Proverbs · chapter 27 · verse 10
Proverbs 27:10 in Hindi
जो तेरा और तेरे पिता का भी मित्रा हो उसे न छोड़ना; और अपनी विपत्ति के दिन अपने भाई के घर न जाना। प्रेम करनेवाला पड़ोसी, दूर रहनेवाले भाई से कहीं उत्तम है।
Jo teraa aur tere pitaa kaa bhee mitraa ho use na chhodanaa; aur apanee vipatti ke din apane bhaaee ke ghar na jaanaa. Prem karanevaalaa padosee, door rahanevaale bhaaee se kaheem uttam hai.
Proverbs 27:10 in English
- King James Version (KJV)
- Thine own friend, and thy father’s friend, forsake not; neither go into thy brother’s house in the day of thy calamity: [for] better [is] a neighbour [that is] near than a brother far off.
- World English Bible (WEB)
- Don’t forsake your friend and your father’s friend. Don’t go to your brother’s house in the day of your disaster. A neighbor who is near is better than a distant brother.
- American Standard Version (ASV)
- Thine own friend, and thy father’s friend, forsake not; And go not to thy brother’s house in the day of thy calamity: Better is a neighbor that is near than a brother far off.
- Bible in Basic English (BBE)
- Do not give up your friend and your father's friend; and do not go into your brother's house in the day of your trouble: better is a neighbour who is near than a brother far off.
- Darby Translation (DBY)
- Thine own friend, and thy father's friend, forsake not; and go not into thy brother's house in the day of thy calamity: better is a neighbour that is near than a brother far off.
- Webster's Bible (WBS)
- Thy own friend, and thy father's friend, forsake not; neither go into thy brother's house in the day of thy calamity: [for] better [is] a neighbor [that is] near, than a brother far off.
- Young's Literal Translation (YLT)
- Thine own friend, and the friend of thy father, forsake not, And the house of thy brother enter not In a day of thy calamity, Better [is] a near neighbour than a brother afar off.
Read in context
- 8स्थान छोड़कर घूमनेवाला मनुष्य उस चिड़िया के समान है, जो घोंसला छोड़कर उड़ती फिरती है।
- 9जैसे तेल और सुगन्ध से, वैसे ही मित्रा के हृदय की मनोहर सम्मति से मन आनन्दित होता है।
- 10जो तेरा और तेरे पिता का भी मित्रा हो उसे न छोड़ना; और अपनी विपत्ति के दिन अपने भाई के घर न जाना। प्रेम करनेवाला पड़ोसी, दूर रहनेवाले भाई से कहीं उत्तम है।
- 11हे मेरे पुत्रा, बुद्धिमान होकर मेरा मन आनन्दित कर, तब मैं अपने निन्दा करनेवाले को उत्तर दे सकूंगा।
- 12बुद्धिमान मनुष्य विपत्ति को आती देखकर छिप जाता है; परन्तु भोले लोग आगे बढ़े चले जाते और हानि उठाते हैं।
Cross references
- Proverbs 18:24 नीतिवचन 18:24मित्रों के बढ़ाने से तो नाश होता है, परन्तु ऐसा मित्रा होता है, जो भाई से भी अधिक मिला रहता है।
- Proverbs 17:17 नीतिवचन 17:17मित्रा सब समयों में प्रेम रखता है, और विपत्ति के दिन भाई बन जाता है।
- 1 Kings 12:6–8 1 राजा 12:6–8तब राजा रहूबियाम ने उन बूढ़ों से जो उसके पिता सुलैमान के जीवन भर उसके साम्हने उपस्थित रहा करते थे सम्मति ली, कि इस प्रजा को कैसा उत्तर देना उचित है, इस में तुम क्या सम्मति देते हो? उन्हों ने उसको यह उत्तर दिया, कि यदि तू अभी प्रजा के लोगों का दास बनकर उनके अधीन हो और उन से मधुर बातें कहे, तो वे सदैव तेरे अधीन बने रहेंगे। रहूबियाम ने उस सम्मति को छोड़ दिया, जो बूढ़ों ने उसको दी थी,और उन जवानों से सम्मति ली, जो उसके संग बड़े हुए थे, और उसके सम्मुख उपस्थित रहा करते थे।
