Psalms · chapter 107 · verse 37
Psalm 107:37 in Hindi
और खेती करें, और दाख की बारियां लगाएं, और भांति भांति के फल उपजा लें।
Aur khetee karem, aur daakh kee baariyaam lagaaem, aur bhaanti bhaanti ke phal upajaa len.
Psalm 107:37 in English
- King James Version (KJV)
- And sow the fields, and plant vineyards, which may yield fruits of increase.
- World English Bible (WEB)
- sow fields, plant vineyards, and reap the fruits of increase.
- American Standard Version (ASV)
- And sow fields, and plant vineyards, And get them fruits of increase.
- Bible in Basic English (BBE)
- And put seed in the fields and make vine-gardens, to give them fruit.
- Darby Translation (DBY)
- And sow fields, and plant vineyards, which yield fruits of increase;
- Webster's Bible (WBS)
- And sow the fields, and plant vineyards, which may yield fruits of increase.
- Young's Literal Translation (YLT)
- And they sow fields, and plant vineyards, And they make fruits of increase.
Read in context
- 35वह जंगल को जल का ताल, और निर्जल देश को जल के सोते कर देता है।
- 36और वहां वह भूखों को बसाता है, कि वे बसने के लिये नगर तैयार करें;
- 37और खेती करें, और दाख की बारियां लगाएं, और भांति भांति के फल उपजा लें।
- 38और वह उनको ऐसी आशीष देता है कि वे बहुत बढ़ जाते हैं, और उनके पशुओं को भी वह घटने नहीं देता।।
- 39फिर अन्धेर, विपत्ति और शोक के कारण, वे घटते और दब जाते हैं।
Cross references
- 1 Corinthians 3:7 1 कुरिन्थियों 3:7इसलिये न तो लगानेवाला कुछ है, और न सींचनेवाला, परन्तु परमेश्वर जो बढ़ानेवाला है।
- 2 Corinthians 9:10 2 कुरिन्थियों 9:10सो जो बोनेवाले को बीज, और भोजन के लिये रोटी देता है वह तुम्हें बीज देगा, और उसे फलवन्त करेगा; और तुम्हारे धर्म के फलों को बढ़ाएगा।
- Isaiah 37:30 यशायाह 37:30और तेरे लिये यह चिन्ह होगा कि इस वर्ष तो तुम उसे खाओगे जो आप से आप उगे, और दूसरे वर्ष वह जो उस से उत्पन्न हो, और तीसरे वर्ष बीज बोकर उसे लवने पाओगे और दाख की बारियां लगाने और उनका फल खाने पाओगे।
- Jeremiah 29:5 यिर्मयाह 29:5घर बनाकर उन में बस जाओ; बारियां लगाकर उनके फल खाओ।
- Zechariah 8:12 जकर्याह 8:12क्योंकि अब शान्ति के समय की उपज अर्थात् दाखलता फला करेंगी, पृथ्वी अपनी उपज उपजाया करेगी, और आकाश से ओस गिरा करेगी; क्योंकि मैं अपनी इस प्रजा के बचे हुओं को इन सब का अधिकारी कर दूंगा।
- Haggai 1:10–11 हाग्गै 1:10–11इस कारण आकाश से ओस गिरना और पृथ्वी से अन्न उपजना दोनों बन्द हैं। और मेरी आज्ञा से पृथ्वी और पहाड़ों पर, और अन्न और नये दाखमधु पर और ताजे तेल पर, और जो कुछ भूमि से उपजता है उस पर, और मनुष्यों और घरैलू पशुओं पर, और उनके परिश्रम की सारी कमाई पर भी अकाल पड़ा है।।
- Ezekiel 28:26 यहेजकेल 28:26वे उस में निडर बसे रहेंगे; वे घर बनाकर और दाख की बारियां लगाकर निडर रहेंगे; तब मैं उनके चारों ओर के सब लोगों को दण्ड दूंगा जो उन से अभिमान का बर्ताव करते हैं, तब वे जान लेंगे कि उनका परमेश्वर यहोवा ही है।
- Genesis 26:12 उत्पत्ति 26:12फिर इसहाक ने उस देश में जोता बोया, और उसी वर्ष में सौ गुणा फल पाया: और यहोवा ने उसको आशीष दी।
- Acts 14:17 प्रेरितों के काम 14:17तौभी उस ने अपने आप को बे- गवाह न छोड़ा; किन्तु वह भलाई करता रहा, और आकाश से वर्षा और फलवन्त ऋतु देकर, तुम्हारे मन को भोजन और आनन्द से भरता रहा।
- Joel 1:10–12 योएल 1:10–12खेती मारी गई, भूमि विलाप करती है; क्योंकि अन्न नाश हो गया, नया दाखमधु सूख गया, तेल भी सूख गया है।। हे किसानो, लज्जित हो, हे दाख की बारी के मालियों, गेहूं और जव के लिये हाय, हाय करो; क्योंकि खेती मारी गई है। दाखलता सूख गई, और अंजीर का वृक्ष कुम्हला गया है। अनार, ताड़, सेव, वरन मैदान के सब वृक्ष सूख गए हैं; और मनुष्यों का हर्ष जाता रहा है।।
- Haggai 1:5–6 हाग्गै 1:5–6इसलिये अब सेनाओं का यहोवा यों कहता है, अपनी अपनी चाल- चलन पर ध्यान करो। तुम ने बहुत बोया परन्तु थोड़ा काटा; तुम खाते हो, परन्तु पेट नहीं भरता; तुम पीते हो, परन्तु प्यास नहीं बुझती; तुम कपड़े पहिनते हो, परन्तु गरमाते नहीं; और जो मजदूरी कमाता है, वह अपनी मजदूरी की कमाई को छेदवाली थैली में रखता है।।
- Psalm 65:9–13 भजन संहिता 65:9–13तू भूमि की सुधि लेकर उसको सींचता हैं, तू उसको बहुत फलदायक करता है; परमेश्वर की नहर जल से भरी रहती है; तू पृथ्वी को तैयार करके मनुष्यों के लिये अन्न को तैयार करता है। तू रेघारियों को भली भांति सींचता है, और उनके बीच की मिट्टी को बैठाता है, तू भूमि को मेंह से नरम करता है, और उसकी उपज पर आशीष देता है। अपनी भलाई से भरे हुए वर्ष पर तू ने मानो मुकुट धर दिया है; तेरे मार्गों में उत्तम उत्तम पदार्थ पाए जाते हैं। वे जंगल की चराइयों में पाए जाते हैं; और पहाड़ियां हर्ष का फेंटा बान्धे हुए है।। चराइयां भेड़- बकरियों से भरी हुई हैं; और तराइयां अन्न से ढंपी हुई हैं, वे जयजयकार करतीं और गाती भी हैं।।