1 John · chapter 2 · verse 16
1 John 2:16 in Hindi
क्योंकि जो कुछ संसार में है, अर्थात् शरीर की अभिलाषा, और आंखों की अभिलाषा और जीविका का घमण्ड, वह पिता की ओर से नहीं, परन्तु संसार ही की ओर से है।
Kyonki jo kuchh sansaar mem hai, arthaat shareer kee abhilaashaa, aur aankhom kee abhilaashaa aur jeevikaa kaa ghamand, vah pitaa kee or se naheem, parantu sansaar hee kee or se hai.
1 John 2:16 in English
- King James Version (KJV)
- For all that [is] in the world, the lust of the flesh, and the lust of the eyes, and the pride of life, is not of the Father, but is of the world.
- World English Bible (WEB)
- For all that is in the world—the lust of the flesh, the lust of the eyes, and the pride of life—isn’t the Father’s, but is the world’s.
- American Standard Version (ASV)
- For all that is in the world, the lust of the flesh and the lust of the eyes and the vainglory of life, is not of the Father, but is of the world.
- Bible in Basic English (BBE)
- Because everything in the world, the desire of the flesh, the desire of the eyes, and the pride of life, is not of the Father but of the world.
- Darby Translation (DBY)
- because all that [is] in the world, the lust of the flesh, and the lust of the eyes, and the pride of life, is not of the Father, but is of the world.
- Webster's Bible (WBS)
- For all that [is] in the world, the lust of the flesh, and the lust of the eyes, and the pride of life, is not from the Father, but is from the world.
- Young's Literal Translation (YLT)
- because all that [is] in the world — the desire of the flesh, and the desire of the eyes, and the ostentation of the life — is not of the Father, but of the world,
Read in context
- 14हे पितरों, मैं ने तुम्हें इसलिये लिखा है, कि जो आदि से है तुम उसे जान गए हो: हे जवानो, मैं ने तुम्हें इसलिये लिखा है, कि बलवन्त हो, और परमेश्वर का वचन तुम में बना रहता है, और तुम ने उस दुष्ट पर जय पाई है।
- 15तुम न तो संसार से और न संसार में की वस्तुओं से प्रेम रखो: यदि कोई संसार से प्रेम रखता है, तो उस में पिता का प्रेम नहीं है।
- 16क्योंकि जो कुछ संसार में है, अर्थात् शरीर की अभिलाषा, और आंखों की अभिलाषा और जीविका का घमण्ड, वह पिता की ओर से नहीं, परन्तु संसार ही की ओर से है।
- 17और संसार और उस की अभिलाषाएं दोनों मिटते जाते हैं, पर जो परमेश्वर की इच्छा पर चलता है, वह सर्वदा बना रहेगा।।
- 18हे लड़कों, यह अन्तिम समय है, और जैसा तुम ने सुना है, कि मसीह का विरोधी आनेवाला है, उसके अनुसार अब भी बहुत से मसीह के विरोधी उठे हैं; इस से हम जानते हैं, कि यह अन्तिम समय है।
Cross references
- Romans 13:14 रोमियों 13:14बरन प्रभु यीशु मसीह को पहिन लो, और शरीर के अभिलाषों को पूरा करने का उपाय न करो।।
- Galatians 5:17 गलातियों 5:17क्योंकि शरीर आत्मा के विरोध में लालसा करती है, और ये एक दूसरे के विरोधी हैं; इसलिये कि जो तुम करना चाहते हो वह न करने पाओ।
- Psalm 119:36–37 भजन संहिता 119:36–37मेरे मन को लोभ की ओर नहीं, अपनी चितौनियों ही की ओर फेर दे। मेरी आंखों को व्यर्थ वस्तुओं की ओर से फेर दे; तू अपने मार्ग में मुझे जिला।
- Genesis 3:6 उत्पत्ति 3:6सो जब स्त्री ने देखा कि उस वृक्ष का फल खाने में अच्छा, और देखने में मनभाऊ, और बुद्धि देने के लिये चाहने योग्य भी है, तब उस ने उस में से तोड़कर खाया; और अपने पति को भी दिया, और उस ने भी खाया।
- Proverbs 27:20 नीतिवचन 27:20जैसे अधोलोक और विनाशलोक, वैसे ही मनुष्य की आंखें भी तृप्त नहीं होती।
- Ephesians 2:3 इफिसियों 2:3इन में हम भी सब के सब पहिले अपने शरीर की लालसाओं में दिन बिताते थे, और शरीर, और मन की मनसाएं पूरी करते थे, और और लोगों के समान स्वभाव ही से क्रोध की सन्तान थे।
- 1 Peter 2:11 1 पतरस 2:11हे प्रियों मैं तुम से बिनती करता हूं, कि तुम अपने आप को परदेशी और यात्री जानकर उस सांसारिक अभिलाषाओं से जो आत्मा से युद्ध करती हैं, बचे रहो।
- James 3:15 याकूब 3:15यह ज्ञान वह नहीं, जो ऊपर से उतरता है बरन सांसारिक, और शारीरिक, और शैतानी है।
- 2 Peter 2:10 2 पतरस 2:10निज करके उन्हें जो अशुद्ध अभिलाषाओं के पीछे शरीर के अनुसार चलते, और प्रभुता को तुच्छ जानते हैं: वे ढीठ, और हठी हैं, और ऊंचे पदवालों को बुरा भला कहने से नहीं डरते।
- 1 Peter 4:2–3 1 पतरस 4:2–3ताकि भविष्य में अपना शेष शारीरिक जीवन मनुष्यों की अभिलाषाओं के अनुसार नहीं बरन परमेश्वर की इच्छा के अनुसार व्यतीत करो। क्योंकि अन्यजातियों की इच्छा के अनुसार काम करने, और लुचपन की बुरी अभिलाषाओं, मतवालापन, लीलाक्रीड़ा, पियक्कड़पन, और घृणित मूत्तिपूजा में जहां तक हम ने पहिले से समय गंवाया, वही बहुत हुआ।
- Psalm 78:18 भजन संहिता 78:18और अपनी चाह के अनुसार भोजन मांगकर मन ही मन ईश्वर की परीक्षा की।
- 2 Peter 2:18 2 पतरस 2:18वे व्यर्थ घमण्ड की बातें कर करके लुचपन के कामों के द्वारा, उन लोगों को शारीरिक अभिलाषाओं मे फंसा लेते हैं, जो भटके हुओं में से अभी निकल ही रहे हैं।
Original words (Greek)
- For · G3754ὅτι hóti
- that · G3956πᾶς pâs
- in · G1722ἐν en
- world · G2889κόσμος kósmos
- lust · G1939ἐπιθυμία epithymía
- flesh · G4561σάρξ sárx
- and · G2532καί kaí
- lust · G1939ἐπιθυμία epithymía
- eyes · G3788ὀφθαλμός ophthalmós
- and · G2532καί kaí
- pride · G212ἀλαζονεία alazoneía
- life · G979βίος bíos
- is · G2076ἐστί estí
- not · G3756οὐ ou
- of · G1537ἐκ ek
- Father · G3962πατήρ patḗr
- but · G235ἀλλά allá
- is · G2076ἐστί estí
- of · G1537ἐκ ek
- world · G2889κόσμος kósmos