Luke · chapter 24 · verse 25
Luke 24:25 in Hindi
तब उस ने उन से कहा; हे निर्बुद्धियों, और भविष्यद्वक्ताओं की सब बातों पर विश्वास करने में मन्दमतियों!
Tab us ne un se kahaa; he nirbuddhiyom, aur bhavishyadvaktaaom kee sab baatom par vishvaas karane mem mandamatiyom!
Luke 24:25 in English
- King James Version (KJV)
- Then he said unto them, O fools, and slow of heart to believe all that the prophets have spoken:
- World English Bible (WEB)
- He said to them, “Foolish people, and slow of heart to believe in all that the prophets have spoken!
- American Standard Version (ASV)
- And he said unto them, O foolish men, and slow of heart to believe in all that the prophets have spoken!
- Bible in Basic English (BBE)
- And he said, O foolish men! how slow you are to give belief to what the prophets have said.
- Darby Translation (DBY)
- And he said to them, O senseless and slow of heart to believe in all that the prophets have spoken!
- Webster's Bible (WBS)
- Then he said to them, O fools, and slow of heart to believe all that the prophets have spoken!
- Young's Literal Translation (YLT)
- And he said unto them, 'O inconsiderate and slow in heart, to believe on all that the prophets spake!
Read in context
- 23और जब उस की लोथ न पाई, तो यह कहती हुई आईं, कि हम ने स्वर्गदूतों का दर्शन पाया, जिन्हों ने कहा कि वह जीवित है।
- 24तब हमारे साथियों में से कई एक कब्र पर गए, और जैसा स्त्रियों ने कहा था, वैसा ही पाया; परन्तु उस को न देखा।
- 25तब उस ने उन से कहा; हे निर्बुद्धियों, और भविष्यद्वक्ताओं की सब बातों पर विश्वास करने में मन्दमतियों!
- 26क्या अवश्य न था, कि मसीह ये दुख उठाकर अपनी महिमा में प्रवेश करे?
- 27तब उस ने मूसा से और सब भविष्यद्वक्ताओं से आरम्भ करके सारे पवित्रा शास्त्रों में से, अपने विषय में की बातों का अर्थ, उन्हें समझा दिया।
Cross references
- Mark 9:19 मरकुस 9:19यह सुनकर उस ने उन से उत्तर देके कहा: कि हे अविश्वासी लोगों, मैं कब तक तुम्हारे साथ रहूंगा? और कब तक तुम्हारी सहूंगा? उसे मेरे पास लाओ।
- Mark 7:18 मरकुस 7:18उस ने उन से कहा; क्या तुम भी ऐसे ना समझ हो? क्या तुम नहीं समझते, कि जो वस्तु बाहर से मनुष्य के भीतर जाती है, वह उसे अशुद्ध नहीं कर सकती?
- Hebrews 5:11–12 इब्रानियों 5:11–12इस के विषय में हमें बहुत सी बातें कहनी हैं, जिन का समझना भी कठिन है; इसलिये कि तुम ऊंचा सुनने लगे हो। समय के विचार से तो तुम्हें गुरू हो जाना चाहिए था, तौभी क्या यह आवश्यक है, कि कोई तुम्हें परमेश्वर के वचनों की आदि शिक्षा फिर से सिखाए? ओर ऐसे हो गए हो, कि तुम्हें अन्न के बदले अब तक दूध ही चाहिए।
- Mark 16:14 मरकुस 16:14पीछे वह उन ग्यारहों को भी, जब वे भोजन करने बैठे थे दिखाई दिया, और उन के अविश्वास और मन की कठोरता पर उलाहना दिया, क्योंकि जिन्हों ने उसके जी उठने के बाद उसे देखा था, इन्होंने उन की प्रतीति न की थी।
- Mark 8:17–18 मरकुस 8:17–18यह जानकर यीशु ने उन से कहा; तुम क्यों आपस में विचार कर रहे हो कि हमारे पास रोटी नहीं? क्या अब तक नहीं जानते और नहीं समझते? क्या तुम्हारा मन कठोर हो गया है? क्या आंखे रखते हुए भी नहीं देखते, और कान रखते हुए भी नहीं सुनते? और तुम्हें स्मरण नहीं।