Psalms · chapter 112 · verse 5
Psalm 112:5 in Hindi
जो पुरूष अनुग्रह करता और उधार देता है, उसका कल्याण होता है, वह न्याय में अपने मुक में को जीतेगा।
Jo puroosh anugrah karataa aur udhaar detaa hai, usakaa kalyaan hotaa hai, vah nyaay mem apane muk mem ko jeetegaa.
Psalm 112:5 in English
- King James Version (KJV)
- A good man sheweth favour, and lendeth: he will guide his affairs with discretion.
- World English Bible (WEB)
- It is well with the man who deals graciously and lends. He will maintain his cause in judgment.
- American Standard Version (ASV)
- Well is it with the man that dealeth graciously and lendeth; He shall maintain his cause in judgment.
- Bible in Basic English (BBE)
- All is well for the man who is kind and gives freely to others; he will make good his cause when he is judged.
- Darby Translation (DBY)
- It is well with the man that is gracious and lendeth; he will sustain his cause in judgment.
- Webster's Bible (WBS)
- A good man showeth favor, and lendeth: he will guide his affairs with discretion.
- Young's Literal Translation (YLT)
- Good [is] the man — gracious and lending, He sustaineth his matters in judgment.
Read in context
- 3उसके घर में धन सम्पत्ति रहती है; और उसका धर्म सदा बना रहेगा।
- 4सीधे लोगों के लिये अन्धकार के बीच में ज्योति उदय होती है; वह अनुग्रहकारी, दयावन्त और धर्मी होता है।
- 5जो पुरूष अनुग्रह करता और उधार देता है, उसका कल्याण होता है, वह न्याय में अपने मुक में को जीतेगा।
- 6वह तो सदा तक अटल रहेगा; धर्मी का स्मरण सदा तक बना रहेगा।
- 7वह बुरे समाचार से नहीं डरता; उसका हृदय यहोवा पर भरोसा रखने से स्थिर रहता है।
Cross references
- Psalm 37:21 भजन संहिता 37:21दुष्ट ऋण लेता है, और भरता नहीं परनतु धर्मीं अनुग्रह करके दान देता है;
- Ephesians 5:15 इफिसियों 5:15इसलिये ध्यान से देखो, कि कैसी चाल चलते हो; निर्बुद्धियों की नाईं नहीं पर बुद्धिमानों की नाईं चलो।
- Proverbs 2:20 नीतिवचन 2:20तू भले मनुष्यों के मार्ग में चल, और धर्मियों की बाट को पकड़े रह।
- Philippians 1:9 फिलिप्पियों 1:9और मैं यह प्रार्थना करता हूं, कि तुम्हारा प्रेम, ज्ञान और सब प्रकार के विवेक सहित और भी बढ़ता जाए।
- Deuteronomy 15:7–10 व्यवस्थाविवरण 15:7–10जो देश तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे देता है उसके किसी फाटक के भीतर यदि तेरे भाइयों में से कोई तेरे पास द्ररिद्र हो, तो अपने उस दरिद्र भाई के लिये न तो अपना हृदय कठोर करना, और न अपनी मुट्ठी कड़ी करना; जिस वस्तु की घटी उसको हो, उसका जितना प्रयोजन हो उतना अवश्य अपना हाथ ढीला करके उसको उधार देना। सचेत रह कि तेरे मन में ऐसी अधम चिन्ता न समाए, कि सातवां वर्ष जो छुटकारे का वर्ष है वह निकट है, और अपनी दृष्टि तू अपने उस दरिद्र भाई की ओर से क्रूर करके उसे कुछ न दे, तो यह तेरे लिये पाप ठहरेगा। तू उसको अवश्य देना, और उसे देते समय तेरे मन को बुरा न लगे; क्योकि इसी बात के कारण तेरा परमेश्वर यहोवा तेरे सब कामों में जिन में तू अपना हाथ लगाएगा तुझे आशीष देगा।
- Proverbs 24:30–34 नीतिवचन 24:30–34मैं आलसी के खेत के पास से और निर्बुद्धि मनुष्य की दाख की बारी के पास होकर जाता था, तो क्या देखा, कि वहां सब कहीं कटीले पेड़ भर गए हैं; और वह बिच्छू पेड़ों से ढंप गई है, और उसके पत्थर का बाड़ा गिर गया है। तब मैं ने देखा और उस पर ध्यानपूर्वक विचार किया; हां मैं ने देखकर शिक्षा प्राप्त की। छोटी सी नींद, एक और झपकी, थोड़ी देर हाथ पर हाथ रख के और लेटे रहना, तब तेरा कंगालपन डाकू की नाई, और तेरी घटी हथियारबन्द के समान आ पड़ेगी।।
- Psalm 37:25–26 भजन संहिता 37:25–26मैं लड़कपन से लेकर बुढ़ापे तक देखता आया हूं; परन्तु न तो कभी धर्मी को त्यागा हुआ, और न उसके वंश को टुकड़े मांगते देखा है। वह तो दिन भर अनुग्रह कर करके ऋण देता है, और उसके वंश पर आशीष फलती रहती है।।
- John 6:12 यूहन्ना 6:12जब वे खाकर तृप्त हो गए तो उस ने अपने चेलों से कहा, कि बचे हुए टुकड़े बटोर लो, कि कुछ फेंका न जाए।
- Luke 6:35 लूका 6:35बरन अपने शत्रुओं से प्रेम रखो, और भलाई करो: और फिर पाने की आस न रखकर उधार दो; और तुम्हारे लिये बड़ा फल होगा; और तुम परमप्रधान के सन्तान ठहरोगे, क्योंकि वह उन पर जो धन्यवाद नहीं करते और बुरों पर भी कृपालु है।
- Romans 5:7 रोमियों 5:7किसी धर्मी जन के लिये कोई मरे, यह तो दुर्लभ है, परन्तु क्या जाने किसी भले मनुष्य के लिये कोई मरने का भी हियाव करे।
- Romans 12:11 रोमियों 12:11प्रयत्न करने में आलसी न हो; आत्मिक उन्माद में भरो रहो; प्रभु की सेवा करते रहो।
- Luke 23:50 लूका 23:50और देखो यूसुफ नाम एक मन्त्री जो सज्जन और धर्मी पुरूष था।