- Psalm 32:6 भजन संहिता 32:6इस कारण हर एक भक्त तुझ से ऐसे समय में प्रार्थना करे जब कि तू मिल सकता है। निश्चय जब जल की बड़ी बाढ़ आए तौभी उस भक्त के पास न पहुंचेगी।
- Jeremiah 12:4 यिर्मयाह 12:4कब तक देश विलाप करता रहेगा, और सारे मैदान की घास सूखी रहेगी? देश के निवासियों की बुराई के कारण पशु- पक्षी सब नाश हो गए हैं, क्योंकि उन लोगों ने कहा, वह हमारे अन्त को न देखेगा।
- Psalm 144:5 भजन संहिता 144:5हे यहोवा, अपने स्वर्ग को नीचा करके उतर आ! पहाड़ों को छू तब उन से धुंआं उठेंगा!