Ecclesiastes · chapter 2 · verse 23
Ecclesiastes 2:23 in Hindi
उसके सब दिन तो दु:खों से भरे रहते हैं, और उसका काम खेद के साथ होता है; रात को भी उसका मन चैन नहीं पाता। यह भी व्यर्थ ही है।
Usake sab din to du:khom se bhare rahate haim, aur usakaa kaam khed ke saath hotaa hai; raat ko bhee usakaa man chain naheem paataa. Yah bhee vyarth hee hai.
Ecclesiastes 2:23 in English
- King James Version (KJV)
- For all his days [are] sorrows, and his travail grief; yea, his heart taketh not rest in the night. This is also vanity.
- World English Bible (WEB)
- For all his days are sorrows, and his travail is grief; yes, even in the night his heart takes no rest. This also is vanity.
- American Standard Version (ASV)
- For all his days are [but] sorrows, and his travail is grief; yea, even in the night his heart taketh no rest. This also is vanity.
- Bible in Basic English (BBE)
- All his days are sorrow, and his work is full of grief. Even in the night his heart has no rest. This again is to no purpose.
- Darby Translation (DBY)
- For all his days are sorrows, and his travail vexation: even in the night his heart taketh no rest. This also is vanity.
- Webster's Bible (WBS)
- For all his days [are] sorrows, and his labor grief; yes, his heart taketh not rest in the night. This is also vanity.
- Young's Literal Translation (YLT)
- For all his days are sorrows, and his travail sadness; even at night his heart hath not lain down; this also [is] vanity.
Read in context
- 21क्योंकि ऐसा मनुष्य भी है, जिसका कार्य परिश्रम और बुद्धि और ज्ञान से होता है और सफल भी होता है, तौभी उसको ऐसे मनुष्य के लिये छोड़ जाना पड़ता है, जिस ने उस में कुछ भी परिश्रम न किया हो। यह भी व्यर्थ और बहुत ही बुरा है।
- 22मनुष्य जो धरती पर मन लगा लगाकर परिश्रम करता है उस से उसको क्या लाभ होता है?
- 23उसके सब दिन तो दु:खों से भरे रहते हैं, और उसका काम खेद के साथ होता है; रात को भी उसका मन चैन नहीं पाता। यह भी व्यर्थ ही है।
- 24मनुष्य के लिये खाने- पीने और परिश्रम करते हुए अपने जीव को सुखी रखने के सिवाय और कुछ भी अच्छा नहीं। मैं ने देखा कि यह भी परमेश्वर की ओर से मिलता है।
- 25क्योंकि खाने- पीने और सुख भोगने में मुझ से अधिक समर्थ कौन है?
Cross references
- Job 14:1 अय्यूब 14:1मनुष्य जो स्त्री से उत्मन्न होता है, वह थेड़े दिनों का और दुख से भरा रहता है।
- Job 5:7 अय्यूब 5:7परन्तु जैसे चिंगारियां ऊपर ही ऊपर को उड़ जाती हैं,वैसे ही मनुष्य कष्ट ही भोगने के लिये उत्पन्न हुआ है।
- Psalm 6:6–7 भजन संहिता 6:6–7मैं कराहते कराहते थक गया; मैं अपनी खाट आंसुओं से भिगोता हूं; प्रति रात मेरा बिछौना भीगता है। मेरी आंखें शोक से बैठी जाती हैं, और मेरे सब सतानेवालों के कारण वे धुन्धला गई हैं।।
- Job 7:13–14 अय्यूब 7:13–14जब जब मैं सोचता हूं कि मुझे खाट पर शान्ति मिलेगी, और बिछौने पर मेरा खेद कुछ हलका होगा; तब तब तू मुझे स्वप्नों से घबरा देता, और दर्शनों से भयभीत कर देता है;
- Psalm 127:2 भजन संहिता 127:2तुम जो सवेरे उठते और देर करके विश्राम करते और दु:ख भरी रोटी खाते हो, यह सब तुम्हारे लिये व्यर्थ ही है; क्योंकि वह अपने प्रियों को योंही नींद दान करता है।।
- Psalm 90:7–10 भजन संहिता 90:7–10क्योंकि हम तेरे क्रोध से नाश हुए हैं; और तेरी जलजलाहट से घबरा गए हैं। तू ने हमारे अधर्म के कामों से अपने सम्मुख, और हमारे छिपे हुए पापों को अपने मुख की ज्योति में रखा है।। क्योंकि हमारे सब दिन तेरे क्रोध में बीत जाते हैं, हम अपने वर्ष शब्द की नाई बिताते हैं। हमारी आयु के वर्ष सत्तर तो होते हैं, और चाहे बल के कारण अस्सी वर्ष के भी हो जाएं, तौभी उनका घमण्ड केवल नष्ट और शोक ही शोक है; क्योंकि वह जल्दी कट जाती है, और हम जाते रहते हैं।
- Ecclesiastes 5:12 सभोपदेशक 5:12परिश्रम करनेवाला चाहे थोड़ा खाए, या बहुत, तौभी उसकी नींद सुखदाई होती है; परन्तु धनी के धन के बढ़ने के कारण उसको नींद नहीं आती।
- Ecclesiastes 1:18 सभोपदेशक 1:18क्योंकि बहुत बुद्धि के साथ बहुत खेद भी होता है, और जो अपना ज्ञान बढ़ाता है वह अपना दु:ख भी बढ़ाता है।।
- Acts 14:22 प्रेरितों के काम 14:22और चेलों के मन को स्थिर करते रहे और यह उपदेश देते थे, कि हमें बड़े क्लेश उठाकर परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करना होगा।
- Genesis 47:9 उत्पत्ति 47:9याकूब ने फिरौन से कहा, मैं तो एक सौ तीस वर्ष परदेशी होकर अपना जीवन बीता चुका हूं; मेरे जीवन के दिन थोड़े और दु:ख से भरे हुए भी थे, और मेरे बापदादे परदेशी होकर जितने दिन तक जीवित रहे उतने दिन का मैं अभी नहीं हुआ।
- Esther 6:1 एस्तेर 6:1उस रात राजा को नींद नहीं आई, इसलिये उसकी आज्ञा से इतिहास की पुस्तक लाई गई, और पढ़कर राजा को सुनाई गई।
- Psalm 77:2–4 भजन संहिता 77:2–4संकट के दिन मैं प्रभु की खोज में लगा रहा; रात को मेरा हाथ फैला रहा, और ढीला न हुआ, मुझ में शांति आई ही नहीं। मैं परमेश्वर का स्मरण कर करके कहरता हूं; मैं चिन्ता करते करते मूर्छित हो चला हूं। (सेला) तू मुझे झपकी लगने नहीं देता; मैं ऐसा घबराया हूं कि मेरे मुंह से बात नहीं निकलती।।