Amos · chapter 9 · verse 6
Amos 9:6 in Hindi
जो आकाश में अपनी कोठरियां बनाता, और अपने आकाशमण्डल की नेव पृथ्वी पर डालता, और समुद्र का जल घरती पर बहा देता है, उसी का नाम यहोवा है।।
Jo aakaash mem apanee kothariyaam banaataa, aur apane aakaashamandal kee nev pruthvee par daalataa, aur samudr kaa jal gharatee par bahaa detaa hai, usee kaa naam yahovaa hai..
Amos 9:6 in English
- King James Version (KJV)
- [It is] he that buildeth his stories in the heaven, and hath founded his troop in the earth; he that calleth for the waters of the sea, and poureth them out upon the face of the earth: The LORD [is] his name.
- World English Bible (WEB)
- It is he who builds his rooms in the heavens, and has founded his vault on the earth; he who calls for the waters of the sea, and pours them out on the surface of the earth—the LORD is his name.
- American Standard Version (ASV)
- [it is] he that buildeth his chambers in the heavens, and hath founded his vault upon the earth; he that calleth for the waters of the sea, and poureth them out upon the face of the earth; Jehovah is his name.
- Bible in Basic English (BBE)
- It is he who makes his rooms in the heaven, basing his arch on the earth; whose voice goes out to the waters of the sea, and sends them flowing over the face of the earth; the Lord is his name.
- Darby Translation (DBY)
- It is he that buildeth his upper chambers in the heavens, and hath founded his vault upon the earth; he that calleth for the waters of the sea, and poureth them out upon the face of the earth: Jehovah is his name.
- Webster's Bible (WBS)
- [It is] he that buildeth his stories in the heaven, and hath founded his troop in the earth; he that calleth for the waters of the sea, and poureth them out upon the face of the earth: the LORD [is] his name.
- Young's Literal Translation (YLT)
- Who is building in the heavens His upper chambers; As to His troop, Upon earth He hath founded it, Who is calling for the waters of the sea, And poureth them out on the face of the land, Jehovah [is] His name.
Read in context
- 4और चाहे शत्रु उन्हें हांककर बंधुआई में ले जाएं, वहां भी मैं आज्ञा देकर तलवार से उन्हें घात कराऊंगा; और मैं उन पर भलाई करने के लिये नहीं, बुराई की करने के लिये दृष्टि करूंगा।।
- 5सेनाओं के परमेश्वर यहोवा के स्पर्श करने से पृथ्वी पिघलती है, और उसके सारे रहनेवाले विलाप करते हैं; और वह सब की सब मि की नदी के समान जो जाती है, जो बढ़ती है फिर लहरें मारती, और घट जाती है।
- 6जो आकाश में अपनी कोठरियां बनाता, और अपने आकाशमण्डल की नेव पृथ्वी पर डालता, और समुद्र का जल घरती पर बहा देता है, उसी का नाम यहोवा है।।
- 7हे इस्राएलियों, यहोवा की यह वाणी है, क्या तुम मेरे लेखे कूशियों के समान नहीं हो? क्या मैं इस्राएल को मि देश से और पलिश्तियों को कप्तोर से नहीं निकाल लाया? और अरामियों को कीर से नहीं निकाल लाया?
