1 Samuel · chapter 30 · verse 26
1 Samuel 30:26 in Hindi
सिकलग में पहुंचकर दाऊद ने यहूदी पुरनियों के पास जो उसके मित्रा थे लूट के माल में से कुछ कुछ भेजा, और यह कहलाया, कि यहोवा के शत्रुओं से ली हुई लूट में से तुम्हारे लिये यह भेंट है।
Sikalag mem pahunchakar daaood ne yahoodee puraniyom ke paas jo usake mitraa the loot ke maal mem se kuchh kuchh bhejaa, aur yah kahalaayaa, ki yahovaa ke shatruom se lee huee loot mem se tumhaare liye yah bhent hai.
1 Samuel 30:26 in English
- King James Version (KJV)
- And when David came to Ziklag, he sent of the spoil unto the elders of Judah, [even] to his friends, saying, Behold a present for you of the spoil of the enemies of the LORD;
- World English Bible (WEB)
- When David came to Ziklag, he sent some of the plunder to the elders of Judah, even to his friends, saying, “Behold, a present for you from the plunder of the LORD’s enemies.”
- American Standard Version (ASV)
- And when David came to Ziklag, he sent of the spoil unto the elders of Judah, even to his friends, saying, Behold, a present for you of the spoil of the enemies of Jehovah:
- Bible in Basic English (BBE)
- And when David came to Ziklag, he sent some of the goods to the responsible men of Judah, and to his friends, saying, Here is an offering for you from the goods of those who were fighting against the Lord;
- Darby Translation (DBY)
- And David came to Ziklag, and he sent of the spoil to the elders of Judah, to his friends, saying, Behold a present for you of the spoil of the enemies of Jehovah:
- Webster's Bible (WBS)
- And when David came to Ziklag, he sent of the spoil to the elders of Judah, [even] to his friends, saying, Behold a present for you, of the spoil of the enemies of the LORD;
- Young's Literal Translation (YLT)
- And David cometh in unto Ziklag, and sendeth of the spoil to the elders of Judah, to his friends, (saying, 'Lo, for you a blessing, of the spoil of the enemies of Jehovah),'
Read in context
- 24और इस विषय में तुम्हारी कौन सुनेगा? लड़ाई में जानेवाले का जैसा भाग हो, सामान के पास बैठे हए का भी वैसा ही भाग होगा; दोनों एक ही समान भाग पाएंगे।
- 25और दाऊद ने इस्राएलियों के लिये ऐसी ही विधि और नियम ठहराया, और वह उस दिन से लेकर आगे को वरन आज लों बना है।
- 26सिकलग में पहुंचकर दाऊद ने यहूदी पुरनियों के पास जो उसके मित्रा थे लूट के माल में से कुछ कुछ भेजा, और यह कहलाया, कि यहोवा के शत्रुओं से ली हुई लूट में से तुम्हारे लिये यह भेंट है।
- 27अर्थात्बेतेल के दक्खिन देश के रामोत,यत्तीर,
- 28अरोएर, सिपमोत, एश्तमो,
Cross references
- 1 Samuel 25:27 1 शमूएल 25:27और अब यह भेंट जो तेरी दासी अपने प्रभु के पास लाई है, उन जवानों को दी जाए जो मेरे प्रभु के साथ चालते हैं।
- Psalm 68:18 भजन संहिता 68:18तू ऊंचे पर चढ़ा, तू लोगों को बन्धुवाई में ले गया; तू ने मनुष्यों से, वरन हठीले मनुष्यों से भी भेंटें लीं, जिस से याह परमेश्वर उन में वास करे।।
- Psalm 35:27 भजन संहिता 35:27जो मेरे धर्म से प्रसन्न रहते हैं, वह जयजयकार और आनन्द करें, और निरन्तर करते रहें, यहोवा की बड़ाई हो, जो अपने दास के कुशल से प्रसन्न होता है!
