Jeremiah · chapter 4 · verse 26
Jeremiah 4:26 in Hindi
फिर मैं क्या देखता हूँ कि यहोवा के प्रताप और उस भड़के हुए प्रकोप के कारण उपजाऊ देश जंगल, और उसके सारे नगर खण्डहर हो गए थे।
Phir maim kyaa dekhataa hoon ki yahovaa ke prataap aur us bhadake hue prakop ke kaaran upajaaoo desh jangal, aur usake saare nagar khandahar ho gae the.
Jeremiah 4:26 in English
- King James Version (KJV)
- I beheld, and, lo, the fruitful place [was] a wilderness, and all the cities thereof were broken down at the presence of the LORD, [and] by his fierce anger.
- World English Bible (WEB)
- I saw, and behold, the fruitful field was a wilderness, and all its cities were broken down at the presence of the LORD, before his fierce anger.
- American Standard Version (ASV)
- I beheld, and, lo, the fruitful field was a wilderness, and all the cities thereof were broken down at the presence of Jehovah, [and] before his fierce anger.
- Bible in Basic English (BBE)
- Looking, I saw that the fertile field was a waste, and all its towns were broken down before the Lord and before his burning wrath.
- Darby Translation (DBY)
- I beheld, and lo, the fruitful land was a wilderness, and all the cities thereof were broken down, before Jehovah, before his fierce anger.
- Webster's Bible (WBS)
- I beheld, and lo, the fruitful place [was] a wilderness, and all its cities were broken down at the presence of the LORD, [and] by his fierce anger.
- Young's Literal Translation (YLT)
- I have looked, and lo, The fruitful place [is] a wilderness, And all its cities have been broken down, Because of Jehovah, Because of the fierceness of His anger.
Read in context
- 24मैं ने पहाड़ों को देखा, मे हिल रहे थे, और सब पहाड़ियों को कि वे डोल रही थीं।
- 25फिर मैं ने क्या देखा कि कोई पनुष्य भी न था और सब पक्षी भी उड़ गए थे।
- 26फिर मैं क्या देखता हूँ कि यहोवा के प्रताप और उस भड़के हुए प्रकोप के कारण उपजाऊ देश जंगल, और उसके सारे नगर खण्डहर हो गए थे।
- 27क्योंकि यहोवा ने यह बताया कि सारा देश उजाड़ हो जाएगा; तौभी मैं उसका अन्त न कर डालूंगा।
- 28इस कारण पृथ्वी विलाप करेगी, और आकाश शोक का काला वस्त्रा पहिनेगा; क्योंकि मैं ने ऐसा ही करते को ठाना और कहा भी है; मैं इस से नहीं पछताऊंगा और न अपने प्रण को छोड़ूंगा।
Cross references
- Psalm 107:34 भजन संहिता 107:34वह फलवन्त भूमि को नोनी करता है, यह वहां के रहनेवालों की दुष्टता के कारण होता है।
- Isaiah 5:9–10 यशायाह 5:9–10सेनाओं के यहोवा ने मेरे सुनते कहा है: निश्चय बहुत से घर सुनसान हो जाएंगे, और बड़ें बड़े और सुन्दर घर निर्जन हो जाएंगे। क्योंकि दस बीघे की दाख की बारी से एक ही बत दाखमधु मिलेगा, और होमेर भर के बीच से एक ही एपा अन्न उत्पन्न होगा।।
- Psalm 76:7 भजन संहिता 76:7केवल तू ही भययोग्य है; और जब तू क्रोध करने लगे, तब तेरे साम्हने कौन खड़ा रह सकेगा?
