Ezekiel · chapter 43 · verse 3
Ezekiel 43:3 in Hindi
और यह दर्शन उस दर्शन के तुल्य था, जो मैं ने उसे नगर के नाश करने को आते समय देखा था; और उस दर्शन के समान, जो मैं ने कबार नदी के तीर पर देखा था; और मैं मुंह के बल गिर पड़ा।
Aur yah darshan us darshan ke tuly thaa, jo maim ne use nagar ke naash karane ko aate samay dekhaa thaa; aur us darshan ke samaan, jo maim ne kabaar nadee ke teer par dekhaa thaa; aur maim munh ke bal gir padaa.
Ezekiel 43:3 in English
- King James Version (KJV)
- And [it was] according to the appearance of the vision which I saw, [even] according to the vision that I saw when I came to destroy the city: and the visions [were] like the vision that I saw by the river Chebar; and I fell upon my face.
- World English Bible (WEB)
- It was like the appearance of the vision which I saw, even according to the vision that I saw when I came to destroy the city; and the visions were like the vision that I saw by the river Chebar; and I fell on my face.
- American Standard Version (ASV)
- And it was according to the appearance of the vision which I saw, even according to the vision that I saw when I came to destroy the city; and the visions were like the vision that I saw by the river Chebar; and I fell upon my face.
- Bible in Basic English (BBE)
- And the vision which I saw was like the vision I had seen when he came for the destruction of the town: and like the vision which I saw by the river Chebar; and I went down on my face.
- Darby Translation (DBY)
- And the appearance of the vision that I saw was according to the vision that I had seen when I came to destroy the city; and the visions were like the vision that I saw by the river Chebar: and I fell upon my face.
- Webster's Bible (WBS)
- And [it was] according to the appearance of the vision which I saw, [even] according to the vision that I saw when I came to destroy the city: and the visions [were] like the vision that I saw by the river Kebar; and I fell upon my face.
- Young's Literal Translation (YLT)
- And according to the appearance [is] the appearance that I saw, as the appearance that I saw in my coming in to destroy the city, and the appearances [are] as the appearance that I saw at the river Chebar, and I fall on my face.
Read in context
- 1फिर वह मुझ को उस फाटक के पास ले गया जो पूर्वमुखी था।
- 2तब इस्राएल के परमेश्वर का तेज पूर्व दिशा से आया; और उसकी वाणी बहुत से जल की घरघराहट सी हुई; और उसके तेज से पृथ्वी प्रकाशित हुई।
- 3और यह दर्शन उस दर्शन के तुल्य था, जो मैं ने उसे नगर के नाश करने को आते समय देखा था; और उस दर्शन के समान, जो मैं ने कबार नदी के तीर पर देखा था; और मैं मुंह के बल गिर पड़ा।
- 4तब यहोवा का तेज उस फाटक से होकर जो पूर्वमुखी था, भवन में आ गया।
- 5तब आत्मा ने मुझे उठाकर भीतरी आंगन में पहुंचाया; और यहोवा का तेज भवन में भरा था।
Cross references
