Genesis · chapter 3 · verse 22
Genesis 3:22 in Hindi
फिर यहोवा परमेश्वर ने कहा, मनुष्य भले बुरे का ज्ञान पाकर हम में से एक के समान हो गया है: इसलिये अब ऐसा न हो, कि वह हाथ बढ़ाकर जीवन के वृक्ष का फल भी तोड़ के खा ले और सदा जीवित रहे।
Phir yahovaa parameshvar ne kahaa, manushy bhale bure kaa jnyaan paakar ham mem se ek ke samaan ho gayaa hai: isaliye ab aisaa na ho, ki vah haath badhaakar jeevan ke vruksh kaa phal bhee tod ke khaa le aur sadaa jeevit rahe.
Genesis 3:22 in English
- King James Version (KJV)
- And the LORD God said, Behold, the man is become as one of us, to know good and evil: and now, lest he put forth his hand, and take also of the tree of life, and eat, and live for ever:
- World English Bible (WEB)
- The LORD God said, “Behold, the man has become like one of us, knowing good and evil. Now, lest he reach out his hand, and also take of the tree of life, and eat, and live forever—”
- American Standard Version (ASV)
- And Jehovah God said, Behold, the man is become as one of us, to know good and evil; and now, lest he put forth his hand, and take also of the tree of life, and eat, and live for ever—
- Bible in Basic English (BBE)
- And the Lord God said, Now the man has become like one of us, having knowledge of good and evil; and now if he puts out his hand and takes of the fruit of the tree of life, he will go on living for ever.
- Darby Translation (DBY)
- And Jehovah Elohim said, Behold, Man is become as one of us, to know good and evil. And now, lest he stretch out his hand, and take also of the tree of life, and eat, and live for ever...!
- Webster's Bible (WBS)
- And the LORD God said, Behold, the man hath become as one of us, to know good and evil. And now, lest he should put forth his hand, and take also of the tree of life, and eat, and live for ever:
- Young's Literal Translation (YLT)
- And Jehovah God saith, 'Lo, the man was as one of Us, as to the knowledge of good and evil; and now, lest he send forth his hand, and have taken also of the tree of life, and eaten, and lived to the age,' —
Read in context
- 20और आदम ने अपनी पत्नी का नाम हव्वा रखा; क्योंकि जितने मनुष्य जीवित हैं उन सब की आदिमाता वही हुई।
- 21और यहोवा परमेश्वर ने आदम और उसकी पत्नी के लिये चमड़े के अंगरखे बनाकर उनको पहिना दिए।
- 22फिर यहोवा परमेश्वर ने कहा, मनुष्य भले बुरे का ज्ञान पाकर हम में से एक के समान हो गया है: इसलिये अब ऐसा न हो, कि वह हाथ बढ़ाकर जीवन के वृक्ष का फल भी तोड़ के खा ले और सदा जीवित रहे।
- 23तब यहोवा परमेश्वर ने उसको अदन की बाटिका में से निकाल दिया कि वह उस भूमि पर खेती करे जिस मे से वह बनाया गया था।
- 24इसलिये आदम को उस ने निकाल दिया और जीवन के वृक्ष के मार्ग का पहरा देने के लिये अदन की बाटिका के पूर्व की ओर करूबों को, और चारों ओर घूमनेवाली ज्वालामय तलवार को भी नियुक्त कर दिया।।
Cross references
- Revelation 2:7 प्रकाशितवाक्य 2:7जिस के कान हों, वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है: जो जय पाए, मैं उसे उस जीवन के पेड़ में से जो परमेश्वर के स्वर्गलोक में है, फल खाने को दूंगा।।
- Revelation 22:14 प्रकाशितवाक्य 22:14धन्य वे हैं, जो अपने वस्त्रा धो लेते हैं, क्योंकि उन्हें जीवन के पेड़ के पास आने का अधिकार मिलेगा, और वे फाटकों से होकर नगर में प्रवेश करेंगे।
- Proverbs 3:18 नीतिवचन 3:18जो बुद्धि को ग्रहण कर लेते हैं, उनके लिये वह जीवन का वृक्ष बनती है; और जो उसको पकड़े रहते हैं, वह धन्य हैं।।
