Job · chapter 6 · verse 10
Job 6:10 in Hindi
यही मेरी शान्ति का कारण; वरन भारी पीड़ा में भी मैं इस कारण से उछल पड़ता; क्योंकि मैं ने उस पवित्रा के वचनों का कभी इनकार नहीं किया।
Yahee meree shaanti kaa kaaran; varan bhaaree peedaa mem bhee maim is kaaran se uchhal padataa; kyonki maim ne us pavitraa ke vachanom kaa kabhee inakaar naheem kiyaa.
Job 6:10 in English
- King James Version (KJV)
- Then should I yet have comfort; yea, I would harden myself in sorrow: let him not spare; for I have not concealed the words of the Holy One.
- World English Bible (WEB)
- Let it still be my consolation, yes, let me exult in pain that doesn’t spare, that I have not denied the words of the Holy One.
- American Standard Version (ASV)
- And be it still my consolation, Yea, let me exult in pain that spareth not, That I have not denied the words of the Holy One.
- Bible in Basic English (BBE)
- So I would still have comfort, and I would have joy in the pains of death, for I have not been false to the words of the Holy One.
- Darby Translation (DBY)
- Then should I yet have comfort; and in the pain which spareth not I would rejoice that I have not denied the words of the Holy One.
- Webster's Bible (WBS)
- Then should I yet have comfort; yes, I would harden myself in sorrow: let him not spare; for I have not concealed the words of the Holy One.
- Young's Literal Translation (YLT)
- And yet it is my comfort, (And I exult in pain — He doth not spare,) That I have not hidden The sayings of the Holy One.
Read in context
- 8भला होता कि मुझे मुंह मांगा वर मिलता और जिस बात की मैं आशा करता हूँ वह ईश्वर मुझे दे देता!
- 9कि ईश्वर प्रसन्न होकर मुझे कुचल डालता, और हाथ बढ़ाकर मुझे काट डालता!
- 10यही मेरी शान्ति का कारण; वरन भारी पीड़ा में भी मैं इस कारण से उछल पड़ता; क्योंकि मैं ने उस पवित्रा के वचनों का कभी इनकार नहीं किया।
- 11मुझ में बल ही क्या है कि मैं आशा रखूं? और मेरा अन्त ही क्या होगा, कि मैं धीरज धरूं?
- 12क्या मेरी दृढ़ता पत्थरों की सी है? क्या मेरा शरीर पीतल का है?
Cross references
- Job 23:12 अय्यूब 23:12उसकी आज्ञा का पालन करने से मैं न हटा, और मैं ने उसके वचन अपनी इच्छा से कहीं अधिक काम के जानकर सुरक्षित रखे।
- Isaiah 57:15 यशायाह 57:15क्योंकि जो महान और उत्तम और सदैव स्थिर रहता, और जिसका नाम पवित्रा है, वह यों कहता है, मैं ऊंचे पर और पवित्रा स्थान में निवास करता हूं, और उसके संग भी रहता हूं, जो खेदित और नम्र हैं, कि, नम्र लोगों के हृदय और खेदित लोगों के मन को हर्षित करूं।
- Leviticus 19:2 लैव्यव्यवस्था 19:2इस्त्राएलियों की सारी मण्डली से कह, कि तुम पवित्रा बने रहो; क्योंकि मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा पवित्रा हूं।
- Psalm 40:9–10 भजन संहिता 40:9–10मैं ने बड़ी सभा में धर्म के शुभ समाचार का प्रचार किया है; देख, मैं ने अपना मुंह बन्द नहीं किया हे यहोवा, तू इसे जानता है। मैं ने तेरा धर्म मन ही में नहीं रखा; मैं ने तेरी सच्चाई और तेरे किए हुए उधार की चर्चा की है; मैं ने तेरी करूणा और सत्यता बड़ी सभा से गुप्त नहीं रखी।।
- Psalm 71:17–18 भजन संहिता 71:17–18हे परमेश्वर, तू तो मुझ को बचपन ही से सिखाता आया है, और अब तक मैं तेरे आश्चर्य कर्मों का प्रचार करता आया हूं। इसलिये हे परमेश्वर जब मैं बूढ़ा हो जाऊं और मेरे बाल पक जाएं, तब भी तू मुझे न छोड़, जब तक मैं आनेवाली पीढ़ी के लोगों को तेरा बाहुबल और सब उत्पन्न होनेवालों को तेरा पराक्रम सुनाऊं।
- Revelation 3:7 प्रकाशितवाक्य 3:7और फिलेदिलफिया की कलीसिया के दूत को यह लिख, कि, जो पवित्रा और सत्य है, और जो दाऊद की कुंजी रखता है, जिस के खोले हुए को कोई बन्द नहीं कर सकता और बन्द किए हुए को कोई खोल नहीं सकता, वह यह कहता है, कि।
- Psalm 37:30 भजन संहिता 37:30धर्मी अपने मुंह से बुद्धि की बातें करता, और न्याय का वचन कहता है।
- Job 3:22 अय्यूब 3:22वे क़ब्र को पहुंचकर आनन्दित और अत्यन्त मगन होते हैं।
- Job 9:4 अय्यूब 9:4वह बुध्दिमान और अति सामथ हैे उसके विरोध में हठ करके कौन कभी प्रबल हुआ है?
- Psalm 119:13 भजन संहिता 119:13तेरे सब कहे हुए नियमों का वर्णन, मैं ने अपने मुंह से किया है।
- Habakkuk 1:12 हबक्कूक 1:12हे मेरे प्रभु यहोवा, हे मेरे पवित्रा परमेश्वर, क्या तू अनादि काल से नहीं है? इस कारण हम लोग नहीं मरने के। हे यहोवा, तू ने उनको न्याय करने के लिये ठहराया है; हे चट्टान, तू ने उलाहना देने के लिये उनको बैठाया है।
- 2 Peter 2:4–5 2 पतरस 2:4–5क्योंकि जब परमेश्वर ने उन स्वर्गदूतों को जिन्हों ने पाप किया नहीं छोड़ा, पर नरक में भेजकर अन्धेरे कुण्डों में डाल दिया, ताकि न्याय के दिन तक बन्दी रहें। और प्रथम युग के संसार को भी न छोड़ा, बरन भक्तिहीन संसार पर महा जल- प्रलय भेजकर धर्म के प्रचारक नूह समेत आठ व्यक्तियों को बचा लिया।