Judges · chapter 17 · verse 3
Judges 17:3 in Hindi
जब उस ने वे ग्यारह सौ टुकड़े चान्दी अपनी माता को फेर दिए; तब माता ने कहा, मैं अपनी ओर से अपने बेटे के लिये यह रूपया यहोवा को निश्चय अर्पण करती हूं ताकि उस से एक मूरत खोदकर, और दूसरी ढालकर बनाई जाए, सो अब मैं उसे तुझ को फेर देती हूं।
Jab us ne ve gyaarah sau tukade chaandee apanee maataa ko pher die; tab maataa ne kahaa, maim apanee or se apane bete ke liye yah roopayaa yahovaa ko nishchay arpan karatee hoom taaki us se ek moorat khodakar, aur doosaree dhaalakar banaaee jaae, so ab maim use tujh ko pher detee hoon.
Judges 17:3 in English
- King James Version (KJV)
- And when he had restored the eleven hundred [shekels] of silver to his mother, his mother said, I had wholly dedicated the silver unto the LORD from my hand for my son, to make a graven image and a molten image: now therefore I will restore it unto thee.
- World English Bible (WEB)
- He restored the eleven hundred pieces of silver to his mother, then his mother said, “I most certainly dedicate the silver to the LORD from my hand for my son, to make a carved image and a molten image. Now therefore I will restore it to you.”
- American Standard Version (ASV)
- And he restored the eleven hundred [pieces] of silver to his mother; and his mother said, I verily dedicate the silver unto Jehovah from my hand for my son, to make a graven image and a molten image: now therefore I will restore it unto thee.
- Bible in Basic English (BBE)
- And he gave back the eleven hundred shekels of silver to his mother, and his mother said, I have made the silver holy to the Lord from me for my son, to make a pictured image and a metal image.
- Darby Translation (DBY)
- And he restored the eleven hundred silver-pieces to his mother; and his mother said, I had dedicated the silver to Jehovah from my hand for my son, to make a graven image and a molten image; and now I will restore it to thee.
- Webster's Bible (WBS)
- And when he had restored the eleven hundred [shekels] of silver to his mother, his mother said, I had wholly dedicated the silver to the LORD from my hand for my son, to make a graven image and a molten image: now therefore I will restore it to thee.
- Young's Literal Translation (YLT)
- And he giveth back the eleven hundred silverlings to his mother, and his mother saith, 'I had certainly sanctified the silver to Jehovah, from my hand, for my son, to make a graven image, and a molten image; and now, I give it back to thee.'
Read in context
- 1एप्रैम के पहाड़ी देश में मीका नाम एक पुरूष था।
- 2उस ने अपनी माता से कहा, जो ग्यारह सौ टुकड़े चान्दी तुझ से ले लिए गए थे, जिनके विषय में तू ने मेरे सुनते भी शाप दिया था, वे मेरे पास हैं; मैं ने ही उनको ले लिया था। उसकी माता ने कहा, मेरे बेटे पर यहोवा की ओर से आशीष होए।
- 3जब उस ने वे ग्यारह सौ टुकड़े चान्दी अपनी माता को फेर दिए; तब माता ने कहा, मैं अपनी ओर से अपने बेटे के लिये यह रूपया यहोवा को निश्चय अर्पण करती हूं ताकि उस से एक मूरत खोदकर, और दूसरी ढालकर बनाई जाए, सो अब मैं उसे तुझ को फेर देती हूं।
- 4जब उस ने वह रूपया अपनी माता को फेर दिया, तब माता ने दो सौ टुकड़े ढलवैयों को दिए, और उस ने उन से एक मूर्त्ति खोदकर, और दूसरी ढालकर बनाई; और वे मीका के घर में रहीं।
- 5मीका के पास एक देवस्थान था, तब उस ने एक एपोद, और कई एक गृहदेवता बनवाए; और अपने एक बेटे का संस्कार करके उसे अपना पुरोहित ठहरा लियां
Cross references
- Leviticus 19:4 लैव्यव्यवस्था 19:4तुम मूरतों की ओर न फिरना, और देवताओं की प्रतिमाएं ढालकर न बना लेना; मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूं।
- Exodus 20:4 निर्गमन 20:4तू अपने लिये कोई मूर्ति खोदकर न बनाना, न किसी कि प्रतिमा बनाना, जो आकाश में, वा पृथ्वी पर, वा पृथ्वी के जल में है।
- Exodus 20:23 निर्गमन 20:23तुम मेरे साथ किसी को सम्मिलित न करना, अर्थात् अपने लिये चान्दी वा सोने से देवताओं को न गढ़ लेना।
- Jeremiah 10:8 यिर्मयाह 10:8परन्तु वे पशु सरीखे निरे मूर्ख हैं; मूर्त्तियों से क्या शिक्षा? वे तो काठ ही हैं!
