Matthew · chapter 20 · verse 13
Matthew 20:13 in Hindi
उस ने उन में से एक को उत्तर दिया, कि हे मित्रा, मैं तुझ से कुछ अन्याय नहीं करता; क्या तू ने मुझ से एक दीनार न ठहराया?
Us ne un mem se ek ko uttar diyaa, ki he mitraa, maim tujh se kuchh anyaay naheem karataa; kyaa too ne mujh se ek deenaar na thaharaayaa?
Matthew 20:13 in English
- King James Version (KJV)
- But he answered one of them, and said, Friend, I do thee no wrong: didst not thou agree with me for a penny?
- World English Bible (WEB)
- “But he answered one of them, ‘Friend, I am doing you no wrong. Didn’t you agree with me for a denarius?
- American Standard Version (ASV)
- But he answered and said to one of them, Friend, I do thee no wrong: didst not thou agree with me for a shilling?
- Bible in Basic English (BBE)
- But he in answer said to one of them, Friend, I do you no wrong: did you not make an agreement with me for a penny?
- Darby Translation (DBY)
- But he answering said to one of them, [My] friend, I do not wrong thee. Didst thou not agree with me for a denarius?
- Webster's Bible (WBS)
- But he answered one of them, and said, Friend, I do thee no wrong: didst thou not agree with me for a penny?
- Young's Literal Translation (YLT)
- 'And he answering said to one of them, Comrade, I do no unrighteousness to thee; for a denary didst not thou agree with me?
Read in context
- 11जब मिला, तो वह गृहस्थ पर कुडकुड़ा के कहने लगे।
- 12कि इन पिछलों ने एक ही घंटा काम किया, और तू ने उन्हें हमारे बराबर कर दिया, जिन्हों ने दिन भर का भार उठाया और घाम सहा?
- 13उस ने उन में से एक को उत्तर दिया, कि हे मित्रा, मैं तुझ से कुछ अन्याय नहीं करता; क्या तू ने मुझ से एक दीनार न ठहराया?
- 14जो तेरा है, उठा ले, और चला जा; मेरी इच्छा यह है कि जितना तुझे, उतना ही इस पिछले को भी दूं।
- 15क्या उचित नहीं कि मं अपने माल से जो चाहूं सो करूं? क्या तू मेरे भले होने के कारण बुरी दृष्टि से देखता है?
Cross references
- Matthew 22:12 मत्ती 22:12उस ने उससे पूछा हे मित्रा; तू ब्याह का वस्त्रा पहिने बिना यहां क्यों आ गया? उसका मुंह बन्द हो गया।
- Matthew 26:50 मत्ती 26:50यीशु ने उस से कहा; हे मित्रा, जिस काम के लिये तू आया है, उसे कर ले। तब उन्हों ने पास आकर यीशु पर हाथ डाले, और उसे पकड़ लिया।
- Romans 9:14–15 रोमियों 9:14–15सो हम क्या कहें? क्या परमेश्वर के यहां अन्याय है? कदापि नहीं! क्योंकि वह मूसा से कहता है, मैं जिस किसी पर दया करना चाहूं, उस पर दया करूंगा, और जिस किसी पर कृपा करना चाहूं उसी पर कृपा करूंगा।
- Job 35:2 अय्यूब 35:2कि क्या तू इसे अपना हम समझता है? क्या तू दावा करता है कि तेरा धर्म ईश्वर के धर्म से अधिक है?
- Job 34:17–18 अय्यूब 34:17–18जो न्याय का बैरी हो, क्या वह शासन करे? जो पूर्ण धम है, क्या तू उसे दुष्ट ठहराएगा? वह राजा से कहता है कि तू नीच है; और प्रधानों से, कि तुम दुष्ट हो।
- Job 34:8–12 अय्यूब 34:8–12जो अनर्थ करनेवालों का साथ देता, और दुष्ट मनुष्यों की संगति रखता है? उस ने तो कहा है, कि मनुष्य को इस से कुछ लाभ नहीं कि वह आनन्द से परमेश्वर की संगति रखे। इसलिऐ हे समझवालो! मेरी सुनो, यह सम्भव नहीं कि ईश्वर दुष्टता का काम करे, और सर्वशकितमान बुराई करे। वह मनुष्य की करनी का फल देता है, और प्रत्येक को अपनी अपनी चाल का फल भुगताता है। निेसन्देह ईश्वर दुष्टता नहीं करता और न सर्वशक्तिमान अन्याय करता है।
- Genesis 18:25 उत्पत्ति 18:25इस प्रकार का काम करना तुझ से दूर रहे कि दुष्ट के संग धर्मी को भी मार डाले और धर्मी और दुष्ट दोनों की एक ही दशा हो।
- Job 40:8 अय्यूब 40:8क्या तू मेरा न्याय भी व्यर्थ ठहराएगा? क्या तू आप निदष ठहरने की मनसा से मुझ को दोषी ठहराएगा?
- Romans 9:20 रोमियों 9:20हे मनुष्य, भला तू कौन है, जो परमेश्वर का साम्हना करता है? क्या गढ़ी हुई वस्तु गढ़नेवाले से कह सकती है कि तू ने मुझे ऐसा क्यों बनाया है?