- Ezekiel 9:5 यहेजकेल 9:5तब उस ने मेरे सुनते हुए दूसरों से कहा, नगर में उनके पीछे पीछे चलकर मारते जाओ; किसी पर दया न करना और न कोमलता से काम करना।
- Ezekiel 9:1 यहेजकेल 9:1फिर उस ने मेरे कानों में ऊंचे शब्द से पुकारकर कहा, नगर के अधिकारियों को अपने अपने हाथ में नाश करने का हथियार लिए हुए निकट लाओ।
- Ezekiel 32:18 यहेजकेल 32:18हे मनुष्य के सन्तान, मिस्र की भीड़ के लिये हाय- हाय कर, और उसको प्रतापी जातियों की बेटियों समेत कबर में गड़े हुओं के पास अधोलोक में उतार।
- Ezekiel 1:3–28 यहेजकेल 1:3–28यहोवा का वचन बूजी के पुत्रा यहेजकेल याजक के पास पहुचा; और यहोवा की शक्ति उस पर वहीं प्रगट हुई। जब मैं देखने लगा, तो क्या देखता हूँ कि उत्तर दिशा से बड़ी घटा, और लहराती हुई आग सहित बड़ी आंधी आ रही है; और घटा के चारों ओर प्रकाश और आग के बीचों- बीच से झलकाया हुआ पीतल सा कुछ दिखाई देता है। फिर उसके बीच से चार जीवधारियों के समान कुछ निकले। और उनका रूप मनुष्य के समान था, परन्तु उन में से हर एक के चार चार मुख और चार चार पंख थे। उनके पांव सीधे थे, और उनके पांवों के तलुए बछड़ों के खुरों के से थे; और वे झलकाए हुए पीतल की नाई चमकते थे। उनकी चारों अलंग पर पंखों के नीचे मनुष्य के से हाथ थे। और उन चारों के मुख और पंख इस प्रकार के थे उनके पंख एक दूसरे से परस्पर मिले हुए थे; वे अपने अपने साम्हने सीधे ही चलते हुए मुड़ते नहीं थे। उनके साम्हने के मुखों का रूप मनुष्य का सा था; और उन चारों के दहिनी ओर के मुख सिंह के से, बाई ओर के मुख बैल के से थे, और चारों के पीछे के मुख उकाब पक्षी के से थे। उनके चेहरे ऐसे थे। और उनके मुख और पंख ऊपर की ओर अलग अलग थे; हर एक जीवधारी के दो दो पंख थे, जो एक दूसरे के पंखों से मिले हुए थे, और दो दो पंखों से उनका शरीर ढंपा हुआ था। और वे सीधे अपने अपने साम्हने ही चलते थे; जिध्र आत्मा जाना चाहता था, वे उधर ही जाते थे, और चलते समय मुड़ते नहीं थे। और जीबधारियों के रूप अंगारों और जलते हुए पलीतों के समान दिखाई देते थे, और वह आग जीवधारियों के बीच इधर उध्र चलती फिरती हुई बड़ा प्रकाश देती रही; और उस आग से बिजली निकलती थी। और जीवधारियों का चलना- फिरना बिजली का सा था। जब मैं जीवधारियों को देख ही रहा था, तो क्या देखा कि भूमि पर उनके पास चारों मुखें की गिनती के अनुसार, एक एक पहिया था। पहियों का रूप और बनावट फीरोजे की सी थी, और चारों का एक ही रूप था; और उनका रूप और बनावट ऐसी थी जैसे एक पहिये के बीच दूसरा पहिया हो। चलते समय वे अपनी चारों अलंगों की ओर चल सकते थे, और चलने में मुड़ते नहीं थे। और उन चारों पहियों के घेरे बहुत बड़े और डरावने थे, और उनके घेरों में चारों ओर आंखें ही आंखें भरी हुई थीं। और जब जीवधारी चलते थे, तब पहिये भी उनके साथ चलते थे; और जब जीवधारी भूमि पर से उठते थे, तब पहिये भी उठते थे। जिधर आत्मा जाना चाहती थी, उधर ही वे जाते, और और पहिये जीवधारियों के साथ उठते थे; क्योंकि उनकी आत्मा पहियों में थी। जब वे चलते थे तब ये भी चलते थे; और जब जब वे खड़े होते थे तब ये भी खड़े होते थे; और जब वे भूमि पर से उठते थे तब पहिये भी उनके साथ उठते थे; क्योंकि जीवधारियों की आत्मा पहियों में थी। जीवधारियों के सिरों के ऊपर आकाश्मण्डल सा कुछ था जो बर्फ की नाई भयानक रीति से चमक्ता था, और वह उनके सिरों के ऊपर फैला हुआ था। और आकाशमण्डल के नीचे, उनके