Psalms · chapter 55 · verse 8
Psalm 55:8 in Hindi
मैं प्रचण्ड बयार और आन्धी के झोंके से बचकर किसी शरण स्थान में भाग जाता।।
Maim prachand bayaar aur aandhee ke jhonke se bachakar kisee sharan sthaan mem bhaag jaataa..
Psalm 55:8 in English
- King James Version (KJV)
- I would hasten my escape from the windy storm [and] tempest.
- World English Bible (WEB)
- “I would hurry to a shelter from the stormy wind and storm.”
- American Standard Version (ASV)
- I would haste me to a shelter From the stormy wind and tempest.
- Bible in Basic English (BBE)
- I would quickly take cover from the driving storm and from the violent wind.
- Darby Translation (DBY)
- I would hasten my escape from the stormy wind, from the tempest.
- Webster's Bible (WBS)
- I would hasten my escape from the windy storm [and] tempest.
- Young's Literal Translation (YLT)
- I hasten escape for myself, From a rushing wind, from a whirlwind.
Read in context
- 6और मैं ने कहा, भला होता कि मेरे कबूतर के से पंख होते तो मैं उड़ जाता और विश्राम पाता!
- 7देखो, फिर तो मैं उड़ते उड़ते दूर निकल जाता और जंगल में बसेरा लेता,
- 8मैं प्रचण्ड बयार और आन्धी के झोंके से बचकर किसी शरण स्थान में भाग जाता।।
- 9हे प्रभु, उनको सत्यानाश कर, और उनकी भाषा में गड़बड़ी डाल दे; क्योंकि मैं ने नगर में उपद्रव और झगड़ा देखा है।
- 10रात दिन वे उसकी शहरपनाह पर चढ़कर चारों ओर घूमते हैं; और उसके भीतर दुष्टता और उत्पात होता है।
Cross references
- Isaiah 4:6 यशायाह 4:6वह दिन को घाम से बचाने के लिये और आंधी- पानी और झड़ी में एक शरण और आड़ होगा।।
- Matthew 7:25–27 मत्ती 7:25–27और मेंह बरसा और बाढ़ें आईं, और आन्धियां चलीं, और उस घर पर टक्करें लगीं, परन्तु वह नहीं गिरा, क्योंकि उस की नेव चटान पर डाली गई थी। परन्तु जो कोई मेरी ये बातें सुनता है और उन पर नहीं चलता वह उस निर्बुद्धि मनुष्य की नाईं ठहरेगा जिस ने अपना घर बालू पर बनाया। और मेंह बरसा, और बाढ़ें आईं, और आन्धियां चलीं, और उस घर पर टक्करें लगीं और वह गिरकर सत्यानाश हो गया।।
- Psalm 18:4 भजन संहिता 18:4मृत्यु की रस्सियों से मैं चारो ओर से घिर गया हूं, और अधर्म की बाढ़ ने मुझ को भयभीत कर दिया;
- Isaiah 17:12–13 यशायाह 17:12–13हाय, हाय! देश देश के बहुत से लोगों का कैसा नाद हो रहा है, वे समुद्र की लहरों की नाईं गरजते हैं। राज्य राज्य के लोगों का कैसा गर्जन हो रहा है, वे प्रचण्ड धारा के समान नाद करते हैं! राज्य राज्य के लोग बाढ़ के बहुत से जल की नाई नाद करते हैं, परन्तु वह उनको घुड़केगा, और वे दूर भाग जाएंगे, और ऐसे उड़ाए जाएंगे जैसे पहाड़ों पर की भूसी वायु से, और धूलि बवण्डर से घुमाकर उड़ाई जाती है।