- Luke 10:30–37 लूका 10:30–37यीशु ने उत्तर दिया; कि एक मनुष्य यरूशलेम से यरीहो को जा रहा था, कि डाकुओं ने घेरकर उसके कपड़े उतार लिए, और मारपीटकर उसे अधमूआ छोड़कर चले गए। और ऐसा हुआ; कि उसी मार्ग से एक याजक जा रहा था: परन्तु उसे देख के कतराकर चला गया। इसी रीति से एक लेवी उस जगह पर आया, वह भी उसे देख के कतराकर चला गया। परन्तु एक सामरी यात्री वहां आ निकला, और उसे देखकर तरस खाया। और उसके पास आकर और उसके घावों पर तेल और दाखरस डालकर पटि्टयां बान्धी, और अपनी सवारी पर चढ़ाकर सराय में ले गया, और उस की सेवा टहल की। दूसरे दिन उस ने दो दिनार निकालकर भटियारे को दिए, और कहा; इस की सेवा टहल करना, और जो कुछ तेरा और लगेगा, वह मैं लौटने पर तुझे भर दूंगा। अब मेरी समझ में जो डाकुओं में घिर गया था, इन तीनों में से उसका पड़ोसी कौन ठहरा? उस ने कहा, वही जिस ने उस पर तरस खाया: यीशु ने उस से कहा, जा, तू भी ऐसा ही कर।।
- Obadiah 1:12–14 ओबद्याह 1:12–14परन्तु तुझे उचित न था कि तू अपने भाई के दिन में, अर्थात् उसकी विपत्ति के दिन में उसकी ओर देखता रहता, और यहूदियों के नाश होने के दिन उनके ऊपर आनन्द करता, और उनके संकट के दिन बड़ा बोल बोलता। तुझे उचित न था कि मेरी प्रजा की विपत्ति के दिन तू उसके फाटक से घुसता, और उसकी विपत्ति के दिन उसकी धन सम्पत्ति पर हाथ लगाता। तुझे उचित न था कि तिरमुहाने पर उसके भागनेवालों को मार डालने के लिये खड़ा होता, और संकट के दिन उसके बचे हुओं को पकड़ाता।।
- Proverbs 19:7 नीतिवचन 19:7जब निर्धन के सब भाई उस से बैर रखते हैं, तो निश्चय है कि उसके मित्रा उस से दूर हो जाएं। वह बातें करते हुए उनका पीछा करता है, परन्तु उनको नहीं पाता।
- Job 6:21–23 अय्यूब 6:21–23उसी प्रकार अब तुम भी कुछ न रहे; मेरी विपत्ति देखकर तुम डर गए हो। क्या मैं ने तुम से कहा था, कि मुझे कुछ दो? वा उपनी सम्पत्ति में से मेरे लिये घूस दो? वा मुझे सतानेवाले के हाथ से बचाओ? वा उपद्रव करनेवालों के वश से छुड़ा लो?
- 2 Samuel 19:24 2 शमूएल 19:24तब शाऊल का पोता मपीबोशेत राजा से भेंट करने को आया; उस ने राजा के चले जाने के दिन से उसके कुशल क्षेम से फिर आने के दिन तक न अपने पावों के नाखून काटे, और न अपनी दाढी बनवाई, और न अपने कपड़े धुलवाए थे।
- 2 Chronicles 10:6–8 2 इतिहास 10:6–8तब राजा रहूबियाम ने उन बूढ़ों से जो उसके पिता सुलैमान के जीवन भर उसके साम्हने अपस्थ्ति रहा करते थे, यह कहकर सम्मति ली, कि इस प्रजा को कैसा उत्तर देना उचित है, इस में तुम क्या सम्मति देते हो? उन्हों ने उसको यह उत्तर दिया, कि यदि तू इस प्रजा के लोगों से अच्छा बर्त्ताव करके उन्हें प्रसन्न करे और उन से मधुर बातें कहे, तो वे सदा तेरे अधीन बने रहेंगे। परन्तु उस ने उस सम्मति को जो बूढ़ों ने उसको दी थी छोड़ दिया और उन जवानों से सम्मति ली, जो उसके संग बड़े हुए थे और उसके सम्मुख उपस्थित रहा करते थे।
- 2 Samuel 21:7 2 शमूएल 21:7परन्तु दाऊद ने और शाऊल के पुत्रा योनातन ने आपस में यहोवा की शपथ खाई थी, इस कारण राजा ने योनातन के पुत्रा मपीबोशेत को जो शाऊल का पोता था बचा रखा।
- Jeremiah 2:5 यिर्मयाह 2:5यहोवा यों कहता है, तुम्हारे पुरखाओं ने मुझ में कौन ऐसी कुटिलता पाई कि मुझ से दूर हट गए और निकम्मी वस्तुओं के पीछे होकर स्वयं निकम्मेे हो गए?
- Isaiah 41:8–10 यशायाह 41:8–10हे मेरे दास इस्राएल, हे मेरे चुने हुए याकूब, हे मेरे प्रेमी इब्राहीम के वंश; तू जिसे मैं ने पृथ्वी के दूर दूर देशों से लिया और पृथ्वी की छोर से बुलाकर यह कहा, तू मेरा दास है, मैं ने तुझे चुला है और तजा नहीं; मत डर, क्योंकि मैं तेरे संग हूं, इधर उधर मत ताक, क्योंकि मैं तेरा परमेश्वर हूं; मैं तुझे दृढ़ करूंगा और तेरी सहायता करूंगा, अपने धर्ममय दहिने हाथ से मैं तुझे सम्हाले रहूंगा।।
Original words (Hebrew)
- friend · H7453רֵעַ rêaʻ
- father’s · H1אָב ʼâb
- friend · H7453רֵעַ rêaʻ
- forsake · H5800עָזַב ʻâzab
- go · H935בּוֹא bôwʼ
- brother’s · H251אָח ʼâch
- house · H1004בַּיִת bayith
- day · H3117יוֹם yôwm
- calamity · H343אֵיד ʼêyd
- better · H2896טוֹב ṭôwb
- neighbour · H7934שָׁכֵן shâkên
- near · H7138קָרוֹב qârôwb
- brother · H251אָח ʼâch
- off · H7350רָחוֹק râchôwq