- Genesis 11:6–7 उत्पत्ति 11:6–7और यहोवा ने कहा, मैं क्या देखता हूं, कि सब एक ही दल के हैं और भाषा भी उन सब की एक ही है, और उन्हों ने ऐसा ही काम भी आरम्भ किया; और अब जितना वे करने का यत्न करेंगे, उस में से कुछ उनके लिये अनहोना न होगा। इसलिये आओ, हम उतर के उनकी भाषा में बड़ी गड़बड़ी डालें, कि वे एक दूसरे की बोली को न समझ सकें।
- Revelation 22:2 प्रकाशितवाक्य 22:2और नदी के इस पार; और उस पार, जीवन का पेड़ था: उस में बारह प्रकार के फल लगते थे, और वह हर महीने फलता था; और उस पेड़ के पत्तों से जाति जाति के लोग चंगे होते थे।
- Genesis 2:9 उत्पत्ति 2:9और यहोवा परमेश्वर ने भूमि से सब भांति के वृक्ष, जो देखने में मनोहर और जिनके फल खाने में अच्छे हैं उगाए, और बाटिका के बीच में जीवन के वृक्ष को और भले या बुरे के ज्ञान के वृक्ष को भी लगाया।
- John 6:48–58 यूहन्ना 6:48–58जीवन की रोटी मैं हूं। तुम्हारे बापदादों ने जंगल में मन्ना खाया और मर गए। यह वह रोटी है जो स्वर्ग से उतरती है ताकि मनुष्य उस में से खाए और न मरे। जीवन की रोटी जो स्वर्ग से उतरी मैं हूं। यदि कोई इस रोटी में से खाए, तो सर्वदा जीवित रहेगा और जो रोटी मैं जगत के जीवन के लिये दूंगा, वह मेरा मांस है। इस पर यहूदी यह कहकर आपस में झगड़ने लगे, कि यह मनुष्य क्योंकर हमें अपना मांस खाने को दे सकता है? यीशु ने उन से कहा; मैं तुम से सच सच कहता हूं जब तक मनुष्य के पुत्रा का मांस न खाओ, और उसका लोहू न पीओ, तुम में जीवन नहीं। जो मेरा मांस खाता, और मेरा लोहू पीता हे, अनन्त जीवन उसी का है, और मैं अंतिम दिन फिर उसे जिला उठाऊंगा। क्योंकि मेरा मांस वास्तव में खाने की वस्तु है और मेरा लोहू वास्तव में पीन की वस्तु है। जो मेरा मांस खाता और मेरा लोहू पीता है, वह मुझ में स्थिर बना रहता है, और मैं उस में। जैसा जीवते पिता ने मुझे भेजा और मैं पिता के कारण जीवित हूं वैसा ही वह भी जो मुझे खाएगा मेरे कारण जीवित रहेगा। जो रोटी स्वर्ग से उतरी यही है, बापदादों के समान नहीं कि खाया, और मर गए: जो कोई यह रोटी खाएगा, वह सर्वदा जीवित रहेगा।
- Genesis 1:26 उत्पत्ति 1:26फिर परमेश्वर ने कहा, हम मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार अपनी समानता में बनाएं; और वे समुद्र की मछलियों, और आकाश के पक्षियों, और घरेलू पशुओं, और सारी पृथ्वी पर, और सब रेंगनेवाले जन्तुओं पर जो पृथ्वी पर रेंगते हैं, अधिकार रखें।
- Genesis 3:5 उत्पत्ति 3:5वरन परमेश्वर आप जानता है, कि जिस दिन तुम उसका फल खाओगे उसी दिन तुम्हारी आंखे खुल जाएंगी, और तुम भले बुरे का ज्ञान पाकर परमेश्वर के तुल्य हो जाओगे।
- Isaiah 47:12–13 यशायाह 47:12–13अपने तन्त्रा मन्त्रा और बहुत से टोनहों को, जिनका तू ने बाल्यावस्था ही से अभ्यास किया है उपयोग में ला, सम्भव है तू उन से लाभ उठा सके या उनके बल से स्थिर रह सके। तू तो युक्ति करते करते थक गई है; अब तेरे ज्योतिषी जो नक्षत्रों को ध्यान से देखते और नये नये चान्द को देखकर होनहार बताते हैं, वे खड़े होकर तुझे उन बातों से बचाए जो तुझ पर घटेंगी।।
- Psalm 22:26 भजन संहिता 22:26नम्र लोग भोजन करके तृप्त होंगे; जो यहोवा के खोजी हैं, वे उसकी स्तुति करेंगे। तुम्हारे प्राण सर्वदा जीवित रहें!
- Isaiah 19:12–13 यशायाह 19:12–13अब तेरे बुद्धिमान कहां है? सेनाओं के यहोवा ने मि के विषय जो युक्ति की है, उसको यदि वे जानते हों तो तुझे बताएं। सोअन के हाकिम मूढ़ बन गए हैं, नोप के हाकिमों ने धोखा खाया है; और जिन पर मि के गोत्रों के प्रधान लोगों का भरोसा था उन्हों ने मि को भरमा दिया है।
Original words (Hebrew)
- God · H430אֱלֹהִים ʼĕlôhîym
- said · H559אָמַר ʼâmar
- Behold · H2005הֵן hên
- man · H120אָדָם ʼâdâm
- one · H259אֶחָד ʼechâd
- know · H3045יָדַע yâdaʻ
- good · H2896טוֹב ṭôwb
- evil · H7451רַע raʻ
- forth · H7971שָׁלַח shâlach
- hand · H3027יָד yâd
- take · H3947לָקַח lâqach
- tree · H6086עֵץ ʻêts
- life · H2416חַי chay
- eat · H398אָכַל ʼâkal
- live · H2425חָיַי châyay
- ever · H5769עוֹלָם ʻôwlâm