Mark · chapter 6 · verse 35
Mark 6:35 in Hindi
जब दिन बहुत ढल गया, तो उसके चेले उसके पास आकर कहने लगे; यह सुनसान जगह है, और दिन बहुत ढल गया है।
Jab din bahut dhal gayaa, to usake chele usake paas aakar kahane lage; yah sunasaan jagah hai, aur din bahut dhal gayaa hai.
Mark 6:35 in English
- King James Version (KJV)
- And when the day was now far spent, his disciples came unto him, and said, This is a desert place, and now the time [is] far passed:
- World English Bible (WEB)
- When it was late in the day, his disciples came to him and said, “This place is deserted, and it is late in the day.
- American Standard Version (ASV)
- And when the day was now far spent, his disciples came unto him, and said, The place is desert, and the day is now far spent;
- Bible in Basic English (BBE)
- And at the end of the day, his disciples came to him and said, This place is waste land, and it is late:
- Darby Translation (DBY)
- And when it was already late in the day, his disciples coming to him say, The place is desert, and it is already late in the day;
- Webster's Bible (WBS)
- And when the day was now far spent, his disciples came to him, and said, This is a desert place, and now the time [is] far passed:
- Young's Literal Translation (YLT)
- And now the hour being advanced, his disciples having come near to him, say, — 'The place is desolate, and the hour is now advanced,
Read in context
- 33और बहुतों ने उन्हें जाते देखकर पचिान लिया, और सब नगरों से इकट्ठे होकर वहां पैदल दौड़े और उन से पहिले जा पहुंचे।
- 34उस ने निकलकर बड़ी भीड़ देखी, और उन पर तरस खाया, क्योंकि वे उन भेड़ों के समान थे, जिन का कोई रखवाला न हो; और वह उन्हें बहुत सी बातें सिखाने लगा।
- 35जब दिन बहुत ढल गया, तो उसके चेले उसके पास आकर कहने लगे; यह सुनसान जगह है, और दिन बहुत ढल गया है।
- 36उन्हें विदा कर, कि चारों ओर के गांवों और बस्तियों में जाकर, अपने लिये कुछ खाने को मोल लें।
- 37उस ने उन्हें उत्तर दिया; कि तुम ही उन्हें खाने को दो: उनहों ने उस से कहा; क्या हम सौ दीनार की रोटियां मोल लें, और उन्हें खिलाएं?
Cross references
- John 6:5–15 यूहन्ना 6:5–15तब यीशु ने अपनी आंखे उठाकर एक बड़ी भीड़ को अपने पास आते देखा, और फिलिप्पुस से कहा, कि हम इन के भोजन के लिये कहां से रोटी मोल लाएं? परन्तु उस ने यह बात उसे परखने के लिये कही; क्योंकि वह आप जानता था कि मैं क्या करूंगा। फिलिप्पुस ने उस को उत्तर दिया, कि दो सौ दीनार की रोटी उन के लिये पूरी भी न होंगी कि उन में से हर एक को थोड़ी थोड़ी मिल जाए। उसके चेलों में से शमौन पतरस के भाई अन्द्रियास ने उस से कहा। यहां एक लड़का है जिस के पास जव की पांच रोटी और दो मछलियां हैं परन्तु इतने लोगों के लिये वे क्या हैं। यीशु ने कहा, कि लोगों को बैठा दो। उस जगह बहुत घास थी: तब वे लोग जो गिनती में लगभग पांच हजार के थे, बैठ गए: तब यीशु ने रोटियां लीं, और धन्यवाद करके बैठनेवालों को बांट दी: और वैसे ही मछलियों में से जितनी वे चाहते थे बांट दिया। जब वे खाकर तृप्त हो गए तो उस ने अपने चेलों से कहा, कि बचे हुए टुकड़े बटोर लो, कि कुछ फेंका न जाए। सो उन्हों ने बटोरा, और जव की पांच रोटियों के टुकड़े जो खानेवालों से बच रहे थे उन की बारह टोकरियां भरीं। तब जो आश्चर्य कर्म उस ने कर दिखाया उसे वे लोग देखकर कहने लगे; कि वह भविष्यद्वक्ता जो जगत में आनेवाला था निश्चय यही है। यीशु यह जानकर कि वे मुझे राजा बनाने के लिये आकर पकड़ना चाहते हैं, फिर पहाड़ पर अकेला चला गया।
- Luke 9:12–17 लूका 9:12–17जब दिन ढलने लगा, तो बारहों ने आकर उससे कहा, भीड़ को विदा कर, कि चारों ओर के गावों और बस्तियों में जाकर टिकें, और भोजन का उपाय करें, क्योंकि हम यहां सुनसान जगह में हैं। उस ने उन से कहा, तुम ही उन्हें खाने को दो: उन्हों ने कहा, हमारे पास पांच रोटियां और दो मछली को छोड़ और कुछ नहीं: परन्तु हां, यदि हम जाकर इन सब लोगों के लिये भोजन मोल लें, तो हो सकता है: वे लोग तो पांच हजार पुरूषों के लगभग थे। जब उस ने अपने चेलों से कहा, उन्हें पचास पचास करके पांति में बैठा दो। उन्हों ने ऐसा ही किया, और सब को बैठा दिया। तब उस ने वे पांच रोटियां और दो मछली लीं, और स्वर्ग की और देखकर धन्यवाद किया, और तोड़ तोड़कर चेलों को देता गया, कि लोगों को परोसें। सो सब खाकर तृप्त हुए, और बचे हुए टुकड़ों से बारह टोकरी भरकर उठाई।।
- Matthew 14:15–21 मत्ती 14:15–21जब सांझ हुई, तो उसके चेलों ने उसके पास आकर कहा; यह तो सुनसान जगह है और देर हो रही है, लोगों को विदा किया जाए कि वे बस्तियों में जाकर अपने लिये भोजन मोल लें। यीशु ने उन से कहा उन का जाना आवश्यक नहीं! तुम ही इन्हें खाने को दो। उन्हों ने उस से कहा; यहां हमारे पास पांच रोटी और दो मछलियों को छोड़ और कुछ नहीं है। उस ने कहा, उन को यहां मेरे पास ले आओ। तब उस ने लोगों को घास पर बैठने को कहा, और उन पांच रोटियों और दो मछलियों को लिया; और स्वर्ग की ओर देखकर धन्यवाद किया और रोटियां तोड़ तोड़कर चेलों को दीं, और चेलों ने लोगों को। और सब खाकर तृप्त हो गए, और उन्हों ने बचे हुए टुकड़ों से भरी हुई बारह टोकरियां उठाई। और खानेवाले स्त्रियों और बालकों को छोड़कर पांच हजार पुरूषों के अटकल थे।।
Original words (Greek)
- And · G2532καί kaí
- day · G5610ὥρα hṓra
- was · G1096γίνομαι gínomai
- now · G2235ἤδη ḗdē
- spent · G4183πολύς polýs
- his · G846αὐτός autós
- disciples · G3101μαθητής mathētḗs
- came · G4334προσέρχομαι prosérchomai
- him · G846αὐτός autós
- said · G3004λέγω légō
- is · G2076ἐστί estí
- desert · G2048ἔρημος érēmos
- place · G5117τόπος tópos
- and · G2532καί kaí
- now · G2235ἤδη ḗdē
- time · G5610ὥρα hṓra
- passed · G4183πολύς polýs