Romans · chapter 12 · verse 11
Romans 12:11 in Hindi
प्रयत्न करने में आलसी न हो; आत्मिक उन्माद में भरो रहो; प्रभु की सेवा करते रहो।
Prayatn karane mem aalasee na ho; aatmik unmaad mem bharo raho; prabhu kee sevaa karate raho.
Romans 12:11 in English
- King James Version (KJV)
- Not slothful in business; fervent in spirit; serving the Lord;
- World English Bible (WEB)
- not lagging in diligence, fervent in spirit, serving the Lord,
- American Standard Version (ASV)
- in diligence not slothful; fervent in spirit; serving the Lord;
- Bible in Basic English (BBE)
- Be not slow in your work, but be quick in spirit, as the Lord's servants;
- Darby Translation (DBY)
- as to diligent zealousness, not slothful; in spirit fervent; serving the Lord.
- Webster's Bible (WBS)
- Not slothful in business; fervent in spirit; serving the Lord;
- Young's Literal Translation (YLT)
- in the diligence not slothful; in the spirit fervent; the Lord serving;
Read in context
- 9प्रेम निष्कपट हो; बुराई से घृणा करो; भलाई मे लगे रहो।
- 10भाईचारे के प्रेम से एक दूसरे पर मया रखो; परस्पर आदर करने में एक दूसरे से बढ़ चलो।
- 11प्रयत्न करने में आलसी न हो; आत्मिक उन्माद में भरो रहो; प्रभु की सेवा करते रहो।
- 12आशा मे आनन्दित रहो; क्लेश मे स्थिर रहो; प्रार्थना मे नित्य लगे रहो।
- 13पवित्रा लोगों को जो कुछ अवश्य हो, उस में उन की सहायता करो; पहुनाई करने मे लगे रहो।
Cross references
- Hebrews 6:10–11 इब्रानियों 6:10–11क्योंकि परमेश्वर अन्यायी नहीं, कि तुम्हारे काम, और उस प्रेम को भूल जाए, जो तुम ने उनके नाम के लिये इस रीति से दिखाया, कि पवित्रा लोगों की सेवा की, और कर रहे हो। पर हम बहुत चाहते हैं, कि तुम में से हर एक जन अन्त तक पूरी आशा के लिये ऐसा ही प्रयत्न करता रहे।
- Acts 18:25 प्रेरितों के काम 18:25उस ने प्रभु के मार्ग की शिक्षा पाई थी, और मन लगाकर यीशु के विषय में ठीक ठीक सुनाता, और सिखाता था, परन्तु वह केवल यूहन्ना के बपतिस्मा की बात जानता था।
- Revelation 3:15–16 प्रकाशितवाक्य 3:15–16कि मैं तेरे कामों को जानता हूं कि तू न तो ठंडा है और न गर्म: भला होता कि तू ठंडा या गर्म होता। सो इसलिये कि तू गुनगुना है, और न ठंडा है और न गर्म, मैं तुझे अपने मुंह से उगलने पर हूं।
- Proverbs 13:4 नीतिवचन 13:4आलसी का प्राण लालसा तो करता है, और उसको कुछ नहीं मिलता, परन्तु कामकाजी हृष्ट पुष्ट हो जाते हैं।
- 1 Peter 4:8 1 पतरस 4:8और सब में श्रेष्ठ बात यह है कि एक दूसरे से अधिक प्रेम रखो; क्योंकि प्रेम अनेक पापों को ढ़ाप देता है।
- Colossians 3:22–24 कुलुस्सियों 3:22–24हे सेवको, जो शरीर के अनुसार तुम्हारे स्वामी हैं, सब बातों में उन की आज्ञा का पालन करो, मनुष्यों को प्रसन्न करनेवालों की नाईं दिखाने के लिये नहीं, परन्तु मन की सीधाई और परमेश्वर के भय से। और जो कुछ तुम करते हो, तन मन से करो, यह समझकर कि मनुष्यों के लिये नहीं परन्तु प्रभु के लिये करते हो। क्योंकि तुम जानते हो कि तुम्हें इस के बदले प्रभु से मीरास मिलेगी: तुम प्रभु मसीह की सेवा करते हो।
- Hebrews 12:28 इब्रानियों 12:28इस कारण हम इस राज्य को पाकर जो हिलने का नहीं, उस अनुग्रह को हाथ से न जाने दें, जिस के द्वारा हम भक्ति, और भय सहित, परमेश्वर की ऐसी आराधना कर सकते हैं जिस से वह प्रसन्न होता है।
- Proverbs 26:13–16 नीतिवचन 26:13–16आलसी कहता है, कि मार्ग में सिंह है, चौक में सिंह है! जैसे किवाड़ अपनी चूल पर घूमता है, वैसे ही आलसी अपनी खाट पर करवटें लेता है। आलसी अपना हाथ थाली में तो डालता है, परन्तु आलस्य के कारण कौर मुंह तक नहीं उठाता। आलसी अपने को ठीक उत्तर देनेवाले सात मनुष्यों से भी अधिक बुद्धिमान समझता है।
- Ephesians 4:28 इफिसियों 4:28चोरी करनेवाला फिर चोरी न करे; बरन भले काम करने में अपने हाथों से परिश्रम करे; इसलिये कि जिसे प्रयोजन हो, उसे देने को उसके पास कुछ हो।
- 1 Peter 1:22 1 पतरस 1:22सो जब कि तुम ने भाईचारे की निष्कपट प्रीति के निमित्त सत्य के मानने से अपने मनों को पवित्र किया है, तो तन मन लगा कर एक दूसरे से अधिक प्रेम रखो।
- Proverbs 10:26 नीतिवचन 10:26जैसे दांत को सिरका, और आंख को धूंआ, वैसे आलसी उनको लगात है जो उसको कहीं भेजते हैं।
- Matthew 24:12 मत्ती 24:12और अधर्म के बढ़ने से बहुतों का प्रेम ठण्डा हो जाएगा।