Psalms · chapter 19 · verse 7
Psalm 19:7 in Hindi
यहोवा की व्यवस्था खरी है, वह प्राण को बहाल कर देती है; यहोवा के नियम विश्वासयोग्य हैं, साधारण लोगों को बुद्धिमान बना देते हैं;
Yahovaa kee vyavasthaa kharee hai, vah praan ko bahaal kar detee hai; yahovaa ke niyam vishvaasayogy haim, saadhaaran logom ko buddhimaan banaa dete haim;
Psalm 19:7 in English
- King James Version (KJV)
- The law of the LORD [is] perfect, converting the soul: the testimony of the LORD [is] sure, making wise the simple.
- World English Bible (WEB)
- The LORD’s law is perfect, restoring the soul. The LORD’s covenant is sure, making wise the simple.
- American Standard Version (ASV)
- The law of Jehovah is perfect, restoring the soul: The testimony of Jehovah is sure, making wise the simple.
- Bible in Basic English (BBE)
- The law of the Lord is good, giving new life to the soul: the witness of the Lord is certain, giving wisdom to the foolish.
- Darby Translation (DBY)
- The law of Jehovah is perfect, restoring the soul; the testimony of Jehovah is sure, making wise the simple;
- Webster's Bible (WBS)
- The law of the LORD [is] perfect, converting the soul: the testimony of the LORD [is] sure, making wise the simple.
- Young's Literal Translation (YLT)
- The law of Jehovah [is] perfect, refreshing the soul, The testimonies of Jehovah [are] stedfast, Making wise the simple,
Read in context
- 5जो दुल्हे के समान अपने महल से निकलता है। वह शूरवीर की नाई अपनी दौड़ दौड़ने को हर्षित होता है।
- 6वह आकाश की एक छोर से निकलता है, और वह उसकी दूसरी छोर तक चक्कर मारता है; और उसकी गर्मी सबको पहुंचती है।।
- 7यहोवा की व्यवस्था खरी है, वह प्राण को बहाल कर देती है; यहोवा के नियम विश्वासयोग्य हैं, साधारण लोगों को बुद्धिमान बना देते हैं;
- 8यहोवा के उपदेश सिद्ध हैं, हृदय को आनन्दित कर देते हैं; यहोवा की आज्ञा निर्मल है, वह आंखों में ज्योति ले आती है;
- 9यहोवा का भय पवित्रा है, वह अनन्तकाल तक स्थिर रहता है; यहोवा के नियम सत्य और पूरी रीति से धर्ममय हैं।
Cross references
- Psalm 119:130 भजन संहिता 119:130तेरी बातों के खुलने से प्राकाश होता है; उस से भोले लोग समझ प्राप्त करते हैं।
- Psalm 111:7 भजन संहिता 111:7सच्चाई और न्याय उसके हाथों के काम हैं; उसके सब उपदेश विश्वासयोग्य हैं,
- Colossians 3:16 कुलुस्सियों 3:16मसीह के वचन को अपने हृदय में अधिकाई से बसने दो; और सिद्ध ज्ञान सहित एक दूसरे को सिखाओ, और चिताओ, और अपने अपने मन में अनुग्रह के साथ परमेश्वर के लिये भजन और स्तुतिगान और आत्मिक गीत गाओ।
- Proverbs 1:4 नीतिवचन 1:4कि भोलों को चतुराई, और जवान को ज्ञान और विवेक मिले;
- Psalm 23:3 भजन संहिता 23:3वह मेरे जी में जी ले आता है। धर्म के मार्गो में वह अपने नाम के निमित्त अगुवाई करता है।
- 2 Timothy 3:15–17 2 तीमुथियुस 3:15–17और बालकपन से पवित्रा शास्त्रा तेरा जाना हुआ है, जो तुझे मसीह पर विश्वास करने से उद्धार प्राप्त करने के लिये बुद्धिमान बना सकता है। हर एक पवित्राशास्त्रा परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है और उपदेश, और समझाने, और सुधारने, और धर्म की शिक्षा के लिये लाभदायक है। ताकि परमेश्वर का जन सिद्ध बने, और हर एक भले काम के लिये तत्पर हो जाए।।
- Psalm 119:105 भजन संहिता 119:105तेरा वचन मेरे पांव के लिये दीपक, और मेरे मार्ग के लिये उजियाला है।
- Deuteronomy 32:4 व्यवस्थाविवरण 32:4वह चट्टान है, उसका काम खरा है; और उसकी सारी गति न्याय की है। वह सच्चा ईश्वर है, उस में कुटिलता नहीं, वह धर्मी और सीधा है।।
- 2 Timothy 2:19 2 तीमुथियुस 2:19तौभी परमेश्वर की पक्की नेव बनी रहती है, और उस पर यह छाप लगी है, कि प्रभु अपनों को पहिचानता है; और जो कोई प्रभु का नाम लेता है, वह अधर्म से बचा रहे।
- Psalm 93:5 भजन संहिता 93:5तेरी चितौनियां अति विश्वासयोग्य हैं; हे यहोवा तेरे भवन को युग युग पवित्राता ही शोभा देती है।।
- Psalm 119:127–128 भजन संहिता 119:127–128इस कारण मैं तेरी आज्ञाओं को सोने से वरन कुन्दन से भी अधिक प्रिय मानता हूं। इसी कारण मैं तेरे सब उपदेशों को सब विषयों में ठीक जानता हूं; और सब मिथ्या मार्गों से बैर रखता हूं।।
- James 1:21–25 याकूब 1:21–25इसलिये सारी मलिनता और बैर भाव की बढ़ती को दूर करके, उस वचन को नम्रता से ग्रहण कर लो, जो हृदय में बोया गया और जो तुम्हारे प्राणों का उद्धार कर सकता है। परन्तु वचन पर चलनेवाले बनो, और केवल सुननेवाले ही नहीं जो अपने आप को धोखा देते हैं। क्योंकि जो कोई वचन का सुननेवाला हो, और उस पर चलनेवाला न हो, तो वह उस मनुष्य के समान है जो अपना स्वाभाविक मुंह दर्पण में देखता है। इसलिये कि वह अपने आप को देखकर चला जाता, और तुरन्त भूल जाता है कि मैं कैसा था। पर जो व्यक्ति स्वतंत्राता की सिद्ध व्यवस्था पर ध्यान करता रहता है, वह अपने काम में इसलिये आशीष पाएगा कि सुनकर नहीं, पर वैसा ही काम करता है।