Jeremiah · chapter 46 · verse 8
Jeremiah 46:8 in Hindi
मिस्र नील नदी की नाई बढ़ता है, उसका जल महानदों का सा उछलता है। वह कहता है, मैं चढ़कर पृथ्वी को भर दूंगा, मैं नगरों को उनके निवासियों समेत नाश कर दूंगा।
Misr neel nadee kee naaee badhataa hai, usakaa jal mahaanadom kaa saa uchhalataa hai. Vah kahataa hai, maim chadhakar pruthvee ko bhar doongaa, maim nagarom ko unake nivaasiyom samet naash kar doongaa.
Jeremiah 46:8 in English
- King James Version (KJV)
- Egypt riseth up like a flood, and [his] waters are moved like the rivers; and he saith, I will go up, [and] will cover the earth; I will destroy the city and the inhabitants thereof.
- World English Bible (WEB)
- Egypt rises up like the Nile, like rivers whose waters surge. He says, ‘I will rise up. I will cover the earth. I will destroy cities and its inhabitants.’
- American Standard Version (ASV)
- Egypt riseth up like the Nile, and his waters toss themselves like the rivers: and he saith, I will rise up, I will cover the earth; I will destroy cities and the inhabitants thereof.
- Bible in Basic English (BBE)
- Egypt is coming up like the Nile, and his waters are lifting their heads like the rivers, and he says, I will go up, covering the earth; I will send destruction on the town and its people.
- Darby Translation (DBY)
- It is Egypt that riseth up as the Nile, and [his] waters toss themselves like the rivers; and he saith, I will rise up, I will cover the earth; I will destroy the city and the inhabitants thereof.
- Webster's Bible (WBS)
- Egypt riseth up like a flood, and [his] waters are moved like the rivers; and he saith, I will go up, [and] will cover the earth; I will destroy the city and its inhabitants.
- Young's Literal Translation (YLT)
- Egypt, as a flood cometh up, And as rivers the waters shake themselves. And he saith, I go up; I cover the land, I destroy the city and the inhabitants in it.
Read in context
- 6न वेग चलनेवाला भागने पाएगा और न वीर बचने पाएगा; क्योंकि उत्तर दिशा में परात महानद के तीर पर वे सब ठोकर खाकर गिर पड़े।
- 7यह कौन है, जो नील नदी की नाई, जिसका जल महानदों का सा उछलता है, बढ़ा चला आता है?
- 8मिस्र नील नदी की नाई बढ़ता है, उसका जल महानदों का सा उछलता है। वह कहता है, मैं चढ़कर पृथ्वी को भर दूंगा, मैं नगरों को उनके निवासियों समेत नाश कर दूंगा।
- 9हे मिस्री सवारो आगे बढ़ो, हे रथियो बहुत ही वेग से चलाओ! हे ढाल पकड़नेवाले कूशी और पूती वीरो, हे धनुर्धारी लूदियो चले आओ।
- 10क्योंकि वह दिन सेनाओं के यहोवा प्रभु के बदला लेने का दिन होगा जिस में वह अपने द्रोहियों से बदला लेगा। सो तलवार खाकर तृप्त होगी, और उनका लोहू पीकर छक जाएगी। क्योंकि, उत्तर के देश में परान महानद के तीर पर, सेनाओं के यहोवा प्रभु का यज्ञ है।
Cross references
- Ezekiel 32:2 यहेजकेल 32:2हे मनुष्य के सन्तान, मिस्र के राजा फिरौन के विषय विलाप का गीत बनाकर उसको सुनो जाति जाति में तेरी उपमा जवान सिंह से दी गई थी, परन्तु तू समुद्र के मगर के समान है; तू अपनी नदियों में टूट पड़ा, और उनके जल को पांवों से मथकर गंदला कर दिया।
- Exodus 15:9–10 निर्गमन 15:9–10शत्रु ने कहा था, मैं पीछा करूंगा, मैं जा पकडूंगा, मैं लूट के माल को बांट लूंगा, उन से मेरा जी भर जाएगा। मै अपनी तलवार खींचते ही अपने हाथ से उनको नाश कर डालूंगा।। तू ने अपने श्वास का पवन चलाया, तब समुद्र ने उनको ढांप लिया; वे महाजलराशि में सीसे की नाई डूब गए।।
- Ezekiel 29:3 यहेजकेल 29:3यह कह, परमेश्वर यहोवा यों कहता हे, हे मिस्र के राजा फिरौन, मैं तेरे विरुद्ध हूँ, हे बड़े नगर, तू जो अपनी नदियों के बीच पड़ा रहता है, जिसने कहा है कि मेरी नदी मेरी निज की है, और मैं ही ने उसको अपने लिये बनाया है।
- Isaiah 10:13–16 यशायाह 10:13–16उस ने कहा है, अपने ही बाहुबल और बुद्धि से मैं ने यह काम किया है, क्योंकि मैं चतुर हूं; मैं ने देश देश के सिवानों को हटा दिया, और उनके रखे हुए धन को लूअ लिया; मैं ने वीर की नाई गद्दी पर विराजनेहारों को उतार दिया है। देश देश के लोगों की धनसम्पत्ति, चिड़ियों के घोंसलों की नाईं, मेरे हाथ आई है, और जैसे कोई छोड़े हुए अण्डों को बटोर ले वैसे ही मैं ने सारी पृथ्वी को बटोर लिया है; और कोई पंख फड़फड़ाने वा चोंच खोलने वा चीं चीं करनेवाला न था।। क्या कुल्हाड़ा उसक विरूद्ध जो उस से काटता हो डींग मारे, वा आरी उसके विरूद्ध जो उसे खींचता हो बड़ाई करे? क्या सोंटा अपने चलानेवाले को चलाए वा छड़ी उसे उठाए जो काठ नहीं है! इस कारण प्रभु अर्थात् सेनाओं का प्रभु उस राजा के हृष्टपुष्ट योद्धाओं को दुबला कर देगा, और उसके ऐश्वर्य के नीचे आग की सी जलन होगी।
- Isaiah 37:24–26 यशायाह 37:24–26अपने कर्मचारियों के द्वारा तू ने प्रभु की निन्दा करके कहा है कि बहुत से रथ लेकर मैं पर्वतों की चोटियों पर वरन लबानोन के बीच तक चढ़ आया हूं; मैं उसके ऊंचे ऊंचे देवदारों और अच्छे अच्छे सनौबरों को काट डालूंगा और उसके दूर दूर के ऊंचे स्थानों में और उसके वन की फलदाई बारियों में प्रवेश करूंगा। मैं ने खुदवाकर पानी पिया और मि की नहरों में पांव धरते ही उन्हें सुखा दिया। क्या तू ने नहीं सुना कि प्राचीनकाल से मैं ने यही ठाना और पूर्वकाल से इसकी तैयारी की थी? इसलिये अब मैं ने यह पूरा भी किया है कि तू गढ़वाले नगरों को खण्डहर की खण्डहर कर दे।
Original words (Hebrew)
- Egypt · H4714מִצְרַיִם Mitsrayim
- up · H5927עָלָה ʻâlâh
- flood · H2975יְאֹר yᵉʼôr
- waters · H4325מַיִם mayim
- moved · H1607גָּעַשׁ gâʻash
- rivers · H5104נָהָר nâhâr
- saith · H559אָמַר ʼâmar
- up · H5927עָלָה ʻâlâh
- cover · H3680כָּסָה kâçâh
- earth · H776אֶרֶץ ʼerets
- destroy · H6אָבַד ʼâbad
- city · H5892עִיר ʻîyr
- inhabitants · H3427יָשַׁב yâshab