Exodus · chapter 5 · verse 22
Exodus 5:22 in Hindi
तब मूसा ने यहोवा के पास लौट कर कहा, हे प्रभु, तू ने इस प्रजा के साथ ऐसी बुराई क्यों की? और तू ने मुझे यहां क्यों भेजा?
Tab moosaa ne yahovaa ke paas laut kar kahaa, he prabhu, too ne is prajaa ke saath aisee buraaee kyom kee? Aur too ne mujhe yahaam kyom bhejaa?
Exodus 5:22 in English
- King James Version (KJV)
- And Moses returned unto the LORD, and said, Lord, wherefore hast thou [so] evil entreated this people? why [is] it [that] thou hast sent me?
- World English Bible (WEB)
- Moses returned to the LORD, and said, “Lord, why have you brought trouble on this people? Why is it that you have sent me?
- American Standard Version (ASV)
- And Moses returned unto Jehovah, and said, Lord, wherefore hast thou dealt ill with this people? why is it that thou hast sent me?
- Bible in Basic English (BBE)
- And Moses went back to the Lord and said, Lord, why have you done evil to this people? why have you sent me?
- Darby Translation (DBY)
- And Moses returned to Jehovah, and said, Lord, why hast thou done evil to this people? why now hast thou sent me?
- Webster's Bible (WBS)
- And Moses returned to the LORD, and said, Lord, why hast thou [so] ill treated this people? why [is] it [that] thou hast sent me?
- Young's Literal Translation (YLT)
- And Moses turneth back unto Jehovah, and saith, 'Lord, why hast Thou done evil to this people? why [is] this? — Thou hast sent me!
Read in context
- 20जब वे फिरौन के सम्मुख से बाहर निकल आए तब मूसा और हारून, जो उन से भेंट करने के लिये खड़े थे, उन्हें मिले।
- 21और उन्हों ने मूसा और हारून से कहा, यहोवा तुम पर दृष्टि करके न्याय करे, क्योंकि तुम ने हम को फिरौन और उसके कर्मचारियों की दृष्टि में घृणित ठहरवाकर हमें घात करने के लिये उनके हाथ में तलवार दे दी है।
- 22तब मूसा ने यहोवा के पास लौट कर कहा, हे प्रभु, तू ने इस प्रजा के साथ ऐसी बुराई क्यों की? और तू ने मुझे यहां क्यों भेजा?
- 23जब से मैं तेरे नाम से फिरौन के पास बातें करने के लिये गया तब से उसने इस प्रजा के साथ बुरा ही व्यवहार किया है, और तू ने अपनी प्रजा का कुछ भी छुटकारा नहीं किया।
Cross references
- Jeremiah 20:7 यिर्मयाह 20:7हे यहोवा, तू ने मुझे धोखा दिया, और मैं ने धोखा खाया; तू मुझ से बलवन्त है, इस कारण तू मुझ पर प्रबल हो गया। दिन भर मेरी हंसी होती है; सब कोई मुझ से ठट्ठा करते हैं।
- Numbers 11:11 गिनती 11:11तब मूसा ने यहोवा से कहा, तू अपने दास से यह बुरा व्यवहार क्यों करता है? और क्या कारण है कि मैं ने तेरी दृष्टि में अनुग्रह नहीं पाया, कि तू ने इन सब लोगों का भार मुझ पर डाला है?
- Habakkuk 2:3 हबक्कूक 2:3क्योंकि इस दर्शन की बात नियत समय में पूरी होनेवाली है, वरन इसके पूरे होने के समय वेग से आता है; इस में धोखा न होगा। चाहे इस में विलम्ब भी हो, तौीाी उसकी बाट जाहते रहना; क्योंकि वह निश्चय पूरी होगी और उस में देन न होगी।
- 1 Kings 19:4 1 राजा 19:4और आप जंगल में एक दिन के मार्ग पर जाकर एक झाऊ के पेड़ के तले बैठ गया, वहां उस ने यह कह कर अपनी मृत्यु मांगी कि हे यहोवा बस है, अब मेरा प्राण ले ले, क्योंकि मैं अपने पुरखाओं से अच्छा नहीं हूँ।
- 1 Kings 19:10 1 राजा 19:10उन ने उत्तर दिया सेनाओं के परमेश्वर यहोवा के निमित्त मुझे बड़ी जलन हुई है, क्योकि इस्राएलियों ने तेरी वाचा आल दी, तेरी बेदियों को गिरा दिया, और तेरे नबियों को तलवार से घात किया है, और मैं ही अकेला रह गया हूँ; और वे मेरे प्राणों के भी खोजी हैं।
- Exodus 17:4 निर्गमन 17:4तब मूसा ने यहोवा की दोहाई दी, और कहा, इन लोगों से मैं क्या करूं? ये सब मुझे पत्थरवाह करने को तैयार हैं।
- Psalm 73:25 भजन संहिता 73:25स्वर्ग में मेरा और कौन है? तेरे संग रहते हुए मैं पृथ्वी पर और कुछ नहीं चाहता।
- Numbers 11:14–15 गिनती 11:14–15मैं अकेला इन सब लोगों का भार नहीं सम्भाल सकता, कयोंकि यह मेरी शक्ति के बाहर है। और जो तुझे मेरे साथ यही व्यवहार करना है, तो मुझ पर तेरा इतना अनुग्रह हो, कि तू मेरे प्राण एकदम ले ले, जिस से मैं अपनी दुर्दशा न देखने पाऊं।।
- 1 Samuel 30:6 1 शमूएल 30:6और दाऊद बड़े संकट में पड़ा; क्योंकि लोग अपने बेटे- बेटियों के कारण बहुत शोकित होकर उस पर पत्थरवाह करने की चर्चा कर रहे थे। परन्तु दाऊद ने अपने परमेश्वर यहोवा को स्मरण करके हियाव बान्धा।।
- Jeremiah 12:1 यिर्मयाह 12:1हे यहोवा, यदि मैं तुझ से मुक़ मा लड़ूं, तौभी तू धम है; मुझे अपने साथ इस विषय पर वादविवाद करने दे। दुष्टों की चाल क्यों सफंल होती है? क्या कारण है कि विश्वासघाती बहुत सुख से रहते हैं?