1 Kings · chapter 12 · verse 8
1 Kings 12:8 in Hindi
रहूबियाम ने उस सम्मति को छोड़ दिया, जो बूढ़ों ने उसको दी थी,और उन जवानों से सम्मति ली, जो उसके संग बड़े हुए थे, और उसके सम्मुख उपस्थित रहा करते थे।
Rahoobiyaam ne us sammati ko chhod diyaa, jo boodhom ne usako dee thee,aur un javaanom se sammati lee, jo usake sang bade hue the, aur usake sammukh upasthit rahaa karate the.
1 Kings 12:8 in English
- King James Version (KJV)
- But he forsook the counsel of the old men, which they had given him, and consulted with the young men that were grown up with him, [and] which stood before him:
- World English Bible (WEB)
- But he abandoned the counsel of the old men which they had given him, and took counsel with the young men who had grown up with him, who stood before him.
- American Standard Version (ASV)
- But he forsook the counsel of the old men which they had given him, and took counsel with the young men that were grown up with him, that stood before him.
- Bible in Basic English (BBE)
- But he gave no attention to the opinion of the old men, and went to the young men of his generation who were waiting before him:
- Darby Translation (DBY)
- But he forsook the advice of the old men which they had given him, and consulted with the young men, who had grown up with him, that stood before him.
- Webster's Bible (WBS)
- But he forsook the counsel of the old men, which they had given him, and consulted with the young men that had grown up with him, [and] who stood before him:
- Young's Literal Translation (YLT)
- And he forsaketh the counsel of the elders which they counselled him, and consulteth with the lads who have grown up with him, who are standing before him;
Read in context
- 6तब राजा रहूबियाम ने उन बूढ़ों से जो उसके पिता सुलैमान के जीवन भर उसके साम्हने उपस्थित रहा करते थे सम्मति ली, कि इस प्रजा को कैसा उत्तर देना उचित है, इस में तुम क्या सम्मति देते हो?
- 7उन्हों ने उसको यह उत्तर दिया, कि यदि तू अभी प्रजा के लोगों का दास बनकर उनके अधीन हो और उन से मधुर बातें कहे, तो वे सदैव तेरे अधीन बने रहेंगे।
- 8रहूबियाम ने उस सम्मति को छोड़ दिया, जो बूढ़ों ने उसको दी थी,और उन जवानों से सम्मति ली, जो उसके संग बड़े हुए थे, और उसके सम्मुख उपस्थित रहा करते थे।
- 9उन से उस ने पूछा, मैं प्रजा के लोगों को कैसा उत्तर दूं? उस में तुम क्या सम्मति देते हो? उन्हो ने तो मुझ से कहा है, कि जो जूआ तेरे पिता ने हम पर डाल रखा है, उसे तू हलका कर।
- 10जवानों ने जो उसके संग बड़े हुए थे उसको यह उत्तर दिया, कि उन लोगों ने तुझ से कहा है, कि तेरे पिता ने हमारा जूआ भारी किया था, परन्तु तू उसे हमारे लिऐ हलका कर; तू उन से यों कहना, कि मेरी छिंगुलिया मेरे पिता की कमर से भी मोटी है।
Cross references
- Proverbs 19:20 नीतिवचन 19:20सम्मति को सुन ले, और शिक्षा को ग्रहण कर, कि तू अन्तकाल में बुद्धिमान ठहरे।
- Proverbs 25:12 नीतिवचन 25:12जैसे सोने का नत्थ और कुन्दन का जेवन अच्छा लगता है, वैसे ही माननेवाले के कान में बुद्धिमान की डांट भी अच्छी लगती है।
- Proverbs 1:25 नीतिवचन 1:25वरन तुम ने मेरी सारी सम्मति को अनसुनी किया, और मेरी ताड़ना का मूल्य न जाना;
- Ecclesiastes 10:2–3 सभोपदेशक 10:2–3बुद्धिमान का मन उचित बात की ओर रहता है परन्तु मूर्ख का मन उसके विपरीत रहता है। वरन जब मूर्ख मार्ग पर चलता है, तब उसकी समझ काम नहीं देती, अैर वह सब से कहता है, मैं मूर्ख हूं।।
- Proverbs 1:2–5 नीतिवचन 1:2–5इनके द्वारा पढ़नेवाला बुद्धि और शिक्षा प्राप्त करे, और समझ की बातें समझे, और काम करने में प्रवीणता, और धर्म, न्याय और सीधाई की शिक्षा पाए; कि भोलों को चतुराई, और जवान को ज्ञान और विवेक मिले; कि बुद्धिमान सुनकर अपनी विद्या बढ़ाए, और समझदार बुद्धि का उपदेश पाए,
- 2 Chronicles 25:15–16 2 इतिहास 25:15–16तब यहोवा का क्रोध अमस्याह पर भड़क उठा और उस ने उसके पास एक नबी भेजा जिस ने उस से कहा, जो देवता अपने लोगों को तेरे हाथ से बचा न सके, उनकी खोज में तू क्यों लगा है? वह उस से कह ही रहा था कि उस ने उस से पूछा, क्या हम ने तुझे राजमन्त्री ठहरा दिया है? चुप रह! क्या तू मार खाना चाहता है? तब वह नबी यह कहकर चुप हो गया, कि मुझे मालूम है कि परमेश्वर ने तुझे नाश करने को ठाना है, क्योंकि तू ने ऐसा किया है और मेरी सम्मति नहीं मानी।
- 2 Chronicles 10:8 2 इतिहास 10:8परन्तु उस ने उस सम्मति को जो बूढ़ों ने उसको दी थी छोड़ दिया और उन जवानों से सम्मति ली, जो उसके संग बड़े हुए थे और उसके सम्मुख उपस्थित रहा करते थे।
- Proverbs 1:30 नीतिवचन 1:30उन्हों ने मेरी सम्पत्ति न चाही वरन मेरी सब ताड़नाओं को तुच्छ जाना।