- Deuteronomy 12:3 व्यवस्थाविवरण 12:3उनकी वेदियों को ढा देना, उनकी लाठों को तोड़ डालना, उनकी अशेरा नाम मूर्त्तियों को आग में जला देना, और उनके देवताओं की खुदी हुई मूर्त्तियों को काटकर गिरा देना, कि उस देश में से उनके नाम तक मिट जाएं।
- Exodus 34:17 निर्गमन 34:17तुम देवताओं की मूत्तियां ढालकर न बना लेना।
- Isaiah 40:18–25 यशायाह 40:18–25तुम ईश्वर को किस के समान बताओगे और उसकी उपमा किस से दोगे? मूरत! कारीगर ढालता है, सोनार उसको सोने से मढ़ता और उसके लिये चान्दी की सांकलें ढालकर बनाता है। जो कंगाल इतना अर्पण नहीं कर सकता, वह ऐसा वृक्ष चुन लेता है जो न घुने; तब एक निपुण कारीगर ढूंढकर मूरत खुदवाता और उसे ऐसा स्थिर कराता है कि वह हिल न सके।। क्या तुम नहीं जानते? क्या तुम ने नहीं सुना? क्या तुम को आरम्भ ही से नहीं बताया गया? क्या तुम ने पृथ्वी की नेव पड़ने के समय ही से विचार नहीं किया? यह वह है जो पृथ्वी के घेरे के ऊपर आकाशमण्डल पर विराजमान है; और पृथ्वी के रहनेवाले टिड्डी के तुल्य है; जो आकाश को मलमल की नाईं फैलाता और ऐसा तान देता है जैसा रहने के लिये तम्बू ताना जाता है; जो बड़े बड़े हाकिमों को तुच्छ कर देता है, और पृथ्वी के अधिकारियों को शून्य के समान कर देता है।। वे रोपे ही जाते, वे बोए ही जाते, उनके ठूंठ भूमि में जड़ ही पकड़ पाते कि वह उन पर पवन बहाता और वे सूख जाते, और आंधी उन्हें भूसे की नाई उड़ा ले जाती है।। सो तुम मुझे किस के समान बताओगे कि मैं उसके तुल्य ठहरूं? उस पवित्रा का यही वचन है।
- Psalm 115:4–8 भजन संहिता 115:4–8उन लोगों की मूरतें सोने चान्दी ही की तो हैं, वे मनुष्यों के हाथ की बनाई हुई हैं। उनक मुंह तो रहता है परन्तु वे बोल नहीं सकती; उनके आंखें तो रहती हैं परन्तु वे देख नहीं सकतीं। उनके कान तो रहते हैं, परन्तु वे सुन नहीं सकतीं; उनके नाक तो रहती हैं, परन्तु वे सूंघ नहीं सकतीं। उनके हाथ तो रहते हैं, परन्तु वे स्पर्श नहीं कर सकतीं; उनके पांव तो रहते हैं, परन्तु वे चल नहीं सकतीं; और उनके कण्ठ से कुछ भी शब्द नहीं निकाल सकतीं। जैसी वे हैं वैसे ही उनके बनानेवाले हैं; और उन पर भरोसा रखनेवाले भी वैसे ही हो जाएंगे।।
- John 16:2 यूहन्ना 16:2वे तुम्हें आराधनालयों में से निकाल देंगे, वरन वह समय आता है, कि जो कोई तुम्हें मार डालेगा यह समझेगा कि मैं परमेश्वर की सेवा करता हूं।
- Isaiah 66:3 यशायाह 66:3बैल का बलि करने वाला मनुष्य के मार डालने वाले के समान है; जो भेड़ के चढ़ाने वाला है वह उसके समान है जो कुत्ते का गला काटता है; जो अन्नबलि चढ़ाता है वह मानो सूअर का लोहू चढ़ाने वाले के समान है; और, जो लोबान जलाता है, वह उसके समान है जो मूरत को धन्य कहता है। इन सभों ने अपना अपना मार्ग चुन लिया है, और घिनौनी वस्तुओं से उनके मन प्रसन्न हाते हैं।
