Deuteronomy · chapter 8 · verse 3
Deuteronomy 8:3 in Hindi
उस ने तुझ को नम्र बनाया, और भूखा भी होने दिया, फिर वह मन्ना, जिसे न तू और न तेरे पुरखा ही जानते थे, वही तुझ को खिलाया; इसलिये कि वह तुझ को सिखाए कि मनुष्य केवल रोटी ही से नहीं जीवित रहता, परन्तु जो जो वचन यहोवा के मुंह से निकलते हैं उन ही से वह जीवित रहता है।
Us ne tujh ko namr banaayaa, aur bhookhaa bhee hone diyaa, phir vah mannaa, jise na too aur na tere purakhaa hee jaanate the, vahee tujh ko khilaayaa; isaliye ki vah tujh ko sikhaae ki manushy keval rotee hee se naheem jeevit rahataa, parantu jo jo vachan yahovaa ke munh se nikalate haim un hee se vah jeevit rahataa hai.
Deuteronomy 8:3 in English
- King James Version (KJV)
- And he humbled thee, and suffered thee to hunger, and fed thee with manna, which thou knewest not, neither did thy fathers know; that he might make thee know that man doth not live by bread only, but by every [word] that proceedeth out of the mouth of the LORD doth man live.
- World English Bible (WEB)
- He humbled you, allowed you to be hungry, and fed you with manna, which you didn’t know, neither did your fathers know, that he might teach you that man does not live by bread only, but man lives by every word that proceeds out of the LORD’s mouth.
- American Standard Version (ASV)
- And he humbled thee, and suffered thee to hunger, and fed thee with manna, which thou knewest not, neither did thy fathers know; that he might make thee know that man doth not live by bread only, but by everything that proceedeth out of the mouth of Jehovah doth man live.
- Bible in Basic English (BBE)
- And he made low your pride and let you be without food and gave you manna for your food, a thing new to you, which your fathers never saw; so that he might make it clear to you that bread is not man's only need, but his life is in every word which comes out of the mouth of the Lord.
- Darby Translation (DBY)
- And he humbled thee, and suffered thee to hunger, and fed thee with the manna, which thou hadst not known, and which thy fathers knew not; that he might make thee know that man doth not live by bread alone, but by everything that goeth out of the mouth of Jehovah doth man live.
- Webster's Bible (WBS)
- And he humbled thee, and suffered thee to hunger, and fed thee with manna, which thou knewest not, neither did thy fathers know; that he might make thee know that man doth not live by bread only, but by every [word] that proceedeth out of the mouth of the LORD doth man live.
- Young's Literal Translation (YLT)
- 'And He doth humble thee, and cause thee to hunger and doth cause thee to eat the manna (which thou hast not known, even thy fathers have not known), in order to cause thee to know that not by bread alone doth man live, but by every produce of the mouth of Jehovah man doth live.
Read in context
- 1जो जो आज्ञा मैं आज तुझे सुनाता हूं उन सभों पर चलने की चौकसी करना, इसलिये कि तुम जीवित रहो और बढ़ते रहो, और जिस देश के विषय में यहोवा ने तुम्हारे पूर्वजों से शपथ खाई है उस में जाकर उसके अधिकारी हो जाओ।
