2 Chronicles · chapter 10 · verse 8
2 Chronicles 10:8 in Hindi
परन्तु उस ने उस सम्मति को जो बूढ़ों ने उसको दी थी छोड़ दिया और उन जवानों से सम्मति ली, जो उसके संग बड़े हुए थे और उसके सम्मुख उपस्थित रहा करते थे।
Parantu us ne us sammati ko jo boodhom ne usako dee thee chhod diyaa aur un javaanom se sammati lee, jo usake sang bade hue the aur usake sammukh upasthit rahaa karate the.
2 Chronicles 10:8 in English
- King James Version (KJV)
- But he forsook the counsel which the old men gave him, and took counsel with the young men that were brought up with him, that stood before him.
- World English Bible (WEB)
- But he abandoned the counsel of the old men which they had given him, and took counsel with the young men who had grown up with him, who stood before him.
- American Standard Version (ASV)
- But he forsook the counsel of the old men which they had given him, and took counsel with the young men that were grown up with him, that stood before him.
- Bible in Basic English (BBE)
- But he gave no attention to the opinion of the old men, but went to the young men of his generation who were waiting before him.
- Darby Translation (DBY)
- But he forsook the advice of the old men which they had given him, and consulted with the young men, who had grown up with him, that stood before him.
- Webster's Bible (WBS)
- But he forsook the counsel which the old men gave him, and took counsel with the young men that were brought up with him, that stood before him.
- Young's Literal Translation (YLT)
- And he forsaketh the counsel of the aged men that they counselled him, and consulteth with the lads who have grown up with him, those standing before him,
Read in context
- 6तब राजा रहूबियाम ने उन बूढ़ों से जो उसके पिता सुलैमान के जीवन भर उसके साम्हने अपस्थ्ति रहा करते थे, यह कहकर सम्मति ली, कि इस प्रजा को कैसा उत्तर देना उचित है, इस में तुम क्या सम्मति देते हो?
- 7उन्हों ने उसको यह उत्तर दिया, कि यदि तू इस प्रजा के लोगों से अच्छा बर्त्ताव करके उन्हें प्रसन्न करे और उन से मधुर बातें कहे, तो वे सदा तेरे अधीन बने रहेंगे।
- 8परन्तु उस ने उस सम्मति को जो बूढ़ों ने उसको दी थी छोड़ दिया और उन जवानों से सम्मति ली, जो उसके संग बड़े हुए थे और उसके सम्मुख उपस्थित रहा करते थे।
- 9उन से उस ने पूछा, मैं प्रजा के लोगों को कैसा उत्तर दूं, इस में तुम क्या सम्मति देते हो? उन्हों ने तो मुझ से कहा है, कि जो जूआ तेरे पिता ने हम पर डाल रखा है, उसे तू हलका कर।
- 10जवानों ने जो उस के संग बड़े हुए थे उसको यह उत्तर दिया, कि उन लागों ने तुझ से कहा है, कि तेरे पिता ने हमारा जूआ भारी किया था, परन्तु उसे हमारे लिये हलका कर; तू उन से यों कहना, कि मेरी छिंगुलिया मेरे पिता की कटि से भी मोटी ठहरेगी।
Cross references
- 2 Samuel 17:14 2 शमूएल 17:14तब अबशालोम और सब इस्राएली पुरूषों ने कहा, एरेकी हूशै की बम्मति अहीतोपेल की सम्मति से उम्तम है। सहोवा ने तो अहीतोपेल की अच्छी सम्मति को निष्फल करने के लिये ठाना था, कि यह अबशालोम ही पर विपत्ति डाले।
- Proverbs 1:25 नीतिवचन 1:25वरन तुम ने मेरी सारी सम्मति को अनसुनी किया, और मेरी ताड़ना का मूल्य न जाना;
- Proverbs 9:9 नीतिवचन 9:9बुद्धिमान को शिक्षा दे, वह अधिक बुद्धिमान होगा; धर्मी को चिता दे, वह अपनी विद्या बढ़ाएगा।
- Ecclesiastes 10:16 सभोपदेशक 10:16हे देश, तुझ पर हाय जब तेरा राजा लड़का है और तेरे हाकिम प्रात:काल भोज करते हैं!
- Proverbs 13:20 नीतिवचन 13:20बुद्धिमानों की संगति कर, तब तू भी बुद्धिमान हो जाएगा, परन्तु मूर्खों का साथी नाश हो जाएगा।
- Ecclesiastes 10:2–3 सभोपदेशक 10:2–3बुद्धिमान का मन उचित बात की ओर रहता है परन्तु मूर्ख का मन उसके विपरीत रहता है। वरन जब मूर्ख मार्ग पर चलता है, तब उसकी समझ काम नहीं देती, अैर वह सब से कहता है, मैं मूर्ख हूं।।
- 2 Chronicles 25:15–16 2 इतिहास 25:15–16तब यहोवा का क्रोध अमस्याह पर भड़क उठा और उस ने उसके पास एक नबी भेजा जिस ने उस से कहा, जो देवता अपने लोगों को तेरे हाथ से बचा न सके, उनकी खोज में तू क्यों लगा है? वह उस से कह ही रहा था कि उस ने उस से पूछा, क्या हम ने तुझे राजमन्त्री ठहरा दिया है? चुप रह! क्या तू मार खाना चाहता है? तब वह नबी यह कहकर चुप हो गया, कि मुझे मालूम है कि परमेश्वर ने तुझे नाश करने को ठाना है, क्योंकि तू ने ऐसा किया है और मेरी सम्मति नहीं मानी।
- Isaiah 30:1 यशायाह 30:1यहोवा की यह वाणी है, हाय उन बलवा करनेवाले लड़कों पर जो युक्ति तो करते परन्तु मेरी ओर से नहीं; वाचा तो बान्धते परन्तु मेरे आत्मा के सिखाये नहीं; और इस प्रकार पाप पर पाप बढ़ाते हैं।
- Proverbs 19:20 नीतिवचन 19:20सम्मति को सुन ले, और शिक्षा को ग्रहण कर, कि तू अन्तकाल में बुद्धिमान ठहरे।
- Proverbs 25:12 नीतिवचन 25:12जैसे सोने का नत्थ और कुन्दन का जेवन अच्छा लगता है, वैसे ही माननेवाले के कान में बुद्धिमान की डांट भी अच्छी लगती है।