पंख एक दूसरे की ओर सीधे फैले हुए थे; और हर एक जीवधारी के दो दो और पंख थे जिन से उनके शरीर ढंपे हुए थे। और उनके चलते समय उनके पंखों की फड़फड़ाहट की आहट मुझे बहुत से जल, वा सर्पशक्तिमान की वाणी, वा सेना के हलचल की सी सुनाई पड़ती थी; और जब वे खड़े होते थे, तब अपने पंख लटका लेते थे। फिर उनके सिरों के ऊपर जो आकाशमण्डल था, उसके ऊपर से एक शब्द सुनाई पड़ता था; और जब वे खड़े होते थे, तब अपने पंख लटका लेते थे। और जो आकाशमण्डल उनके सिरों के ऊपर था, उसके ऊपर मानो कुछ नीलम का बना हुआ सिंहासन था; इस सिंहासन के ऊपर मनुष्य के समान कोई दिखाई देता था। और उसकी मानो कमर से लेकर ऊपर की ओर मुझे झलकाया हुआ पीतल सा दिखाई पड़ा, और उसके भीतर और चारों ओर आग सी दिखाई पड़ती थी; फिर उस मनुष्य की कमर से लेकर नीचे की ओर भी मुझे कुछ आग सी दिखाई पड़ती थी; और उसके चारों ओर प्रकाश था। जैसे वर्षा के दिन बादल में धनुष दिखाई पड़ता है, वैसे ही चारों ओर का प्रकाश दिखाई देता था। यहोवा के तेज का रूप ऐसा ही था। और उसे देखकर, मैं मुंह के बल गिरा, तब मैं ने एक शब्द सुना जैसे कोई बातें करता है।
- Ezekiel 3:23 यहेजकेल 3:23तब मैं उठकर मैदान में गया, और वहां क्या देखा, कि यहोवा का प्रताप जैसा मुझे कबार नदी के तीर पर, वैसा ही यहां भी दिखाई पड़ता है; और मैं मुंह के बल गिर पड़ा।
- Jeremiah 1:10 यिर्मयाह 1:10सुन, मैं ने आज के दिन तुझे जातियों और राज्यों पर अधिकारी ठहराया है; अन्हें गिराने और ढा देने के लिये, नाश करने और काट डालने के लिये, या उन्हें बनाने और रोपने के लिये।
- Ezekiel 8:4 यहेजकेल 8:4फिर वहां इस्राएल के परमेश्वर का तेज वैसा ही था जैसा मैं ने मैदान में देखा था।
- Ezekiel 9:3 यहेजकेल 9:3और इस्राएल के परमेश्वर का तेज करूबों पर से, जिनके ऊपर वह रहा करता था, भवन की डेवढ़ी पर उठ आया था; और उस ने उस सन के वस्त्रा पहिने हुए पुरूष को जो कमर में दवात बान्धे हुए था, पुकारा।
- Ezekiel 11:22–23 यहेजकेल 11:22–23इस पर करूबों ने अपने पंख उठाए, और पहिये उनके संग संग चले; और इस्राएल के परमेश्वर का तेज उनके ऊपर था। तब यहोवा का तेज नगर के बीच में से उठकर उस पर्वत पर ठहर गया जो नगर की पूर्व ओर है।
- Revelation 11:3–6 प्रकाशितवाक्य 11:3–6और मैं अपने दो गवाहों को यह अधिकार दूंगा, कि टाट ओढे हुए एक हजार दो सौ साठ दिन तक भविष्यद्ववाणी करें। ये वे ही जैतून के दो पेड़ और दो दीवट हैं जो पृथ्वी के प्रभु के साम्हने खड़े रहते हैं। और यदि कोई उन को हानि पहुंचाना चाहता है, तो उन के मुंह से आग निकलकर उन के बैरियों को भस्म करती है, और यदि कोई उन को हानि पहुंचाना चाहेगा, तो अवश्य इसी रीति से मार डाला जाएगा। इन्हें अधिकार है, कि आकाश को बन्द करें, कि उन की भविष्यद्ववाणी के दिनों में मेंह न बरसे, और उन्हें सब पानी पर अधिकार है, कि उसे लोहू बनाएं, और जब जब चाहें तब तब पृथ्वी पर हर प्रकार की आपत्ति लाएं।