- 2और स्मरण रख कि तेरा परमेश्वर यहोवा उन चालीस वर्षों में तुझे सारे जंगल के मार्ग में से इसलिये ले आया है, कि वह तुझे नम्र बनाए, और तेरी परीक्षा करके यह जान ले कि तेरे मन में क्या क्या है, और कि तू उसकी आज्ञाओं का पालन करेगा वा नहीं।
- 3उस ने तुझ को नम्र बनाया, और भूखा भी होने दिया, फिर वह मन्ना, जिसे न तू और न तेरे पुरखा ही जानते थे, वही तुझ को खिलाया; इसलिये कि वह तुझ को सिखाए कि मनुष्य केवल रोटी ही से नहीं जीवित रहता, परन्तु जो जो वचन यहोवा के मुंह से निकलते हैं उन ही से वह जीवित रहता है।
- 4इन चालीस वर्षों में तेरे वस्त्रा पुराने न हुए, और तेरे तन से भी नहीं गिरे, और न तेरे पांव फूले।
- 5फिर अपने मन में यह तो विचार कर, कि जैसा कोई अपने बेटे को ताड़ना देता है वैसे ही तेरा परमेश्वर यहोवा तुझ को ताड़ना देता है।
Cross references
- Matthew 4:4 मत्ती 4:4उस ने उत्तर दिया; कि लिखा है कि मनुष्य केवल रोटी ही से नहीं, परन्तु हर एक वचन से जो परमेश्वर के मुख से निकलता है जीवित रहेगा।
- Luke 4:4 लूका 4:4यीशु ने उसे उत्तर दिया; कि लिखा है, मनुष्य केवल रोटी से जीवित न रहेगा।
- Hebrews 13:5–6 इब्रानियों 13:5–6तुम्हारा स्वभाव लोभरहित हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो; क्योंकि उस ने आप ही कहा है, कि मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा। इसलिये हम बेधड़क होकर कहते हैं, कि प्रभु, मेरा सहायक है; मैं न डरूंगा; मनुष्य मेरा क्या कर सकता है।।
- Psalm 78:23–25 भजन संहिता 78:23–25तौभी उस ने आकाश को आज्ञा दी, और स्वर्ग के ठ्ठारों को खोला; और उनके लिये खाने को मान बरसाया, और उन्हे स्वर्ग का अन्न दिया। उनको शूरवीरों की सी रोटी मिली; उस ने उनको मनमाना भोजन दिया।
- Exodus 16:2–3 निर्गमन 16:2–3जंगल में इस्राएलियों की सारी मण्डली मूसा और हारून के विरूद्ध बकझक करने लगी। और इस्राएली उन से कहने लगे, कि जब हम मि देश में मांस की हांडियों के पास बैठकर मनमाना भोजन खाते थे, तब यदि हम यहोवा के हाथ से मार डाले भी जाते तो उत्तम वही था; पर तुम हम को इस जंगल में इसलिये निकाल ले आए हो कि इस सारे समाज को भूखों मार डालो।
- 1 Corinthians 10:3 1 कुरिन्थियों 10:3और सब ने एक ही आत्मिक भोजन किया।
- Exodus 16:12–35 निर्गमन 16:12–35इस्राएलियों का बुड़बुड़ाना मैं ने सुना है; उन से कह दे, कि गोधूलि के समय तुम मांस खाओगे और भोर को तुम रोटी से तृप्त हो जाओगे; और तुम यह जान लोगे कि मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूं। और ऐसा हुआ कि सांझ को बटेरें आकर सारी छावनी पर बैठ गईं; और भोर को छावनी के चारों ओर ओस पड़ी। और जब ओस सूख गई तो वे क्या देखते हैं, कि जंगल की भूमि पर छोटे छोटे छिलके छोटाई में पाले के किनकों के समान पड़े हैं। यह देखकर इस्राएली, जो न जानते थे कि यह क्या वस्तु है, सो आपस में कहने लगे यह तो मन्ना है। तब मूसा ने उन से कहा, यह तो वही भोजन वस्तु है जिसे यहोवा तुम्हें खाने के लिये देता है। जो आज्ञा यहोवा ने दी है वह यह है, कि तुम उस में से अपने अपने खाने के योग्य बटोरा करना, अर्थात् अपने अपने प्राणियों की गिनती के अनुसार, प्रति मनुष्य के पीछे एक एक ओमेर बटोरना; जिसके डेरे में जितने हों वह उन्हीं भर के लिये बटोरा करे। और इस्राएलियों ने वैसा ही किया; और किसी ने अधिक, और किसी ने थोड़ा बटोर लिया। और जब उन्हों ने उसको ओमेर से नापा, तब जिसके पास अधिक था उसके कुछ अधिक न रह गया, ओर जिसके पास थोड़ा था उसको कुछ घटी न हुई; क्योंकि एक एक मनुष्य ने अपने खाने के योग्य ही बटोर लिया था। फिर मूसा ने उन से कहा, कोई इस में से कुछ बिहान तक न रख छोड़े। तौभी उन्हों ने मूसा की बात न मानी; इसलिये जब किसी किसी मनुष्य ने उस में से कुछ बिहान तक रख छोड़ा, तो उस में कीड़े पड़ गए और वह बसाने