Matthew · chapter 13 · verse 58
Matthew 13:58 in Hindi
और उस ने वहां उन के अविश्वास के कारण बहुत सामर्थ के काम नहीं किए।।
Aur us ne vahaam un ke avishvaas ke kaaran bahut saamarth ke kaam naheem kie..
Matthew 13:58 in English
- King James Version (KJV)
- And he did not many mighty works there because of their unbelief.
- World English Bible (WEB)
- He didn’t do many mighty works there because of their unbelief.
- American Standard Version (ASV)
- And he did not many mighty works there because of their unbelief.
- Bible in Basic English (BBE)
- And the works of power which he did there were small in number because they had no faith.
- Darby Translation (DBY)
- And he did not there many works of power, because of their unbelief.
- Webster's Bible (WBS)
- And he did not many mighty works there, because of their unbelief.
- Young's Literal Translation (YLT)
- and he did not there many mighty works, because of their unbelief.
Read in context
- 56और क्या इस की सब बहिनें हमारे बीच में नहीं रहती? फिर इस को यह सब कहां से मिला?
- 57सो उन्हों ने उसके कारण ठोकर खाई, पर यीशु ने उन से कहा, भविष्यद्वक्ता अपने देश और अपने घर को छोड़ और कहीं निरादर नहीं होता।
- 58और उस ने वहां उन के अविश्वास के कारण बहुत सामर्थ के काम नहीं किए।।
Cross references
- Mark 6:5–6 मरकुस 6:5–6और वह वहां कोई सामर्थ का काम न कर सका, केवल थोड़े बीमारों पर हाथ रखकर उन्हें चंगा किया।। और उस ने उन के अविश्वास पर आश्चर्य किया और चारों ओर से गावों में उपदेश करता फिरा।।
- Romans 11:20 रोमियों 11:20भला, वे तो अविश्वास के कारण तोड़ी गई, परन्तु तू विश्वास से बना रहता है इसलिये अभिमानी न हो, परन्तु भय कर।
- Hebrews 3:12–19 इब्रानियों 3:12–19हे भाइयो, चौकस रहो, कि तुम में ऐसा बुरा और अविश्वासी न मन हो, जो जीवते परमेश्वर से दूर हट जाए। बरन जिस दिन तक आज का दिन कहा जाता है, हर दिन एक दूसरे को समझाते रहो, ऐसा न हो, कि तुम में से कोई जन पाप के छल में आकर कठोर हो जाए। क्योंकि हम मसीह के भागी हुए हैं, यदि हम अपने प्रथम भरोसे पर अन्त तक दृढ़ता से स्थिर रहें। जैसा कहा जाता है, कि यदि आज तुम उसका शब्द सुनो, तो अपने मनों को कठोर न करो, जैसा कि क्रोध दिलाने के समय किया था। भला किन लोगों ने सुनकर क्रोध दिलाया? क्या उन सब ने नहीं जो मूसा के द्वारा मिसर से निकले थे? और वह चालीस वर्ष तक किन लोगों से रूठा रहा? क्या उन्हीं से नहीं, जिन्हों ने पाप किया, और उन की लोथें जंगल में पड़ी रहीं? और उस ने किन से शपथ खाई, कि तुम मेरे विश्राम में प्रवेश करने न पाओगे: केवल उन से जिन्हों ने आज्ञा न मानी? सो हम देखते हैं, कि वे अविश्वास के कारण प्रवेश न कर सके।।
- Luke 4:25–29 लूका 4:25–29और मैं तुम से सच कहता हूं, कि एलिरयाह के दिनों में जब साढ़े तीन वर्ष तक आकाश बन्द रहा, यहां तक कि सारे देश में बड़ा आकाल पड़ा, तो इस्राएल में बहुत सी विधवाएं थीं। पर एलिरयाह उन में से किसी के पास नहीं भेजा गया, केवल सैदा के सारफत में एक विधवा के पास। और इलीशा भविष्यद्वक्ता के समय इस्राएल में बहुत से कोढ़ी थे, पर नामान सूरयानी को छोड़ उन में से काई शुद्ध नहीं किया गया। ये बातें सुनते ही जितने आराधनालय में थे, सब क्रोध से भर गए। और उठकर उसे नगर से बाहर निकाला, और जिस पहाड़ पर उन का नगर बसा हुआ था, उस की चोटी पर ले चले, कि उसे वहां से नीचे गिरा दें।