Luke · chapter 10 · verse 26
Luke 10:26 in Hindi
उस ने उस से कहा; कि व्यवस्था में क्या लिखा है? तू कैसे पढ़ता है?
Us ne us se kahaa; ki vyavasthaa mem kyaa likhaa hai? Too kaise padhataa hai?
Luke 10:26 in English
- King James Version (KJV)
- He said unto him, What is written in the law? how readest thou?
- World English Bible (WEB)
- He said to him, “What is written in the law? How do you read it?”
- American Standard Version (ASV)
- And he said unto him, What is written in the law? how readest thou?
- Bible in Basic English (BBE)
- And he said to him, What does the law say, in your reading of it?
- Darby Translation (DBY)
- And he said to him, What is written in the law? how readest thou?
- Webster's Bible (WBS)
- He said to him, What is written in the law? how readest thou?
- Young's Literal Translation (YLT)
- And he said unto him, 'In the law what hath been written? how dost thou read?'
Read in context
- 24क्योंकि मैं तुम से कहता हूं, कि बहुत से भविष्यद्वक्ताओं और राजाओं ने चाहा, कि जो बातें तुम देखते हो देखें; पर न देखीं और जो बातें तुम सुनते हो सुनें, पर न सुनीं।।
- 25और देखो, एक व्यवस्थापक उठा; और यह कहकर, उस की परीक्षा करने लगा; कि हे गुरू, अनन्त जीवन का वारिस होने के लिये मैं क्या करूं?
- 26उस ने उस से कहा; कि व्यवस्था में क्या लिखा है? तू कैसे पढ़ता है?
- 27उस ने उत्तर दिया, कि तू प्रभु अपने परमेश्वर से अपने सारे मन और अपने सारे प्राण और अपनी सारी शक्ति और अपनी सारी बुद्धि के साथ प्रेम रख; और अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख।
- 28उस ने उस से कहा, तू ने ठीक उत्तर दिया है, यही कर: तो तू जीवित रहेगा।
Cross references
- Romans 10:5 रोमियों 10:5क्योंकि मूसा ने यह लिखा है, कि जो मनुष्य उस धार्मिकता पर जो व्यवस्था से है, चलता है, वह इसी कारण जीवित रहेगा।
- Isaiah 8:20 यशायाह 8:20व्यवस्था और चितौनी ही की चर्चा किया करो! यदि वे लोग इस वचनों के अनुसार न बोलें तो निश्चय उनके लिये पौ न फटेगी
- Galatians 3:21–22 गलातियों 3:21–22तो क्या व्यवस्था परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं के विरोध में है? कदापि न हो? क्योंकि यदि ऐसी व्यवस्था दी जाती जो जीवन दे सकती, तो सचमुच धार्मिकता व्यवस्था से होती। परन्तु पवित्रा शास्त्रा ने सब को पाप के आधीन कर दिया, ताकि वह प्रतिज्ञा जिस का आधार यीशु मसीह पर विश्वास करना है, विश्वास करनेवालों के लिये पूरी हो जाए।।
- Romans 3:19 रोमियों 3:19हम जानते हैं, कि व्यवस्था जो कुछ कहती है उन्हीं से कहती है, जो व्यवस्था के आधीन हैं: इसलिये कि हर एक मुंह बन्द किया जाए, और सारा संसार परमेश्वर के दण्ड के योग्य ठहरे।
- Romans 4:14–16 रोमियों 4:14–16क्योंकि यदि व्यवस्थावाले वारिस हैं, तो विश्वास व्यर्थ और प्रतिज्ञा निष्फल ठहरी। व्यवस्था तो क्रोध उपजाती है और जहां व्यवस्था नहीं वहां उसका टालना भी नहीं। इसी कारण वह विश्वास के द्वारा मिलती है, कि अनुग्रह की रीति पर हो, कि प्रतिज्ञा सब वंश के लिये दृढ़ हो, न कि केवल उसक लिये जो व्यवस्थावाला है, बरन उन के लिये भी जो इब्राहीम के समान विश्वासवाले हैं: वही तो हम सब का पिता है।
- Galatians 3:12–13 गलातियों 3:12–13पर व्यवस्था का विश्वास से कुछ सम्बन्ध नहीं; पर जो उन को मानेगा, वह उन के कारण जीवित रहेगा। मसीह ने जो हमारे लिये स्त्रापित बना, हमें मोल लेकर व्यवस्था के स्त्राप से छुड़ाया क्योंकि लिखा है, जो कोई काठ पर लटकाया जाता है वह स्त्रापित है।