लगा; तब मूसा उन पर क्रोधित हुआ। और वे भोर को प्रतिदिन अपने अपने खाने के योग्य बटोर लेते थे, ओर जब धूप कड़ी होती थी, तब वह गल जाता था। और ऐसा हुआ कि छठवें दिन उन्हों ने दूना, अर्थात् प्रति मनुष्य के पीछे दो दो ओमेर बटोर लिया, और मण्डली के सब प्रधानों ने आकर मूसा को बता दिया। उस ने उन से कहा, यह तो वही बात है जो यहोवा ने कही, क्यांेकि कल परमविश्राम, अर्थात् यहोवा के लिये पवित्रा विश्राम होगा; इसलिये तुम्हें जो तन्दूर में पकाना हो उसे पकाओ, और जो सिझाना हो उसे सिझाओ, और इस में से जितना बचे उसे बिहान के लिये रख छोड़ो। जब उन्हों ने उसको मूसा की इस आज्ञा के अनुसार बिहान तक रख छोड़ा, तब न तो वह बसाया, और न उस में कीड़े पड़े। तब मूसा ने कहा, आज उसी को खाओ, क्योंकि आज यहोवा का विश्रामदिन है; इसलिये आज तुम को मैदान में न मिलेगा। छ: दिन तो तुम उसे बटोरा करोगे; परन्तु सातवां दिन तो विश्राम का दिन है, उस में वह न मिलेगा। तौभी लोगों में से कोई कोई सातवें दिन भी बटोरने के लिये बाहर गए, परन्तु उनको कुछ न मिला। तब यहोवा ने मूसा से कहा, तुम लोग मेरी आज्ञाओं और व्यवस्था को कब तक नहीं मानोगे? देखो, यहोवा ने जो तुम को विश्राम का दिन दिया है, इसी कारण वह छठवें दिन को दो दिन का भोजन तुम्हें देता है; इसलिये तुम अपने अपने यहां बैठे रहना, सातवें दिन कोई अपने स्थान से बाहर न जाना। लोगों ने सातवें दिन विश्राम किया। और इस्राएल के घरानेवालों ने उस वस्तु का नाम मन्ना रखा; और वह धनिया के समान श्वेत था, और उसका स्वाद मधु के बने हुए पुए का सा था। फिर मूसा ने कहा, यहोवा ने जो आज्ञा दी वह यह है, कि इस में से ओमेर भर अपने वंश की पीढ़ी पीढ़ी के लिये रख छोड़ो, जिससे वे जानें कि यहोवा हमको मि देश से निकालकर जंगल में कैसी रोटी खिलाता था। तब मूसा ने हारून से कहा, एक पात्रा लेकर उस में ओमेर भर लेकर उसे यहोवा के आगे धर दे, कि वह तुम्हारी पीढ़ियों के लिये रखा रहे। जैसी आज्ञा यहोवा ने मूसा को दी थी, उसी के अनुसार हारून ने उसको साक्षी के सन्दूक के आगे धर दिया, कि वह वहीं रखा रहे। इस्राएली जब तक बसे हुए देश में न पहुंचे तब तक, अर्थात् चालीस वर्ष तक मन्ना को खाते रहे; वे जब तक कनान देश के सिवाने पर नहीं पहुंचे तब तक मन्ना को खाते रहे।
- Luke 12:29–30 लूका 12:29–30और तुम इस बात की खोज में न रहो, कि क्या खाएंगे और क्या पीएंगे, और न सन्देह करो। क्योंकि संसार की जातियां इन सब वस्तुओं की खोज में रहती हैं: और तुम्हारा पिता जानता है, कि तुम्हें इन वस्तुओं की आवश्यकता है।
- Psalm 105:40 भजन संहिता 105:40उन्हों ने मांगा तब उस ने बटेरें पहुंचाई, और उनको स्वर्गीय भोजन से तृप्त किया।
- Psalm 37:3 भजन संहिता 37:3यहोवा पर भरोसा रख, और भला कर; देश में बसा रह, और सच्चाई में मन लगाए रह।
- Psalm 104:27–29 भजन संहिता 104:27–29इन सब को तेरा ही आसरा है, कि तू उनका आहार समय पर दिया करे। तू उन्हें देता हे, वे चुन लेते हैं; तू अपनी मुट्ठी खोलता है और वे उत्तम पदार्थों से तृप्त होते हैं। तू मुख फेर लेता है, और वे घबरा जाते हैं; तू उनकी सांस ले लेता है, और उनके प्राण छूट जाते हैं और मिट्टी में फिर मिल जाते हैं।
Original words (Hebrew)
- humbled · H6031עָנָה ʻânâh
- hunger · H7456רָעֵב râʻêb
- fed · H398אָכַל ʼâkal
- manna · H4478מָן mân
- knewest · H3045יָדַע yâdaʻ
- fathers · H1אָב ʼâb
- know · H3045יָדַע yâdaʻ
- know · H3045יָדַע yâdaʻ
- man · H120אָדָם ʼâdâm
- live · H2421חָיָה châyâh
- bread · H3899לֶחֶם lechem
- only · H905בַּד bad
- proceedeth · H4161מוֹצָא môwtsâʼ
- mouth · H6310פֶּה peh
- man · H120אָדָם ʼâdâm
- live · H2421חָיָה châyâh