Titus · chapter 2 · verse 1
Titus 2:1 in Hindi
पर तू ऐसी बातें कहा कर, जो खरे उपदेश के योग्य हैं।
Par too aisee baatem kahaa kar, jo khare upadesh ke yogy hain.
Titus 2:1 in English
- King James Version (KJV)
- But speak thou the things which become sound doctrine:
- World English Bible (WEB)
- But say the things which fit sound doctrine,
- American Standard Version (ASV)
- But speak thou the things which befit the sound doctrine:
- Bible in Basic English (BBE)
- But let your words be in agreement with true and right teaching:
- Darby Translation (DBY)
- But do thou speak the things that become sound teaching;
- Webster's Bible (WBS)
- But speak thou the things which become sound doctrine:
- Young's Literal Translation (YLT)
- And thou — be speaking what doth become the sound teaching;
Read in context
- 1पर तू ऐसी बातें कहा कर, जो खरे उपदेश के योग्य हैं।
- 2अर्थात् बूढ़े पुरूष, सचेत और गम्भीर और संयमी हों, और उन का विश्वास और प्रेम और धीरज पक्का हो।
- 3इसी प्रकार बूढ़ी स्त्रियों का चाल चलन पवित्रा लोगों सा हो, दोष लगानेवाली और पियक्कड़ नहीं; पर अच्छी बातें सिखानेवाली हों।
Cross references
- 2 Timothy 1:13 2 तीमुथियुस 1:13जो खरी बातें तू ने मुझ से सुनी हैं उन को उस विश्वास और प्रेम के साथ जो मसीह यीशु में है, अपना आदर्श बनाकर रख।
- 1 Timothy 6:3 1 तीमुथियुस 6:3यदि कोई और ही प्रकार का उपदेश देना है; और खरी बातों को, अर्थात् हमारे प्रभु यीशु मसीह की बातों को और उस उपदेश को नहीं मानता, जो भक्ति के अनुसार है।
- Titus 1:9 तीतुस 1:9और विश्वासयोग्य वचन पर जो धर्मोपदेश के अनुसार है, स्थिर रहे; कि खरी शिक्षा से उपदेश दे सके; और विवादियों का मुंह भी बन्द कर सके।।
- Titus 3:8 तीतुस 3:8यह बात सच है, और मैं चाहता हूं, कि तू इन बातों के विषय में दृढ़ता से बोले इसलिये कि जिन्हों ने परमेश्वर की प्रतीति की है, वे भले- भले कामों मे लगे रहते का ध्यान रखें: ये बातें भली, और मनुष्यों के लाभ की हैं।
- 1 Timothy 1:10 1 तीमुथियुस 1:10व्याभिचारियों, पुरूषगामियों, मनुष्य के बेचनेवालों, झूठों, और झूठी शपथ खानेवालों, और इन को छोड़ खरे उपदेश के सब विरोधियों के लिये ठहराई गई है।
- Titus 2:11–14 तीतुस 2:11–14क्योंकि परमेश्वर का अनुग्रह प्रगट है, जो सब मनुष्यों के उद्धार का कारण है। और हमें चिताता है, कि हम अभक्ति और सांसारिक अभिलाषाओं से मन फेरकर इस युग में संयम और धर्म और भक्ति से जीवन बिताएं। और उस धन्य आशा की अर्थात् अपने महान परमेश्वर और उद्धारकर्ता यीशु मसीह की महिमा के प्रगट होने की बाट जोहते रहें। जिस ने अपने आप को हमारे लिये दे दिया, कि हमें हर प्रकार के अधर्म से छुड़ा ले, और शुद्ध करके अपने लिये एक ऐसी जाति बना ले जो भले भले कामों में सरगर्म हो।।