- Ezekiel 10:1–22 यहेजकेल 10:1–22इसके बाद मैं ने देखा कि करूबों के सिरों के ऊपर जो आकाशमण्डल है, उस में नीलमणि का सिंहासन सा कुछ दिखाई देता है। तब यहोवा ने उस सन के वस्त्रा पहिने हुए पुरूष से कहा, घूमनेवाले पहियों के बीच करूबों के नीचे जा और अपनी दोनों मुटि्ठयों को करूबों के बीच के अंगारों से भरकर नगर पर छितरा दे। सो वह मेरे देखते देखते उनके बीच में गया। जब वह पुरूष भीतर गया, तब वे करूब भवन की दक्खिन ओर खड़े थे; और बादल भीतरवाले आंगन में भरा हुआ था। तब यहोवा का तेज करूबों के ऊपर से उठकर भवन की डेवढ़ी पर आ गया; और बादल भवन में भर गया; और वह आंगन यहोवा के तेज के प्रकाश से भर गया। और करूबों के पंखों का शब्द बाहरी आंगन तक सुनाई देता था, वह सर्वशक्तिमान् परमेश्वर के बोलने का सा शब्द था। जब उस ने सन के वस्त्रा पहिने हुए पुरूष को घूमनेवाले पहियों के भीतर करूबों के बीच में से आग लेने की आज्ञा दी, तब वह उनके बीच में जाकर एक पहिये के पास खड़ा हुआ। तब करूबों के बीच से एक करूब ने अपना हाथ बढ़ाकर, उस आग में से जो करूबों के बीच में थी, कुछ उठाकर सन के वस्त्रा पहिने हुए पुरूष की मुट्ठी में दे दी; और वह उसे लेकर बाहर चला गया। करूबों के पंखों के नीचे तो मनुष्य का हाथ सा कुछ दिखाई देता था। तब मैं ने देखा, कि करूबें के पास चार पहिये हैं; अर्थात् एक एक करूब के पास एक एक पहिया है, और पहियों का रूप फीरोज़ा का सा है। और उनका ऐसा रूप है, कि चारों एक से दिखाई देते हैं, जैसे एक पहिये के बीच दूसरा पहिया हो। चलने के समय वे अपनी चारों अलंगों के बल से चलते हैं; और चलते समय मुड़ते नहीं, वरन जिधर उनका सिर रहता है वे उधर ही उसके पीछे चलते हैं और चलते समय वे मुड़ते नहीं। और पीठ हाथ और पंखों समेत करूबों का सारा शरीर और जो पहिये उनके हैं, वे भी सब के सब चारों ओर आंखों से भरे हुए हैं। मेरे सुनते हुए इन पहियों को चक्कर कहा गया, अर्थात् घूमनेवाले पहिये। और एक एक के चार चार मुख थे; एक मुख तो करूब का सा, दूसरा पनुष्य का सा, तीसरा सिंह का सा, और चौथा उकाब पक्षी का सा। और करूब भूमि पर से उठ गए। ये वे ही जीवधारी हैं, जो मैं ने कबार नदी के पास देखे थे। और जब जब वे करूब चलते थे तब तब वे पहिये उनके पास पास चलते थे; और जब जब करूब पृथ्वी पर से उठने के लिये अपने पंख उठाते तब तब पहिये उनके पास से नहीं मुड़ते थे। जब वे खड़े होते तब ये भी खड़े होते थे; और जब वे उठते तब ये भी उनके संग उठते थे; क्योंकि जीवधारियों की आत्मा इन में भी रहती थी। यहोवा का तेज भवन की डेवढ़ी पर से उठकर करूबों के ऊपर ठहर गया। और करूब अपने पंख उठाकर मेरे देखते देखते पृथ्वी पर से उठकर निकल गए; और पहिये भी उनके संग संग गए, और वे सब यहोवा के भवन के पूव फाटक में खड़े हो गए; और इस्राएल के परमेश्वर का तेज उनके ऊपर ठहरा रहा। ये वे ही जीवधारी हैं जो मैं ने कबार नदी के पास इस्राएल के परमेश्वर के नीचे देखे थे; और मैं ने जान लिया कि वे भी करूब हैं हर एक के चार मुख और चार पंख और पंखों के नीचे मनुष्य के से हाथ भी थे। और उनके मुखों का रूप वही है जो मैं ने कबार नदी के तीर पर देखा था। और उनके मुख ही क्या वरन उनकी सारी देह भी वैसी ही थी। वे सीधे अपने अपने साम्हने ही चलते थे।
Original words (Hebrew)
- appearance · H4758מַרְאֶה marʼeh
- vision · H4758מַרְאֶה marʼeh
- saw · H7200רָאָה râʼâh
- vision · H4758מַרְאֶה marʼeh
- saw · H7200רָאָה râʼâh
- came · H935בּוֹא bôwʼ
- destroy · H7843שָׁחַת shâchath
- city · H5892עִיר ʻîyr
- visions · H4759מַרְאָה marʼâh
- vision · H4758מַרְאֶה marʼeh
- saw · H7200רָאָה râʼâh
- river · H5104נָהָר nâhâr
- Chebar · H3529כְּבָר Kᵉbâr
- fell · H5307נָפַל nâphal
- face · H6440פָּנִים pânîym