Matthew · chapter 16 · verse 12
Matthew 16:12 in Hindi
तब उन को समझ में आया, कि उस ने रोटी के खमीर से नहीं, पर फरीसियों और सदूकियों की शिक्षा से चौकस रहने को कहा था।
Tab un ko samajh mem aayaa, ki us ne rotee ke khameer se naheem, par phareesiyom aur sadookiyom kee shikshaa se chaukas rahane ko kahaa thaa.
Matthew 16:12 in English
- King James Version (KJV)
- Then understood they how that he bade [them] not beware of the leaven of bread, but of the doctrine of the Pharisees and of the Sadducees.
- World English Bible (WEB)
- Then they understood that he didn’t tell them to beware of the yeast of bread, but of the teaching of the Pharisees and Sadducees.
- American Standard Version (ASV)
- Then understood they that he bade them not beware of the leaven of bread, but of the teaching of the Pharisees and Sadducees.
- Bible in Basic English (BBE)
- Then they saw that it was not the leaven of bread which he had in mind, but the teaching of the Pharisees and Sadducees.
- Darby Translation (DBY)
- Then they comprehended that he did not speak of being beware of the leaven of bread, but of the doctrine of the Pharisees and Sadducees.
- Webster's Bible (WBS)
- Then they understood that he did not caution them against the leaven of bread, but against the doctrine of the Pharisees and of the Sadducees.
- Young's Literal Translation (YLT)
- Then they understood that he did not say to take heed of the leaven of the bread, but of the teaching, of the Pharisees and Sadducees.
Read in context
- 10और न उन चार हजार की सात रोटी; और न यह कि कितने टोकरे उठाए गए थे?
- 11तुम क्यों नहीं समझते कि मैं ने तुम से रोटियों के विषय में नहीं कहा? फरीसियों और सदूकियों के खमीर से चौकस रहना।
- 12तब उन को समझ में आया, कि उस ने रोटी के खमीर से नहीं, पर फरीसियों और सदूकियों की शिक्षा से चौकस रहने को कहा था।
- 13यीशु कैसरिया फिलिप्पी के देश में आकर अपने चेलों से पूछने लगा, कि लोग मनुष्य के पुत्रा को क्या कहते हैं?
- 14उन्हों ने कहा, कितने तो यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला कहते हैं और कितने एलिरयाह, और कितने यिर्मयाह या भविष्यद्वक्ताओं में से कोई एक कहते हैं।
Cross references
- Matthew 5:20 मत्ती 5:20क्योंकि मैं तुम से कहता हूं, कि यदि तुम्हारी धार्मिकता शास्त्रियों और फरीसियों की धार्मिकता से बढ़कर न हो, तो तुम स्वर्ग के राज्य में कभी प्रवेश करने न पाओगे।।
- Acts 23:8 प्रेरितों के काम 23:8क्योंकि सदूकी तो यह कहते हैं, कि न पुनरुत्थान है, न स्वर्गदूत और न आत्मा है; परन्तु फरीसी दोनों को मानते हैं।