- Isaiah 32:8 यशायाह 32:8परन्तु उदार मनुष्य उदारता ही की युक्तियां निकालता है, वह उदारता में स्थिर भी रहेगा।।
- 2 Corinthians 9:5 2 कुरिन्थियों 9:5इसलिये मैं ने भाइयों से यह बिनती करना अवश्य समझा कि वे पहिले से तुम्हारे पास जाएं, और तुम्हारी उदारता का फल जिस के विषय में पहिले से वचन दिया गया था, तैयार कर रखें, कि यह दबाव से नहीं परन्तु उदारता के फल की नाई तैयार हो।।
- Proverbs 18:16–24 नीतिवचन 18:16–24भेंट मनुष्य के लिये मार्ग खोल देती है, और उसे बड़े लोगों के साम्हने पहुंचाती है। मुक में में जो पहिले बोलता, वही धर्मी जान पड़ता है, परन्तु पीछे दूसरा पक्षवाला आका उसे खोज लेता है। चिट्ठी डालने से झगड़े बन्द होते हैं, और बलवन्तों की लड़ाई का अन्त होता है। चिढ़े हुए भाई को मनाना दृढ़ नगर के ले लेने से कठिन होता है, और झगड़े राजभवन के बेण्डों के समान हैं। मनुष्य का पेट मुंह की बातों के फल से भरता है; और बोलने से जो कुछ प्राप्त होता है उस से वह तृप्त होता है। जीभ के वश में मृत्यु और जीवन दोनों होते हैं, और जो उसे काम में लाना जानता है वह उसका फल भोगेगा। जिस ने स्त्री ब्याह ली, उस ने उत्तम पदार्थ पाया, और यहोवा का अनुग्रह उस पर हुआ है। निर्धन गिड़गिड़ाकर बोलता है। परन्तु धनी कड़ा उत्तर देता है। मित्रों के बढ़ाने से तो नाश होता है, परन्तु ऐसा मित्रा होता है, जो भाई से भी अधिक मिला रहता है।
- Genesis 33:11 उत्पत्ति 33:11सो यह भेंट, जो तुझे भेजी गई है, ग्रहण कर: क्योंकि परमेश्वर ने मुझ पर अनुग्रह किया है, और मेरे पास बहुत है।
- 1 Chronicles 12:1–15 1 इतिहास 12:1–15जब दाऊद सिकलग में कीश के पुत्रा शाऊल के डर के मारे छिपा रहता था, तब ये उसके पास वहां आए, और ये उन वीरों में से थे जो युठ्ठ में उसके सहायक थे। ये धनुर्धारी थे, जो दाहिने- बायें, दोनों हाथों से गोफन के पत्थर और धनुष के तीर चला सकते थे; और ये शाऊल के भाइयों में से बिन्यामीनी थे। मुख्य तो अहीएजेर और दूसरा योआश था जो गिबावासी शमाआ का पुत्रा था; फिर अजमावेत के पुत्रा यजीएल और पेलेत, फिर बराका और अनातोती येहू। और गिबोनी यिशमायाह जो तीसों में से एक वीर और उनके ऊपर भी था; फिर यिर्मयाह, यहजीएल, योहानान, गदेरावासी योजाबाद। एलूजै, यरीमोत, बाल्याह, शमर्याह, हारूपी शपत्याह। एल्काना, यिशिरयाह, अजरेल, योएजेर, याशोबाम, जो सब कोरहवंशी थे। और गदोरवासी यरोहाम के पुत्रा योएला और जबद्याह। फिर जब दाऊद जंबल के गढ़ में रहता था, तब ये गादी जो शूरवीर थे, और युठ्ठ विद्या सीखे हुए और ढाल और भाला काम में लानेवाले थे, और उनके मुह सिंह के से और वे पहाड़ी मृग के समान वेग से दौड़नेवाले थे, ये और गादियों से अलग होकर उसके पास आए। अर्थात् मुख्य तो एजेर, दूसरा ओबद्याह, तीसरा एलीआब। चौथा मिश्मन्ना, पांचपां यिर्मयाह। छठा अत्तै, सातवां एलीएल। आठवां योहानान, नौवां एलजाबाद। दसवां यिर्मयाह और ग्यारहवां मकबन्नै था। ये गादी मुख्य योठ्ठा थे, उन में से जो सब से छोटा था वह तो एक सौ के ऊपर, और जो सब से बड़ा था, वह हजार के ऊपर था। ये ही वे हैं, जो पहिले महीने में जब यरदन नदी सब कड़ाड़ों के ऊपर ऊपर बहती थी, तब उसके पार उतरे; और पूर्व और पश्चिम दानों ओर के सब तराई के रहनेवालों को भगा दिया।
- 2 Kings 5:15 2 राजा 5:15तब वह अपने सब दल बल समेत परमेश्वर के भक्त के यहां लौट आया, और उसके सम्मुख खड़ा होकर कहने लगा सुन, अब मैं ने जान लिया है, कि समस्त पृथ्वी में इस्राएल को छोड़ और कहीं परमेश्वर नहीं है। इसलिये अब अपने दास की भेंट ग्रहण कर।
Original words (Hebrew)
- David · H1732דָּוִד Dâvid
- came · H935בּוֹא bôwʼ
- Ziklag · H6860צִקְלַג Tsiqlag
- sent · H7971שָׁלַח shâlach
- spoil · H7998שָׁלָל shâlâl
- elders · H2205זָקֵן zâqên
- Judah · H3063יְהוּדָה Yᵉhûwdâh
- friends · H7453רֵעַ rêaʻ
- saying · H559אָמַר ʼâmar
- present · H1293בְּרָכָה Bᵉrâkâh
- spoil · H7998שָׁלָל shâlâl
- enemies · H341אֹיֵב ʼôyêb