- Isaiah 44:9–20 यशायाह 44:9–20जो मूरत खोदकर बनाते हैं, वे सब के सब व्यर्थ हैं और जिन वस्तुओं में वे आनन्द ढूंढते उन से कुछ लाभ न होगा; उसके साक्षी, न तो आप कुछ देखते और न कुछ जानते हैं, इसलिये उनको लज्जित होना पड़ेगा। किस ने देवता वा निष्फल मूरत ढाली है? देख, उसके सब संगियों को तो लज्जित होना पड़ेगा, कारीगर तो मनुष्य ही है; वे सब के सब इकट्ठे होकर खड़े हों; वे डर जाएंगे; वे सब के सब लज्जित होंगे। लोहार एक बसूला अंगारों मे बनाता और हथौड़ों से गढ़कर तैयार करता है, अपने भुजबल से वह उसको बनाता है; फिर वह भूखा हो जाता है और उसका बल घटता है, वह पानी नहीं पीता और थक जाता है। बढ़ई सूत लगाकर टांकी से रखा करता है और रन्दनी से काम करता और परकार से रेखा खींचता है, वह उसका आकार और मनुष्य की सी सुन्दरता बनाता है ताकि लोग उस घर में रखें। वह देवदार को काटता वा वन के वृक्षों में से जाति जाति के बांजवृक्ष चुनकर सेवता है, वह एक तूस का वृक्ष लगाता है जो वर्षा का जल पाकर बढ़ता है। तब वह मनुष्य के ईंधन के काम में आता है; वह उस में से कुछ सुलगाकर तापता है, वह उसको जलाकर रोटी बनाता है; उसी से वह देवता भी बनाकर उसको दण्डवत् करता है; वह मूरत खुदवाकर उसके साम्हने प्रणाम करता है। और उसके बचे हुए भाग को लेकर वह एक देवता अर्थात् एक मूरत उसका एक भाग तो वह आग में जलाता और दूसरे भाग से मांस पकाकर खाता है, वह मांस भूनकर तृप्त होता; फिर तपाकर कहता है, अहा, मैं गर्म हो गया, मैं ने आग देखी है! खोदकर बनाता है; तब वह उसके साम्हने प्रणाम और दण्डवत् करता और उस से प्रार्थना करके कहता है, मुझे बचा ले, क्योंकि तू मेरा देवता है। वे कुछ नहीं जानते, न कुछ समझ रखते हैं; क्योंकि उनकी आंखें ऐसी मून्दी गई हैं कि वे देख नहीं सकते; और उनकी बुद्धि ऐसी कि वे बूझ नहीं सकते। कोई इस पर ध्यान नहीं करता, और न किसी को इतना ज्ञान वा समझ रहती है कि कह सके, उसका एक भाग तो मैं ने जला दिया और उसके कोयलों पर रोटी बनाई; और मांस भूनकर खाया है; फिर क्या मैं उसके बचे हुए भाग को घिनौनी वस्तु बनाऊं? क्या मैं काठ को प्रणाम करूं? वह राख खाता है; भरमाई हुई बुद्धि के कारण वह भटकाया गया है और वह न अपने को बचा सकता और न यह कह सकता है, क्या मेरे दहिने हाथ में मिथ्या नहीं?
- Jeremiah 10:3–5 यिर्मयाह 10:3–5क्योंकि देशों के लोगों की रीतियां तो निकम्मी हैं। मूरत तो बन में से किसी का काटा हुआ काठ है जिसे कारीगर ने बसूले से बनाया है। लोग उसको सोने- चान्दी से सजाते और हथैड़े से कील ठोंक ठोंककर दुढ़ करते हैं कि वह हिल- डुल न सके। वे खरादकर ताड़ के पेड़ के समान गोल बनाई जाती हैं, पर बोल नहीं सकतीं; उन्हें उठाए फिरना पड़ता है, क्योंकि वे चल नहीं सकतीं। उन से मत डरो, क्योंकि, न तो वे कुछ बुरा कर सकती हैं और न कुछ भला।
Original words (Hebrew)
- restored · H7725שׁוּב shûwb
- hundred · H505אֶלֶף ʼeleph
- silver · H3701כֶּסֶף keçeph
- mother · H517אֵם ʼêm
- mother · H517אֵם ʼêm
- said · H559אָמַר ʼâmar
- wholly · H6942קָדַשׁ qâdash
- dedicated · H6942קָדַשׁ qâdash
- silver · H3701כֶּסֶף keçeph
- hand · H3027יָד yâd
- son · H1121בֵּן bên
- make · H6213עָשָׂה ʻâsâh
- image · H6459פֶּסֶל peçel
- image · H4541מַסֵּכָה maççêkâh
- restore · H7725שׁוּב shûwb