2 Chronicles · chapter 36 · verse 21
2 Chronicles 36:21 in Hindi
यह सब इसलिये हुआ कि यहोवा का जो वचन यिर्मयाह के मुंह से निकला था, वह पूरा हो, कि देश अपने विश्राम कालों में मुख भोगता रहे। इसलिये जब तक वह सूना पड़ा रहा तब तक अर्थात् सत्तर वर्ष के पूरे होने तक उसको विश्राम मिला।
Yah sab isaliye huaa ki yahovaa kaa jo vachan yirmayaah ke munh se nikalaa thaa, vah pooraa ho, ki desh apane vishraam kaalom mem mukh bhogataa rahe. Isaliye jab tak vah soonaa padaa rahaa tab tak arthaat sattar varsh ke poore hone tak usako vishraam milaa.
2 Chronicles 36:21 in English
- King James Version (KJV)
- To fulfil the word of the LORD by the mouth of Jeremiah, until the land had enjoyed her sabbaths: [for] as long as she lay desolate she kept sabbath, to fulfil threescore and ten years.
- World English Bible (WEB)
- to fulfill the LORD’s word by Jeremiah’s mouth, until the land had enjoyed its Sabbaths. As long as it lay desolate, it kept Sabbath, to fulfill seventy years.
- American Standard Version (ASV)
- to fulfil the word of Jehovah by the mouth of Jeremiah, until the land had enjoyed its sabbaths: [for] as long as it lay desolate it kept sabbath, to fulfil threescore and ten years.
- Bible in Basic English (BBE)
- So that the words of the Lord, which he said by the mouth of Jeremiah, might come true, till the land had had pleasure in her Sabbaths; for as long as she was waste the land kept the Sabbath, till seventy years were complete.
- Darby Translation (DBY)
- to fulfil the word of Jehovah by the mouth of Jeremiah, until the land had enjoyed its sabbaths. All the days of its desolation it kept sabbath, to fulfil seventy years.
- Webster's Bible (WBS)
- To fulfill the word of the LORD by the mouth of Jeremiah, until the land had enjoyed her sabbaths: [for] as long as she lay desolate she kept sabbath, to fulfill seventy years.
- Young's Literal Translation (YLT)
- to fulfil the word of Jehovah in the mouth of Jeremiah, till the land hath enjoyed its sabbaths; all the days of the desolation it kept sabbath — to the fulness of seventy years.
Read in context
- 19और कसदियो ने परमेश्वर का भवन फूंक दिया, और यरूशलेम की शहरपनाह को तोड़ ड़ाला, और आग लगा कर उसके सब भवनों को जलाया, और उस में का सारा बहुमूल्य सामान नष्ट कर दिया।
- 20और जो तलवार से बच गए, उन्हें वह बाबेल को ले गया, और फारस के राज्य के प्रबल होने तक वे उसके और उसके बेटों- पोतों के आधीन रहे।
- 21यह सब इसलिये हुआ कि यहोवा का जो वचन यिर्मयाह के मुंह से निकला था, वह पूरा हो, कि देश अपने विश्राम कालों में मुख भोगता रहे। इसलिये जब तक वह सूना पड़ा रहा तब तक अर्थात् सत्तर वर्ष के पूरे होने तक उसको विश्राम मिला।
- 22फारस के राजा कूस्रू के पहिले वर्ष में यहोवा ने उसके मन को उभारा कि जो वचन यिर्मयाह के मुंह से निकला था, वह पूरा हो। इसलिये उस ने अपने समस्त राज्य में यह प्रचार करवाया, और इस आशय की चिटि्ठयां लिखवाई,
- 23कि फारस का राजा कू्रस्रू कहता है, कि स्वर्ग के परमेश्वर यहोवा ने पृथ्वी भर का राज्य मुझे दिया है, और उसी ने मुझे आज्ञा दी है कि यरूशलेम जो यहूदा में है उस में मेरा एक भवन बनवा; इसलिये हे उसकी प्रजा के सब लोगो, तुम में से जो कोई चाहे कि उसका परमेश्वर यहोवा उसके साथ रहे, तो वह वहां रवाना हो जाए।
Cross references
- Jeremiah 29:10 यिर्मयाह 29:10यहोवा यों कहता है कि वाबुल के सत्तर वर्ष पूरे होने पर मैं तुम्हारी सुधि लूंगा, और अपना यह मनभवना वचन कि मैं तुम्हें इस स्थान में लौटा ले आऊंगा, पूरा करूंगा।
- Leviticus 26:34–35 लैव्यव्यवस्था 26:34–35तब जितने दिन वह देश सूना पड़ा रहेगा और तुम अपने शत्रुओं के देश में रहोगे उतने दिन वह अपने विश्रामकालों को मानता रहेगा। और जितने दिन वह सूना पड़ा रहेगा उतने दिन उसको विश्राम रहेगा, अर्थात् जो विश्राम उसको तुम्हारे वहां बसे रहने के समय तुम्हारे विश्रामकालों में न मिला होगा वह उसको तब मिलेगा।
- Daniel 9:2 दानिय्येल 9:2उसके राज्य के पहिले वर्ष में, मुझ दानिरयेल ने शास्त्रा के द्वारा समझ लिया कि यरूशलेम की उजड़ी हुई दशा यहोवा के उस वचन के अनुसार, जो यिर्मयाह नबी के पास पहुंचा था, कुछ वर्षों के बीतने पर अर्थात् सत्तर वर्ष के बाद पूरी हो जाएगी।
- Jeremiah 25:11–12 यिर्मयाह 25:11–12सारी जातियों का यह देश उजाड़ ही उजाड़ होगा, और ये सब जातियां सत्तर वर्ष तक बाबुल के राजा के आधीन रहेंगी। जब सत्तर वर्ष बीत चुकें, तब मैं बाबुल के राजा और उस जाति के लोगों और कसदियों के देश के सब निवासियों को अर्ध्म का दण्ड दूंगा, यहोवा की यह वाणी है; और उस देश को सदा के लिये उजाड़ दूंगा।
- Zechariah 1:12 जकर्याह 1:12तब यहोवा के दूत ने कहा, हे सेनाओं के यहोवा, तू जो यरूशलेम और यहूदा के नगरों पर सत्तर वर्ष से क्रोधित है, सो तू उन पर कब तक दया न करेगा?
