Proverbs · chapter 30 · verse 8
Proverbs 30:8 in Hindi
अर्थात व्यर्थ और झूठी बात मुझ से दूर रख; मुझे न तो निर्धन कर और न धनी बना; प्रतिदिन की रोटी मुझे खिलाया कर।
Arthaat vyarth aur jhoothee baat mujh se door rakh; mujhe na to nirdhan kar aur na dhanee banaa; pratidin kee rotee mujhe khilaayaa kar.
Proverbs 30:8 in English
- King James Version (KJV)
- Remove far from me vanity and lies: give me neither poverty nor riches; feed me with food convenient for me:
- World English Bible (WEB)
- Remove far from me falsehood and lies. Give me neither poverty nor riches. Feed me with the food that is needful for me,
- American Standard Version (ASV)
- Remove far from me falsehood and lies; Give me neither poverty nor riches; Feed me with the food that is needful for me:
- Bible in Basic English (BBE)
- Put far from me all false and foolish things: do not give me great wealth or let me be in need, but give me only enough food:
- Darby Translation (DBY)
- Remove far from me vanity and lies; give me neither poverty nor riches; feed me with the bread of my daily need:
- Webster's Bible (WBS)
- Remove far from me vanity and lies; give me neither poverty nor riches; feed me with food convenient for me:
- Young's Literal Translation (YLT)
- Vanity and a lying word put far from me, Poverty or wealth give not to me, Cause me to eat the bread of my portion,
Read in context
- 6उसके वचनों में कुछ मत बढ़ा, ऐसा न हो कि वह तुझे डांटे और तू झूठा ठहरे।।
- 7मैं ने तुझ से दो वर मांगे हैं, इसलिये मेरे मरने से पहिले उन्हें मुझे देने से मुंह न मोड़:
- 8अर्थात व्यर्थ और झूठी बात मुझ से दूर रख; मुझे न तो निर्धन कर और न धनी बना; प्रतिदिन की रोटी मुझे खिलाया कर।
- 9ऐसा न हो, कि जब मेरा पेट भर जाए, तब मैं इन्कार करके कहूं कि यहोवा कौन है? वा अपना भाग खोकर चोरी करूं, और अपने परमेश्वर का नाम अनुचित रीति से लूं।
- 10किसी दास की, उसके स्वामी से चुगली न करना, ऐसा न हो कि वह तुझे शाप दे, और तू दोषी ठहराया जाए।।
Cross references
- 1 Timothy 6:6–8 1 तीमुथियुस 6:6–8पर सन्तोष सहित भक्ति बड़ी कमाई है। क्योंकि न हम जगत में कुछ लाए हैं और न कुछ ले जा सकते हैं। और यदि हमारे पास खाने और पहिनने को हो, तो इन्हीं पर सन्तोष करना चाहिए।
- Psalm 62:9–10 भजन संहिता 62:9–10सचमुच नीच लोग तो अस्थाई, और बड़े लोग मिथ्या ही हैं; तौल में वे हलके निकलते हैं; वे सब के सब सांस से भी हलके हैं। अन्धेर करने पर भरोसा मत रखो, और लूट पाट करने पर मत फूलो; चाहे धन सम्पति बढ़े, तौभी उस पर मन न लगाना।।
- Psalm 119:37 भजन संहिता 119:37मेरी आंखों को व्यर्थ वस्तुओं की ओर से फेर दे; तू अपने मार्ग में मुझे जिला।
- Matthew 6:33 मत्ती 6:33इसलिये पहिले तुम उसे राज्य और धर्म की खोज करो तो ये सब वस्तुएं तुम्हें मिल जाएंगी।
- Luke 11:3 लूका 11:3हमारी दिन भर की रोटी हर दिन हमें दिया कर।
- Psalm 119:29 भजन संहिता 119:29मुझ को झूठ के मार्ग से दूर कर; और करूणा करके अपनी व्यवस्था मुझे दे।
- Job 23:12 अय्यूब 23:12उसकी आज्ञा का पालन करने से मैं न हटा, और मैं ने उसके वचन अपनी इच्छा से कहीं अधिक काम के जानकर सुरक्षित रखे।
- Proverbs 21:6 नीतिवचन 21:6जो धन झूठ के द्वारा प्राप्त हो, वह वायु से उड़ जानेवाला कुहरा है, उसके ढूंढ़नेवाले मृत्यु ही को ढूंढ़ते हैं।
- Matthew 6:11 मत्ती 6:11हमारी दिन भर की रोटी आज हमें दे।
- 2 Kings 25:30 2 राजा 25:30और प्रतिदिन के खर्च के लिये राजा के यहां से नित्य का क्षर्च ठहराया गया जो उसके जीवन भर लगातार उसे मिलता रहा।
- Exodus 16:35 निर्गमन 16:35इस्राएली जब तक बसे हुए देश में न पहुंचे तब तक, अर्थात् चालीस वर्ष तक मन्ना को खाते रहे; वे जब तक कनान देश के सिवाने पर नहीं पहुंचे तब तक मन्ना को खाते रहे।
- Proverbs 22:8 नीतिवचन 22:8जो कुटिलता का बीज बोता है, वह अनर्थ ही काटेगा, और उसके रोष का सोंटा टूटेगा।