- Matthew 15:4–9 मत्ती 15:4–9क्योंकि परमेश्वर ने कहा था, कि अपने पिता और अपनी माता का आदर करना: और जो कोई पिता या माता को बुरा कहे, वह मार डाला जाए। पर तुम कहते हो, कि यदि कोई अपने पिता या माता से कहे, कि जो कुछ तुझे मुझ से लाभ पहुंच सकता था, वह परमेश्वर को भेंट चढ़ाई जा चुकी। तो वह अपने पिता का आदर न करे, सो तुम ने अपनी रीतों के कारण परमेश्वर का वचन टाल दिया। हे कपटियों, यशायाह ने तुम्हारे विषय में यह भविष्यद्वाणी ठीक की। कि ये लोग होठों से तो मेरा आदर करते हैं, पर उन का मन मुझ से दूर रहता है। और ये व्यर्थ मेरी उपासना करते हैं, क्योंकि मनुष्य की विधियों को धर्मोपदेश करके सिखाते हैं।
- Matthew 23:13–28 मत्ती 23:13–28हे कपटी शास्त्रियों और फरीसियों तुम पर हाय! तुम मनुष्यों के विरोध में स्वर्ग के राज्य का द्वार बन्द करते हो, न तो आप ही उस में प्रवेश करते हो और न उस में प्रवेश करनेवालों को प्रवेश करने देते हो।। . हे कपटी शास्त्रियों और फरीसियों तुम पर हाय! तुम एक जन को अपने मत में लाने के लिये सारे जल और थल में फिरते हो, और जब वह मत में आ जाता है, तो उसे अपने से दूना नारकीय बना देते हो।। हे अन्धे अगुवों, तुम पर हाय, जो कहते हो कि यदि कोई मन्दिर की शपथ खाए तो कुछ नहीं, परन्तु यदि कोई मन्दिर के सोने की सौगन्ध खाए तो उस से बन्ध जाएगा। हे मूर्खो, और अन्धों, कौन बड़ा है, सोना या वह मन्दिर जिस से सोना पवित्रा होता है? फिर कहते हो कि यदि कोई वेदी की शपथ खाए तो कुछ नहीं, परन्तु जो भेंट उस पर है, यदि कोई उस की शपथ खाए तो बन्ध जाएगा। हे अन्धों, कौन बड़ा है, भेंट या वेदी: जिस से भेंट पवित्रा होता है? इसलिये जो वेदी की शपथ खाता है, वह उस की, और जो कुछ उस पर है, उस की भी शपथ खाता है। और जो मन्दिर की शपथ खाता है, वह उस की और उस में रहनेवालों की भी शपथ खाता है। और जो स्वर्ग की शपथ खाता है, वह परमेश्वर के सिहांसन की और उस पर बैठनेवाले की भी शपथ खाता है।। हे कपटी शास्त्रियों, और फरीसियों, तुम पर हाय; तुम पोदीने और सौंफ और जीरे का दसवां अंश देते हो, परन्तु तुम ने व्यवस्था की गम्भीर बातों को छोड़ दिया है; चाहिये था कि इन्हें भी करते रहते, और उन्हें भी न छोड़ते। हे अन्धे अगुवों, तुम मच्छड़ को तो छान डालते हो, परन्तु ऊंट को निगल जाते हो। हे कपटी शास्त्रियों, और फरीसियों, तुम पर हाय, तुम कटोरे और थाली को ऊपर ऊपर से तो मांजते हो परन्तु वे भीतर अन्धेर असंयम से भरे हुए हैं। हे अन्धे फरीसी, पहिले कटोरे और थाली को भीतर से मांज कि वे बाहर से भी स्वच्छ हों।। हे कपटी शास्त्रियों, और फरीसियों, तुम पर हाय; तुम चूना फिरी हुई कब्रों के समान हो जो ऊपर से तो सुन्दर दिखाई देती हैं, परन्तु भीतर मुर्दों की हडि्डयों और सब प्रकार की मलिनता से भरी हैं। इसी रीति से तुम भी ऊपर से मनुष्यों को धर्मी दिखाई देते हो, परन्तु भीतर कपट और अधर्म से भरे हुए हो।।
Original words (Greek)
- Then · G5119τότε tóte
- they · G4920συνίημι syníēmi
- that · G3754ὅτι hóti
- bade · G2036ἔπω épō
- not · G3756οὐ ou
- beware · G4337προσέχω proséchō
- of · G575ἀπό apó
- leaven · G2219ζύμη zýmē
- bread · G740ἄρτος ártos
- but · G235ἀλλά allá
- of · G575ἀπό apó
- doctrine · G1322διδαχή didachḗ
- Pharisees · G5330Φαρισαῖος Pharisaîos
- and · G2532καί kaí
- Sadducees · G4523Σαδδουκαῖος Saddoukaîos