Job · chapter 6 · verse 11
Job 6:11 in Hindi
मुझ में बल ही क्या है कि मैं आशा रखूं? और मेरा अन्त ही क्या होगा, कि मैं धीरज धरूं?
Mujh mem bal hee kyaa hai ki maim aashaa rakhoom? Aur meraa ant hee kyaa hogaa, ki maim dheeraj dharoom?
Job 6:11 in English
- King James Version (KJV)
- What [is] my strength, that I should hope? and what [is] mine end, that I should prolong my life?
- World English Bible (WEB)
- What is my strength, that I should wait? What is my end, that I should be patient?
- American Standard Version (ASV)
- What is my strength, that I should wait? And what is mine end, that I should be patient?
- Bible in Basic English (BBE)
- Have I strength to go on waiting, or have I any end to be looking forward to?
- Darby Translation (DBY)
- What is my strength, that I should hope? and what is mine end, that I should have patience?
- Webster's Bible (WBS)
- What [is] my strength, that I should hope? and what [is] my end, that I should prolong my life?
- Young's Literal Translation (YLT)
- What [is] my power that I should hope? And what mine end That I should prolong my life?
Read in context
- 9कि ईश्वर प्रसन्न होकर मुझे कुचल डालता, और हाथ बढ़ाकर मुझे काट डालता!
- 10यही मेरी शान्ति का कारण; वरन भारी पीड़ा में भी मैं इस कारण से उछल पड़ता; क्योंकि मैं ने उस पवित्रा के वचनों का कभी इनकार नहीं किया।
- 11मुझ में बल ही क्या है कि मैं आशा रखूं? और मेरा अन्त ही क्या होगा, कि मैं धीरज धरूं?
- 12क्या मेरी दृढ़ता पत्थरों की सी है? क्या मेरा शरीर पीतल का है?
- 13क्या मैं निराधार नहीं हूँ? क्या काम करने की शक्ति मुझ से दूर नहीं हो गई?
Cross references
- Psalm 103:14–16 भजन संहिता 103:14–16क्योंकि वह हमारी सृष्टि जानता है; और उसको स्मरण रहता है कि मनुष्य मिट्टी ही है।। मनुष्य की आयु घास के समान होती है, वह मैदान के फूल की नाईं फूलता है, जो पवन लगते ही ठहर नहीं सकता, और न वह अपने स्थान में फिर मिलता है।
- Psalm 39:5 भजन संहिता 39:5देख, तू ने मेरे आयु बालिश्त भर की रखी है, और मेरी अवस्था तेरी दृष्टि में कुछ है ही नहीं। सचमुच सब मनुष्य कैसे ही स्थिर क्यों न हों तौभी व्यर्थ ठहरे हैं।
- Psalm 102:23 भजन संहिता 102:23उस ने मुझे जीवन यात्रा में दु:ख देकर, मेरे बल और आयु को घटाया।
- Job 17:1 अय्यूब 17:1मेरा प्राण नाश हुआ चाहता है, मेरे दिन पूरे हो चुके हैं; मेरे लिये कब्र तैयार है।
- Job 21:4 अय्यूब 21:4क्या मैं किसी मनुष्य की दोहाई देता हूँ? फिर मैं अधीर क्यों न होऊं?
- Job 7:5–7 अय्यूब 7:5–7मेरी देह कीड़ों और और मिट्टी के ढेलों से ढकी हुई है; मेरा चमड़ा सिमट जाता, और फिर गल जाता है। मेरे दिन जुलाहे की धड़की से अधिक फुत से चलनेवाले हैं और निराशा में बीते जाते हैं। याद कर कि मेरा जीवन वायु ही है; और मैं अपनी आंखों से कल्याण फिर न देखूंगा।
- Job 10:20 अय्यूब 10:20क्या मेरे दिन थोड़े नहीं? मुझे छोड़ दे, और मेरी ओर से मुंह फेर ले, कि मेरा मन थोड़ा शान्त हो जाए
- Job 13:25 अय्यूब 13:25क्या तू उड़ते हुए पत्ते को भी कंपाएगा? और सूखे डंठल के पीछे पड़ेगा?
- Job 13:28 अय्यूब 13:28और मैं सड़ी गली वस्तु के तुल्य हूं जो नाश हो जाती है, और कीड़ा खाए कपड़े के तुल्य हूँ।
- Psalm 90:5–10 भजन संहिता 90:5–10तू मनुष्यों को धारा में बहा देता है; वे स्वप्न से ठहरते हैं, वे भोर को बढ़नेवाली घास के समान होते हैं। वह भोर को फूलती और बढ़ती है, और सांझ तक काटकर मुर्झा जाती है।। क्योंकि हम तेरे क्रोध से नाश हुए हैं; और तेरी जलजलाहट से घबरा गए हैं। तू ने हमारे अधर्म के कामों से अपने सम्मुख, और हमारे छिपे हुए पापों को अपने मुख की ज्योति में रखा है।। क्योंकि हमारे सब दिन तेरे क्रोध में बीत जाते हैं, हम अपने वर्ष शब्द की नाई बिताते हैं। हमारी आयु के वर्ष सत्तर तो होते हैं, और चाहे बल के कारण अस्सी वर्ष के भी हो जाएं, तौभी उनका घमण्ड केवल नष्ट और शोक ही शोक है; क्योंकि वह जल्दी कट जाती है, और हम जाते रहते हैं।
- Job 17:14–16 अय्यूब 17:14–16यदि मैं ने सड़ाहट से कहा कि तू मेरा पिता है, और कीड़े से, कि तू मेरी मां, और मेरी बहिन है, तो मेरी आशा कहां रही? और मेरी आशा किस के देखने में आएगी? वह तो अधोलोक में उतर जाएगी, और उस समेत मुझे भी मिट्टी में विश्राम मिलेगा।