Psalms · chapter 35 · verse 13
Psalm 35:13 in Hindi
जब वे रोगी थे तब तो मैं टाट पहिने रहा, और उपवास कर करके दु:ख उठाता रहा; और मेरी प्रार्थना का फल मेरी गोद में लौट आया।
Jab ve rogee the tab to maim taat pahine rahaa, aur upavaas kar karake du:kh uthaataa rahaa; aur meree praarthanaa kaa phal meree god mem laut aayaa.
Psalm 35:13 in English
- King James Version (KJV)
- But as for me, when they were sick, my clothing [was] sackcloth: I humbled my soul with fasting; and my prayer returned into mine own bosom.
- World English Bible (WEB)
- But as for me, when they were sick, my clothing was sackcloth. I afflicted my soul with fasting. My prayer returned into my own bosom.
- American Standard Version (ASV)
- But as for me, when they were sick, my clothing was sackcloth: I afflicted my soul with fasting; And my prayer returned into mine own bosom.
- Bible in Basic English (BBE)
- But as for me, when they were ill I put on the clothing of sorrow: I went without food and was sad, and my prayer came back again to my heart.
- Darby Translation (DBY)
- But as for me, when they were sick, my clothing was sackcloth; I chastened my soul with fasting, and my prayer returned into mine own bosom:
- Webster's Bible (WBS)
- But as for me, when they were sick, my clothing [was] sackcloth: I humbled my soul with fasting; and my prayer returned into my own bosom.
- Young's Literal Translation (YLT)
- And I — in their sickness my clothing [is] sackcloth, I have humbled with fastings my soul, And my prayer unto my bosom returneth.
Read in context
- 11झूठे साक्षी खड़े होते हैं; और जो बात मैं नहीं जानता, वही मुझ से पूछते हैं।
- 12वे मुझ से भलाई के बदले बुराई करते हैं; यहां तक कि मेरा प्राण ऊब जाता है।
- 13जब वे रोगी थे तब तो मैं टाट पहिने रहा, और उपवास कर करके दु:ख उठाता रहा; और मेरी प्रार्थना का फल मेरी गोद में लौट आया।
- 14मैं ऐसा भाव रखता था कि मानो वे मेरे संगी वा भाई हैं; जैसा कोई माता के लिये विलाप करता हो, वैसा ही मैं ने शोक का पहिरावा पहिने हुए सिर झुकाकर शोक किया।।
- 15परन्तु जब मैं लंगड़ाने लगा तब वे लोग आनन्दित होकर इकट्ठे हुए, नीच लोग और जिन्हें मैं जानता भी न था वे मेरे विरूद्व इकट्ठे हुए; वे मुझे लगातार फाड़ते रहे;
Cross references
- Psalm 69:10–11 भजन संहिता 69:10–11जब मैं रोकर और उपवास करके दु:ख उठाता था, तब उस से भी मेरी नामधराई ही हुई। और जब मैं टाट का वस्त्रा पहिने था, तब मेरा दृष्टान्त उन में चलता था।
- Job 30:25 अय्यूब 30:25क्या मैं उसके लिये रोता नहीं था, जिसके दुदिर्न आते थे? और क्या दरिद्र जन के कारण मैं प्राण में दुखित न होता था?
- Matthew 5:44 मत्ती 5:44परन्तु मैं तुम से यह कहता हूं, कि अपने बैरियों से प्रेम रखो और अपने सतानेवालों के लिये प्रार्थना करो।
- Leviticus 16:31 लैव्यव्यवस्था 16:31यह तुम्हारे लिये परमविश्राम का दिन ठहरे, और तुम उस दिन अपने अपने जीव को दु:ख देना; यह सदा की विधि है।
- Isaiah 58:5 यशायाह 58:5जिस उपवास से मैं प्रसन्न होता हूं अर्थात् जिस में मनुष्य स्वयं को दीन करे, क्या तुम इस प्रकार करते हो? क्या सिर को झाऊ की नाईं झुकाना, अपने नीचे टाट बिछाना, और राख फैनाने ही को तुम उपवास और यहोवा को प्रसन्न करने का दिन कहते हो?
- Matthew 10:13 मत्ती 10:13यदि उस घर के लोग योग्य होंगे तो तुम्हारा कल्याण उन पर पहुंचेगा परन्तु यदि वे योगय न हों तो तुम्हारा कल्याण तुम्हारे पास लौट आएगा।
- Leviticus 16:29 लैव्यव्यवस्था 16:29और तुम लोगों के लिये यह सदा की विधि होगी कि सातवें महीने के दसवें दिन को तुम अपने अपने जीव को दु:ख देना, और उस दिन कोई, चाहे वह तुम्हारे निज देश को हो चाहे तुम्हारे बीच रहने वाला कोई परदेशी हो, कोई भी किसी प्रकार का काम काज न करे;
- Isaiah 58:3 यशायाह 58:3वे कहते हैं, क्या कारए है कि हम ने तो उपवास रखा, परन्तु तू ने इसकी सुधि नहीं ली? हम ने दु:ख उठाया, परन्तु तू ने कुछ ध्यान नहीं दिया? सुनो, उपवास के दिन तुम अपनी ही इच्छा पूरी करते हो और अपने सेवकों से कठिन कामों को कराते हो।
- 1 Kings 21:27–29 1 राजा 21:27–29एलिरयाह के ये वचन सुनकर अहाब ने अपने वस्त्रा फाड़े, और अपनी देह पर टाट लपेटकर उपवास करने और टाट ही ओढ़े पड़ा रहने लगा, और दबे पांवों चलने लगा। और यहोवा का यह वचन तिशबी एलिरयाह के पास पहुंचा, कि क्या तू ने देखा है कि अहाब मेरे साम्हने नम्र बन गया है? इस कारण कि वह मेरे साम्हने नम्र बन गया है मैं वह विपत्ति उसके जीते जी उस पर न डालूंगा परन्तू उसके पुत्रा के दिनों में मैं उसके घराने पर वह पिपत्ति भेजूंगा।
- Luke 10:6 लूका 10:6यदि वहां कोई कल्याण के योग्य होगा; तो तुम्हारा कल्याण उस पर ठहरेगा, नहीं तो तुम्हारे पास लौट आएगा।
- Romans 12:14–15 रोमियों 12:14–15अपने सतानेवालों को आशीष दो; आशीष दो स्त्राप न दो। आनन्द करनेवालों के साथ आनन्द करो; और रोनेवालों के साथ रोओ।
- Matthew 9:14–15 मत्ती 9:14–15तब यूहन्ना के चेलों ने उसके पास आकर कहा; क्या कारण है कि हम और फरीसी इतना उपवास करते हैं, पर तेरे चेले उपवास नहीं करते? यीशु ने उन से कहा; क्या बराती, जब तक दुल्हा उन के साथ है शोक कर सकते हैं? पर वे दिन आएंगे कि दूल्हा उन से अलग किया जाएगा, उस समय वे उपवास करेंगे।