- 8देखो, परमेश्वर यहोवा की दृष्टि इस पाप- मय राज्य पर लगी है, और मैं इसको धरती पर से नाश करूंगा; तौभी मैं पूरी रीति से याकूब के घराने को नाश न करूंगा, यहोवा की यही वाणी है।
Cross references
- Amos 5:8 आमोस 5:8जो कचपचिया और मृगशिरा का बनानेवाला है, जो घोर अन्धकार को भोर का प्रकाश बनाता है, जो दिन को अन्धकार करके रात बना देता है, और समुद्र का जल स्थल के ऊपर बहा देता है, उसका नाम यहोवा है।
- Psalm 104:3 भजन संहिता 104:3जो अपनी अटारियों की कड़ियां जल में धरता है, और मेघों को अपना रथ बनाता है, और पवन के पंखों पर चलता है,
- Amos 4:13 आमोस 4:13देख, पहाड़ों का बनानेवाला और पवन का सिरजनेवाला, और मनुष्य को उसके मन का विचार बतानेवाला और भोर को अन्धकार करनेवाला, और जो पृथ्वी के ऊंचे स्थानों पर चलनेवाला है, उसी का नाम सेनाओं का परमेश्वर यहोवा है।।
- Psalm 104:13 भजन संहिता 104:13तू अपनी अटारियों में से पहाड़ों को सींचता है तेरे कामों के फल से पृथ्वी तृप्त रहती है।।
- Jeremiah 5:22 यिर्मयाह 5:22यहोवा की यह वाणी है, क्या तुम लोग मेरा भय नहीं मानते? क्या तुम मेरे सम्मुख नहीं थरथराते? मैं ने बालू को समुद्र का सिवाना ठहराकर युग युग का ऐसा बान्ध ठहराया कि वह उसे लांध न सके; और चाहे उसकी लहरें भी उठें, तौभी वे प्रबल न हो सकें, या जब वे गरजें तौभी उसको न लांध सकें।
- Psalm 104:5–6 भजन संहिता 104:5–6तू ने पृथ्वी को उसकी नीव पर स्थिर किया है, ताकि वह कभी न डगमगाए। तू ने उसको गहिरे सागर से ढांप दिया है जैसे वस्त्रा से; जल पहाड़ों के ऊपर ठहर गया।
- Genesis 7:11–19 उत्पत्ति 7:11–19जब नूह की अवस्था के छ: सौवें वर्ष के दूसरे महीने का सत्तरहवां दिन आया; उसी दिन बड़े गहिरे समुद्र के सब सोते फूट निकले और आकाश के झरोखे खुल गए। और वर्षा चालीस दिन और चालीस रात निरन्तर पृथ्वी पर होती रही। ठीक उसी दिन नूह अपने पुत्रा शेम, हाम, और येपेत, और अपनी पत्नी, और तीनों बहुओं समेत, और उनके संग एक एक जाति के सब बनैले पशु, और एक एक जाति के सब घरेलू पशु, और एक एक जाति के सब पृथ्वी पर रेंगनेवाले, और एक एक जाति के सब उड़नेवाले पक्षी, जहाज में गए। जितने प्राणियों में जीवन की आत्मा थी उनकी सब जातियों में से दो दो नूह के पास जहाज में गए। और जो गए, वह परमेश्वर की आज्ञा के अनुसार सब जाति के प्राणियों में से नर और मादा गए। तब यहोवा ने उसका द्वार बन्द कर दिया। और पृथ्वी पर चालीस दिन तक प्रलय होता रहा; और पानी बहुत बढ़ता ही गया जिस से जहाज ऊपर को उठने लगा, और वह पृथ्वी पर से ऊंचा उठ गया। और जल बढ़ते बढ़ते पृथ्वी पर बहुत ही बढ़ गया, और जहाज जल के ऊपर ऊपर तैरता रहा। और जल पृथ्वी पर अत्यन्त बढ़ गया, यहां तक कि सारी धरती पर जितने बड़े बड़े पहाड़ थे, सब डूब गए।
- Genesis 2:1 उत्पत्ति 2:1यों आकाश और पृथ्वी और उनकी सारी सेना का बनाना समाप्त हो गया।
- Exodus 3:14–15 निर्गमन 3:14–15परमेश्वर ने मूसा से कहा, मैं जो हूं सो हूं। फिर उस ने कहा, तू इस्राएलियों से यह कहना, कि जिसका नाम मैं हूं है उसी ने मुझे तुम्हारे पास भेजा है। फिर परमेश्वर ने मूसा से यह भी कहा, कि तू इस्राएलियों से यह कहना, कि तुम्हारे पितरों का परमेश्वर, अर्थात् इब्राहीम का परमेश्वर, इसहाक का परमेश्वर और याकूब का परमेश्वर, यहोवा उसी ने मुझ को तुम्हारे पास भेजा है। देख सदा तक मेरा नाम यही रहेगा, और पीढ़ी पीढ़ी में मेरा स्मरण इसी से हुआ करेगा।
Original words (Hebrew)
- buildeth · H1129בָּנָה bânâh
- stories · H4609מַעֲלָה maʻălâh
- heaven · H8064שָׁמַיִם shâmayim
- founded · H3245יָסַד yâçad
- troop · H92אֲגֻדָּה ʼăguddâh
- earth · H776אֶרֶץ ʼerets
- calleth · H7121קָרָא qârâʼ
- waters · H4325מַיִם mayim
- sea · H3220יָם yâm
- out · H8210שָׁפַךְ shâphak
- face · H6440פָּנִים pânîym
- earth · H776אֶרֶץ ʼerets
- name · H8034שֵׁם shêm