- Deuteronomy 29:23–28 व्यवस्थाविवरण 29:23–28और यह भी देखकर कि इसकी सब भूमि गन्धक और लोन से भर गई है, और यहां तक जल गई है कि इस में न कुछ बोया जाता, और न कुछ जम सकता, और न घास उगती है, वरन सदोम और अमोरा, अदमा और सबोयीम के समान हो गया है जिन्हें यहोवा ने अपने कोप और जलजलाहट में उलट दिया था; और सब जातियों के लोग पूछेंगे, कि यहोवा ने इस देश से ऐसा क्यों किया? और इस बड़े कोप के भड़कने का क्या कारण है? तब लोग यह उत्तर देंगे, कि उनके पूर्वजों के परमेश्वर यहोवा ने जो वाचा उनके साथ मि देश से निकालने के समय बान्धी थी उसको उन्हों ने तोड़ा है। और पराए देवताओं की उपासना की है जिन्हें वे पहिले नहीं जानते थे, और यहोवा ने उनको नहीं दिया था; इसलिये यहोवा का कोप इस देश पर भड़क उठा है, कि पुस्तक मे लिखे हुए सब शाप इस पर आ पडें; और यहोवा ने कोप, और जलजलाहट, और बड़ा ही क्रोध करके उन्हें उनके देश में से उखाड़ कर दूसरे देश में फेंक दिया, जैसा कि आज प्रगट है।।
- Jeremiah 12:4 यिर्मयाह 12:4कब तक देश विलाप करता रहेगा, और सारे मैदान की घास सूखी रहेगी? देश के निवासियों की बुराई के कारण पशु- पक्षी सब नाश हो गए हैं, क्योंकि उन लोगों ने कहा, वह हमारे अन्त को न देखेगा।
- Jeremiah 14:2–6 यिर्मयाह 14:2–6यहूदा विलाप करता और फाटकों में लोग शोक का पहिरावा पहिने हुए भूमि पर उदास बैठे हैं; और यरूशलेम की चिल्लाहट आकाश तक पहुंच गई है। और उनके बड़े लोग उनके छोटे लोगों को पानी के लिये भेजते हैं; वे गड़हों पर आकर पानी नहीं पाते इसलिये छूछे बर्तन लिए हुए घर लौट जाते हैं; वे लज्जित और निराश होकर सिर ढांप लेते हैं। देश में पानी न बरसने से भूमि में दरार पड़ गए हैं, इस कारण किसान लोग निराश होकर सिर ढांप लेते हैं। हरिणी भी मैदान में बच्चा जनकर छोड़ जाती है क्योंकि हरी घास नहीं मिलती। जंगली गदहे भी मुंडे टीलों पर खड़े हुए गीदड़ों की नाई हांफते हैं; उनकी आंखें धुंधला जाती हैं क्योंकि हरियाली कुछ भी नहीं है।
- Isaiah 7:20–25 यशायाह 7:20–25उसी समय प्रभु महानद के पारवाले अश्शूर के राजारूपी भाड़े के छूरे से सिर और पांवों के रोंएं मूंड़ेगा, उस से दाढ़ी भी पूरी मुंड़ जाएगी।। उस समय ऐसा होगा कि मनुष्य केवल एक कलोर और दो भेड़ों को पालेगा; और वे इतना दूध देंगी कि वह मक्खन खाया करेगा; क्योंकि जितने इस देश में रह जाएंगे वह सब मक्खन और मधु खाया करेंगे।। उस समय जिन जिन स्थानें में हजार टुकड़े चान्दी की हजार दाखलताएं हैं, उन सब स्थानें में कटीले ही कटीले पेड़ होंगे। तीर और धनुष लेकर लोग वहां जाया करेंगे, क्योंकि सरे देश में कटीले पेड़ हो जाएंगे; और जितने पहाड़ कुदाल से खोदे जाते हैं, उन सभों पर कटीले पेड़ों के डर के मारे कोई न जाएगा, वे गाये बैलों के चरने के, और भेड़ बकरियों के रौंदने के लिये होंगे।।
- Micah 3:12 मीका 3:12इसलिये तुम्हारे कारण सिरयोन जोतकर खेत बनाया जाएगा, और यरूशलेम डींह ही डींह हो जाएगा, और जिस पर्वत पर भवन बना है, वह वन के ऊंचे स्थान सा हो जाएगा।।