Matthew · chapter 18 · verse 15
Matthew 18:15 in Hindi
यदि तेरा भाई तेरा अपराध करे, तो जा और अकेले में बातचीत करके उसे समझा; यदि वह तेरी सुने तो तू ने अपने भाई को पा लिया।
Yadi teraa bhaaee teraa aparaadh kare, to jaa aur akele mem baatacheet karake use samajhaa; yadi vah teree sune to too ne apane bhaaee ko paa liyaa.
Matthew 18:15 in English
- King James Version (KJV)
- Moreover if thy brother shall trespass against thee, go and tell him his fault between thee and him alone: if he shall hear thee, thou hast gained thy brother.
- World English Bible (WEB)
- “If your brother sins against you, go, show him his fault between you and him alone. If he listens to you, you have gained back your brother.
- American Standard Version (ASV)
- And if thy brother sin against thee, go, show him his fault between thee and him alone: if he hear thee, thou hast gained thy brother.
- Bible in Basic English (BBE)
- And if your brother does wrong to you, go, make clear to him his error between you and him in private: if he gives ear to you, you have got your brother back again.
- Darby Translation (DBY)
- But if thy brother sin against thee, go, reprove him between thee and him alone. If he hear thee, thou hast gained thy brother.
- Webster's Bible (WBS)
- Moreover, if thy brother shall trespass against thee, go and tell him his fault between thee and him alone: if he shall hear thee, thou hast gained thy brother.
- Young's Literal Translation (YLT)
- 'And if thy brother may sin against thee, go and show him his fault between thee and him alone, if he may hear thee, thou didst gain thy brother;
Read in context
- 13और यदि ऐसा हो कि उसे पाए, तो मैं तुम से सच कहता हूं, कि वह उन निन्नानवे भेड़ों के लिये जो भटकी नहीं थीं इतना आनन्द नहीं करेगा, जितना कि इस भेड़ के लिये करेगा।
- 14ऐसा ही तुम्हारे पिता की जो स्वर्ग में है यह इच्छा नहीं, कि इन छोटों में से एक भी नाश हो।
- 15यदि तेरा भाई तेरा अपराध करे, तो जा और अकेले में बातचीत करके उसे समझा; यदि वह तेरी सुने तो तू ने अपने भाई को पा लिया।
- 16और यदि वह न सुने, तो और एक दो जन को अपने साथ ले जा, कि हर एक बात दो या तीन गवाहों के मुंह से ठहराई जाए।
- 17यदि वह उन की भी न माने, तो कलीसिया से कह दे, परन्तु यदि वह कलीसिया की भी न माने, तो तू उसे अन्यजाति और महसूल लेनेवाले के ऐसा जान।
Cross references
- Leviticus 19:17 लैव्यव्यवस्था 19:17अपने मन में एक दूसरे के प्रति बैर न रखना; अपने पड़ोसी को अवश्य डांटना नहीं, तो उसके पाप का भार तुझ को उठाना पड़ेगा।
- Galatians 6:1 गलातियों 6:1हे भाइयों, यदि कोई मनुष्य किसी अपराध में पकड़ा जाए, तो तुम जो आत्मिक जो, नम्रता के साथ ऐसे को संभालो, और अपनी भी चौकसी रखो, कि तुम भी परीक्षा में न पड़ो।
- Luke 17:3–4 लूका 17:3–4सचेत रहो; यदि तेरा भाई अपराध करे तो उसे समझा, और यदि पछताए तो उसे क्षमा कर। यदि दिन भर में वह सात बार तेरा अपराध करे और सातों बार तेरे पास फिर आकर कहे, कि मैं पछताता हूं, तो उसे क्षमा कर।।
- 2 Thessalonians 3:15 2 थिस्सलुनीकियों 3:15तौभी उसे बैरी मन समझो पर भाई जानकर चिताओ।।
- Colossians 3:13 कुलुस्सियों 3:13और यदि किसी को किसी पर दोष देने को कोई कारण हो, तो एक दूसरे की सह लो, और एक दूसरे के अपराध क्षमा करो: जैसे प्रभु ने तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी करो।
- James 5:19–20 याकूब 5:19–20हे मेरे भाइयों, यदि तुम में कोई सत्य के मार्ग से भटक जाए, और कोई उस को फेर लाए। तो वह यह जान ले, कि जो कोई किसी भटके हुए पापी को फेर लाएगा, वह एक प्राण को मृत्यु से बचाएगा, और अनेक पापों पर परदा डालेगा॥
- Proverbs 25:9–10 नीतिवचन 25:9–10अपने पडोसी के साथ वादविवाद एकान्त में करना और पराये का भेद न खोलना; ऐसा न हो कि सुननेवाला तेरी भी निन्दा करे, और तेरा अपवाद बना रहे।।
- Romans 12:21 रोमियों 12:21बुराई से न हारो परन्तु भलाई से बुराई का जीत लो।।
- Matthew 18:35 मत्ती 18:35इसी प्रकार यदि तुम में से हर एक अपने भाई को मन से क्षमा न करेगा, तो मेरा पिता जो स्वर्ग में है, तुम से भी वैसा ही करेगा।।
- Psalm 141:5 भजन संहिता 141:5धर्मी मुझ को मारे तो यह कुपा मानी जाएगी, और वह मुझे ताड़ना दे, तो यह मेरे सिर पर का लेत ठहरेगा; मेरा सिर उस से इन्कार न करेगा।। लोगों के बुरे काम करने पर भी मैं प्रार्थना में लवलीन रहूंगा।
- 1 Corinthians 8:12 1 कुरिन्थियों 8:12सो भाइयों का अपराध करने से ओर उन के निर्बल विवेक को चोट देने से तुम मसीह का अपराध करते हो।
- 1 Corinthians 6:6–8 1 कुरिन्थियों 6:6–8बरन भाई भाई में मुक मा होता है, और वह भी अविश्वासियों के साम्हने। परन्तु सचमुच तुम में बड़ा दोष तो यह है, कि आपस में मुक मा करते हो: बरन अन्याय क्यों नहीं सहते? अपनी हानि क्यों नहीं सहते? बरन अन्याय करते और हानि पहुंचाते हो, और वह भी भाइयों को।