Numbers · chapter 30 · verse 13
Numbers 30:13 in Hindi
कोई भी मन्नत वा शपथ क्यों न हो, जिस से उस स्त्री ने अपने जीव को दु:ख देने की वाचा बान्धी हो, उसको उसका पति चाहे तो दृढ़ करे, और चाहे तो तोड़े;
Koee bhee mannat vaa shapath kyom na ho, jis se us stree ne apane jeev ko du:kh dene kee vaachaa baandhee ho, usako usakaa pati chaahe to drudh kare, aur chaahe to tode;
Numbers 30:13 in English
- King James Version (KJV)
- Every vow, and every binding oath to afflict the soul, her husband may establish it, or her husband may make it void.
- World English Bible (WEB)
- Every vow, and every binding oath to afflict the soul, her husband may establish it, or her husband may make it void.
- American Standard Version (ASV)
- Every vow, and every binding oath to afflict the soul, her husband may establish it, or her husband may make it void.
- Bible in Basic English (BBE)
- Every oath, and every undertaking which she gives, to keep herself from pleasure, may be supported or broken by her husband.
- Darby Translation (DBY)
- Every vow, and every binding oath to afflict the soul, her husband can establish it, or her husband can annul it.
- Webster's Bible (WBS)
- Every vow, and every binding oath to afflict the soul, her husband may establish it, or her husband may make it void.
- Young's Literal Translation (YLT)
- 'Every vow and every oath — a bond to humble a soul — her husband doth establish it, or her husband doth break it;
Read in context
- 11और उसका पति सुनकर कुछ न कहे, और न उसे मना करे; तब तो उसकी सब मन्नतें स्थिर बनी रहें, और हर एक बन्धन क्यों न हो, जिस से उस ने अपने आप को बान्धा हो, वह स्थिर रहे।
- 12परन्तु यदि उसका पति उसकी मन्नत आदि सुनकर उसी दिन पूरी रीति से तोड़ दे, तो उसकी मन्नतें आदि, जो कुछ उसके मुंह से अपने बन्धन के विषय निकला हो, उस में से एक बात भी स्थिर न रहे; उसके पति ने सब तोड़ दिया है; इसलिये यहोवा उस स्त्री का वह पाप क्षमा करेगा।
- 13कोई भी मन्नत वा शपथ क्यों न हो, जिस से उस स्त्री ने अपने जीव को दु:ख देने की वाचा बान्धी हो, उसको उसका पति चाहे तो दृढ़ करे, और चाहे तो तोड़े;
- 14अर्थात् यदि उसका पति दिन प्रति दिन उस से कुछ भी न कहे, तो वह उसको सब मन्नतें आदि बन्धनों को जिस से वह बन्धी हो दृढ़ कर देता है; उस ने उनको दृढ़ किया है, क्योंकि सुनने के दिन उस ने कुछ नहीं कहा।
- 15और यदि वह उन्हें सुनकर पीछे तोड़ दे, तो अपनी स्त्री के अधर्म का भार वही उठाएगा।
Cross references
- 1 Corinthians 11:3 1 कुरिन्थियों 11:3सो मैं चाहता हूं, कि तुम यह जान लो, कि हर एक पुरूष का सिर मसीह है: और स्त्री का सिर पुरूष है: और मसीह का सिर परमेश्वर है।
- 1 Corinthians 11:9 1 कुरिन्थियों 11:9और पुरूष स्त्री के लिये नहीं सिरजा गया, परन्तु स्त्री पुरूष के लिये सिरजी गई है।
- Numbers 29:7 गिनती 29:7फिर उसी सातवें महीने के दसवें दिन को तुम्हारी पवित्रा सभा हो; तुम अपने अपने प्राण को दु:ख देना, और किसी प्रकार का कामकाज न करना;
- Leviticus 23:32 लैव्यव्यवस्था 23:32वह दिन तुम्हारे लिये परमविश्राम का हो, उस में तुम अपने अपने जीव को दु:ख देना; और उस महीने के नवें दिन की सांझ से ले कर दूसरी सांझ तक अपना विश्रामदिन माना करना॥
- Leviticus 16:29 लैव्यव्यवस्था 16:29और तुम लोगों के लिये यह सदा की विधि होगी कि सातवें महीने के दसवें दिन को तुम अपने अपने जीव को दु:ख देना, और उस दिन कोई, चाहे वह तुम्हारे निज देश को हो चाहे तुम्हारे बीच रहने वाला कोई परदेशी हो, कोई भी किसी प्रकार का काम काज न करे;
- Leviticus 23:27 लैव्यव्यवस्था 23:27उसी सातवें महीने का दसवां दिन प्रायश्चित्त का दिन माना जाए; वह तुम्हारी पवित्र सभा का दिन होगा, और उस में तुम अपने अपने जीव को दु:ख देना और यहोवा का हव्य चढ़ाना।
- Psalm 35:13 भजन संहिता 35:13जब वे रोगी थे तब तो मैं टाट पहिने रहा, और उपवास कर करके दु:ख उठाता रहा; और मेरी प्रार्थना का फल मेरी गोद में लौट आया।
- Ezra 8:21 एज्रा 8:21तब मैं ने वहां अर्थात् अहवा नदी के तीर पर उपवास का प्रचार इस आशय से किया, कि हम परमेश्वर के साम्हने दीन हों; और उस से अपने और अपने बालबच्चों और अपनी समस्त सम्पत्ति के लिये सरल यात्रा मांगें।
- 1 Peter 3:1–6 1 पतरस 3:1–6हे पत्नियों, तुम भी अपने पति के आधीन रहो। इसलिये कि यदि इन में से कोई ऐसे हो जो वचन को न मानते हों, तौभी तुम्हारे भय सहित पवित्रा चालचलन को देखकर बिना वचन के अपनी अपनी पत्नी के चालचलन के द्वारा खिंच जाएं। और तुम्हारा सिंगार, दिखावटी न हो, अर्थात् बाल गूंथने, और सोने के गहने, या भांति भांति के कपड़े पहिनना। बरन तुम्हारा छिपा हुआ और गुप्त मनुष्यत्व, नम्रता और मन की दीनता की अविनाशी सजावट से सुसज्जित रहे, क्योंकि परमेश्वर की दृष्टि में इसका मूल्य बड़ा है। और पूर्वकाल में पवित्रा स्त्रियां भी, जो परमेश्वर पर आशा रखती थीं, अपने आप को इसी रीति से संवारती और अपने अपने पति के आधीन रहती थीं। जैसे सारा इब्राहीम की आज्ञा में रहती और उसे स्वामी कहती थी: सो तुम भी यदि भलाई करो, और किसी प्रकार के भय से भयभीत न हो तो उस की बेंटियां ठहरोगी।।
- Isaiah 58:5 यशायाह 58:5जिस उपवास से मैं प्रसन्न होता हूं अर्थात् जिस में मनुष्य स्वयं को दीन करे, क्या तुम इस प्रकार करते हो? क्या सिर को झाऊ की नाईं झुकाना, अपने नीचे टाट बिछाना, और राख फैनाने ही को तुम उपवास और यहोवा को प्रसन्न करने का दिन कहते हो?
- 1 Corinthians 7:5 1 कुरिन्थियों 7:5तुम एक दूसरे से अलग न रहो; परन्तु केवल कुछ समय तक आपस की सम्मति से कि प्रार्थना के लिये अवकाश मिले, और फिर एक साथ रहो, ऐसा न हो, कि तुम्हारे असंयम के कारण शैतान तुम्हें परखे।