1 Corinthians · chapter 10 · verse 9
1 Corinthians 10:9 in Hindi
और न हम प्रभु को परखें; जैसा उन में से कितनों ने किया, और सांपों के द्वारा नाश किए गए।
Aur na ham prabhu ko parakhem; jaisaa un mem se kitanom ne kiyaa, aur saampom ke dvaaraa naash kie gae.
1 Corinthians 10:9 in English
- King James Version (KJV)
- Neither let us tempt Christ, as some of them also tempted, and were destroyed of serpents.
- World English Bible (WEB)
- Let’s not test Christ, as some of them tested, and perished by the serpents.
- American Standard Version (ASV)
- Neither let us make trial of the Lord, as some of them made trial, and perished by the serpents.
- Bible in Basic English (BBE)
- And let us not put the Lord to the test, as some of them did, and came to their death by snakes.
- Darby Translation (DBY)
- Neither let us tempt the Christ, as some of them tempted, and perished by serpents.
- Webster's Bible (WBS)
- Neither let us tempt Christ, as some of them also tempted, and were destroyed by serpents.
- Young's Literal Translation (YLT)
- neither may we tempt the Christ, as also certain of them did tempt, and by the serpents did perish;
Read in context
- 7और न तुम मूरत पूजनेवाले बनों; जैसे कि उन में से कितने बन गए थे, जैसा लिखा है, कि लोग खाने- पीने बैठे, और खेलने- कूदने उठे।
- 8और न हम व्यभिचार करें; जैसा उन में से कितनों ने किया: एक दिन में तेईस हजार मर गये।
- 9और न हम प्रभु को परखें; जैसा उन में से कितनों ने किया, और सांपों के द्वारा नाश किए गए।
- 10और नतुम कुड़कुड़ाए, जिस रीति से उन में से कितने कुड़कुड़ाए, और नाश करनेवाले के द्वारा नाश किए गए।
- 11परन्तु ये सब बातें, जो उन पर पड़ी, दृष्टान्त की रीति पर भी: और वे हमारी चितावनी के लिये जो जगत के अन्तिम समय में रहते हैं लिखी गईं हैं।
Cross references
- Numbers 21:5–6 गिनती 21:5–6सो वे परमेश्वर के विरूद्ध बात करने लगे, और मूसा से कहा, तुम लोग हम को मि से जंगल में मरने के लिये क्यों ले आए हो? यहां न तो रोटी है, और न पानी, और हमारे प्राण इस निकम्मी रोटी से दुखित हैं। सो यहोवा ने उन लोगों में तेज विषवाले सांप भेजे, जो उनको डसने लगे, और बहुत से इस्त्राएली मर गए।
- Psalm 78:18 भजन संहिता 78:18और अपनी चाह के अनुसार भोजन मांगकर मन ही मन ईश्वर की परीक्षा की।
- Hebrews 3:8–11 इब्रानियों 3:8–11तो अपने मन को कठोर न करो, जैसा कि क्रोध दिलाने के समय और परीक्षा के दिन जंगल में किया था। जहां तुम्हारे बापदादों ने मुझे जांचकर परखा और चालीस वर्ष तक मेरे काम देखे। इस कारण मैं उस समय के लोगों से रूठा रहा, और कहा, कि इन के मन सदा भटकते रहते हैं, और इन्हों ने मेरे मार्गों को नहीं पहिचाना। तब मैं ने क्रोध में आकर शपथ खाई, कि वे मेरे विश्राम में प्रवेश करने न पाएंगे।
- Exodus 17:2 निर्गमन 17:2इसलिये वे मूसा से वादविवाद करके कहने लगे, कि हमें पीने का पानी दे। मूसा ने उन से कहा, तुम मुझ से क्यों वादविवाद करते हो? और यहोवा की परीक्षा क्यों करते हो?
- Deuteronomy 6:16 व्यवस्थाविवरण 6:16तुम अपने परमेश्वर यहोवा की परीक्षा न करना, जैसे कि तुम ने मस्सा में उसकी परीक्षा की थी।
- Psalm 78:56 भजन संहिता 78:56तौभी उन्होने परमप्रधान परमेश्वर की परीक्षा की और उस से बलवा किया, और उसकी चितौनियों को न माना,
- Exodus 17:7 निर्गमन 17:7और मूसा ने उस स्थान का नाम मस्सा और मरीबा रखा, कयोंकि इस्राएलियों ने वहां वादविवाद किया था, और यहोवा की परीक्षा यह कहकर की, कि क्या यहोवा हमारे बीच है वा नहीं?
- Exodus 23:20–21 निर्गमन 23:20–21सुन, मैं एक दूत तेरे आगे आगे भेजता हूं जो मार्ग में तेरी रक्षा करेगा, और जिस स्थान को मै ने तैयार किया है उस में तुझे पहुंचाएगा। उसके साम्हने सावधान रहना, और उसकी मानना, उसका विरोध न करना, क्योंकि वह तुम्हारा अपराध क्षमा न करेगा; इसलिये कि उस में मेरा नाम रहता है।
- Psalm 95:9 भजन संहिता 95:9जब तुम्हारे पुरखाओं ने मुझे परखा, उन्हों ने मुझ को जांचा और मेरे काम को भी देखा।
- Psalm 106:14 भजन संहिता 106:14उन्हों ने जंगल में अति लालसा की और निर्जल स्थान में ईश्वर की परीक्षा की।
- Hebrews 10:28–30 इब्रानियों 10:28–30जब कि मूसा की व्यवस्था का न माननेवाला दो या तीन जनों की गवाही पर, बिना दया के मार डाला जाता है। तो सोच लो कि वह कितने और भी भारी दण्ड के योग्य ठहरेगा, जिस ने परमेश्वर के पुत्रा को पांवों से रौंदा, और वाचा के लोहू को जिस के द्वारा वह पवित्रा ठहराया गया था, अपवित्रा जाना हैं, और अनुग्रह की आत्मा का अपमान किया। क्योंकि हम उसे जानते हैं, जिस ने कहा, कि पलटा लेना मेरा काम है, मैं ही बदला दूंगा: और फिर यह, कि प्रभु अपने लोगों का न्याय करेगा।