- Leviticus 26:43 लैव्यव्यवस्था 26:43और वह देश उन से रहित होकर सूना पड़ा रहेगा, और उनके बिना सूना रहकर भी अपने विश्रामकालों को मानता रहेगा; और वे लोग अपने अधर्म के दण्ड को अंगीकार करेगें, इसी कारण से कि उन्हों ने मेरी आज्ञाओं का उलंघन किया था, और उनकी आत्माओं को मेरी विधियों से घृणा थी।
- Leviticus 25:4–6 लैव्यव्यवस्था 25:4–6परन्तु सातवें वर्ष भूमि को यहोवा के लिये परमविश्रामकाल मिला करे; उस में न तो अपना खेत बोना और न अपनी दाख की बारी छांटना। जो कुछ काटे हुए खेत में अपने आप से उगे उसे न काटना, और अपनी बिन छांटी हुई दाखलता की दाखों को न तोड़ना; क्योंकि वह भूमि के लिये परमविश्राम का वर्ष होगा। और भूमि के विश्रामकाल ही की उपज से तुम को, और तुम्हारे दास- दासी को, और तुम्हारे साथ रहनेवाले मजदूरों और परदेशियों को भी भोजन मिलेगा;
- Jeremiah 26:6–7 यिर्मयाह 26:6–7तो मैं इस भवन को शीलो के समान उजाड़ दूंगा, और इस नगर का ऐसा सत्यानाश कर दूंगा कि पृथ्वी की सारी जातियों के लोग उसकी उपमा दे देकर शाप दिया करेंगे। जब यिर्मयाह ये वचन यहोवा के भवन में कह रहा था, तब याजक और भविष्यद्वक्ता और सब साधारण लोग सुन रहे थे।
- Jeremiah 25:9 यिर्मयाह 25:9जसलिये सुनो, मैं उत्तर में रहनेवाले सब कुलों को बुलाऊंगा, और अपने दास बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर को बुलवा भेजूंगा; और उन सभों को इस देश और इसके निवासियों के विरूद्ध और इसके आस पास की सब जातियों के विरूद्ध भी ले आऊंगा; और इन सब देशों का मैं सत्यानाश करके उन्हें ऐसा उजाड़ दूंगा कि लोग इन्हें देखकर ताली बजाएंगे; वरन ये सदा उजड़े ही रहेंगे, यहोवा की यही वाणी है।
- Jeremiah 27:12–13 यिर्मयाह 27:12–13और यहूदा के राजा सिदकिरयाह से भी मैं ने ये बातें कहीं, अपनी प्रजा समेत तू बाबुल के राजा का जूआ अपनी गर्दन पर ले, और उसके और उसकी प्रजा के आधीन रहकर जीवित रह। जब यहोवा ने उस जाति के विषय जो बाबुल के राजा के आधीन न हो, यह कहा है कि वह तलवार, महंगी और मरी से नाश होगी; तो फिर तू क्यों अपनी प्रजा समेत मरना चाहता है?
- Zechariah 1:4–6 जकर्याह 1:4–6अपने पुरखाओं के समान न बनो, उन से तो अगले भविष्यद्वक्ता यह पुकार पुकारकर कहते थे कि सेनाओं का यहोवा यों कहता है, अपने बुरे मार्गों से, और अपने बुरे कामों से फिरो; परन्तु उन्हों ने न तो सुना, और न मेरी ओर ध्यान दिया, यहोवा की यही वाणी है। तुम्हारे पुरखा कहां रहे? और भविष्यद्वक्ता क्या सदा जीवित रहते हैं? परन्तु मेरे वचन और मेरी आज्ञाएं जिन को मैं ने अपने दास नबियों को दिया था, क्या वे तुम्हारे पुरखाओं पर पूरी न हुई? तब उन्हों ने मन फिराया और कहा, सेनाओं के यहोवा ने हमारे चालचलन और कामों के अनुसार हम से जैसा व्यवहार करने को कहा था, वैसा ही उस ने हम को बदला दिया है।।
Original words (Hebrew)
- fulfil · H4390מָלֵא mâlêʼ
- word · H1697דָּבָר dâbâr
- mouth · H6310פֶּה peh
- Jeremiah · H3414יִרְמְיָה Yirmᵉyâh
- land · H776אֶרֶץ ʼerets
- enjoyed · H7521רָצָה râtsâh
- sabbaths · H7676שַׁבָּת shabbâth
- as · H3117יוֹם yôwm
- desolate · H8074שָׁמֵם shâmêm
- sabbath · H7673שָׁבַת shâbath
- fulfil · H4390מָלֵא mâlêʼ
- ten · H7657שִׁבְעִים shibʻîym
- years · H8141שָׁנֶה shâneh