Mark · chapter 6 · verse 1
Mark 6:1 in Hindi
वहां से निकलकर वह अपने देश में आया, और उसके चेले उसके पीछे हो लिए।
Vahaam se nikalakar vah apane desh mem aayaa, aur usake chele usake peechhe ho lie.
Mark 6:1 in English
- King James Version (KJV)
- And he went out from thence, and came into his own country; and his disciples follow him.
- World English Bible (WEB)
- He went out from there. He came into his own country, and his disciples followed him.
- American Standard Version (ASV)
- And he went out from thence; and he cometh into his own country; and his disciples follow him.
- Bible in Basic English (BBE)
- And he went away from there, and came into his country; and his disciples went with him.
- Darby Translation (DBY)
- And he went out thence and came to his own country, and his disciples follow him.
- Webster's Bible (WBS)
- And he went out from thence, and came into his own country, and his disciples follow him.
- Young's Literal Translation (YLT)
- And he went forth thence, and came to his own country, and his disciples do follow him,
Read in context
- 1वहां से निकलकर वह अपने देश में आया, और उसके चेले उसके पीछे हो लिए।
- 2सब्त के दिन वह आराधनालय में उपदेश करने लगा; और बहुत लोग सुनकर चकित हुए और कहने लगे, इस को ये बातें कहां से आ गई? और यह कौन सा ज्ञान है जो उस को दिया गया है? और कैसे सामर्थ के काम इसके हाथों से प्रगट होते हैं?
- 3क्या यह वही बढ़ई नहीं, जो मरियम का पुत्रा, और याकूब और योसेस और यहूदा और शमौन का भाई है? और क्या उस की बहिनें यहां हमारे बीच में नहीं रहतीं? इसलिये उन्हों ने उसके विषय मे ठोकर खाई।
Cross references
- Luke 4:16–30 लूका 4:16–30और वह नासरत में आया; जहां पाला पोसा गया था; और अपनी रीति के अनुसार सब्त के दिन आराधनालय में जा कर पढ़ने के लिये खड़ा हुआ। यशायाह भविष्यद्वक्ता की पुस्तक उसे दी गई, और उस ने पुस्तक खोलकर, वह जगह निकाली जहां यह लिखा था। कि प्रभु का आत्मा मुझ पर है, इसलिये कि उस ने कंगालों को सुसमाचार सुनाने के लिये मेरा अभिषेक किया है, और मुझे इसलिये भेजा है, कि बन्धुओं को छुटकारे का और अन्धों को दृष्टि पाने का सुसमाचार प्रचार करूं और कुचले हुओं को छुड़ाऊं। और प्रभु के प्रसन्न रहने के वर्ष का प्रचार करूं। तब उस ने पुस्तक बन्द करके सेवक के हाथ में दे दी, और बैठ गया: और आराधनालय के सब लोगों की आंख उस पर लगी थी। तब वह उन से कहने लगा, कि आज ही यह लेख तुम्हारे साम्हने पूरा हुआ है। और सब ने उसे सराहा, और जो अनुग्रह की बातें उसके मुंह से निकलती थीें, उन से अचम्भा किया; और कहने लगे; क्या यह यूसुफ का पुत्रा नहीं? उस ने उस से कहा; तुम मुझ पर यह कहावत अवश्य कहोगे, कि हे वैद्य, अपने आप को अच्छा कर! जो कुछ हम ने सुना है कि कफरनहूम में किया गया है उसे यहां अपने देश में भी कर। और उस ने कहा; मैं तुम से सच कहता हूं, कोई भविष्यद्वक्ता अपने देश में मान- सम्मान नहीं पाता। और मैं तुम से सच कहता हूं, कि एलिरयाह के दिनों में जब साढ़े तीन वर्ष तक आकाश बन्द रहा, यहां तक कि सारे देश में बड़ा आकाल पड़ा, तो इस्राएल में बहुत सी विधवाएं थीं। पर एलिरयाह उन में से किसी के पास नहीं भेजा गया, केवल सैदा के सारफत में एक विधवा के पास। और इलीशा भविष्यद्वक्ता के समय इस्राएल में बहुत से कोढ़ी थे, पर नामान सूरयानी को छोड़ उन में से काई शुद्ध नहीं किया गया। ये बातें सुनते ही जितने आराधनालय में थे, सब क्रोध से भर गए। और उठकर उसे नगर से बाहर निकाला, और जिस पहाड़ पर उन का नगर बसा हुआ था, उस की चोटी पर ले चले, कि उसे वहां से नीचे गिरा दें। पर वह उन के बीच में से निकलकर चला गया।।
- Matthew 13:54–58 मत्ती 13:54–58और अपने देश में आकर उन की सभा में उन्हें ऐसा उपदेश देने लगा; कि वे चकित होकर कहने लगे; कि इस को यह ज्ञान और समर्थ के काम कहां से मिले? क्या यह बढ़ई का बेटा नहीं? और क्या इस की माता का नाम मरियम और इस के भाइयों के नाम याकूब और यूसुफ और शमौन और यहूदा नहीं? और क्या इस की सब बहिनें हमारे बीच में नहीं रहती? फिर इस को यह सब कहां से मिला? सो उन्हों ने उसके कारण ठोकर खाई, पर यीशु ने उन से कहा, भविष्यद्वक्ता अपने देश और अपने घर को छोड़ और कहीं निरादर नहीं होता। और उस ने वहां उन के अविश्वास के कारण बहुत सामर्थ के काम नहीं किए।।
- Matthew 2:23 मत्ती 2:23और नासरत नाम नगर में जा बसा; ताकि वह वचन पूरा हो, जो भविष्यद्वक्ताओं के द्वारा कहा गया था, कि वह नासरी कहलाएगा।।
Original words (Greek)
- And · G2532καί kaí
- out · G1831ἐξέρχομαι exérchomai
- thence · G1564ἐκεῖθεν ekeîthen
- and · G2532καί kaí
- came · G2064ἔρχομαι érchomai
- into · G1519εἰς eis
- own · G846αὐτός autós
- country · G3968πατρίς patrís
- and · G2532καί kaí
- his · G846αὐτός autós
- disciples · G3101μαθητής mathētḗs
- follow · G190ἀκολουθέω akolouthéō
- him · G846αὐτός autós