Genesis · chapter 47 · verse 13
Genesis 47:13 in Hindi
और उस सारे देश में खाने को कुछ न रहा; क्योंकि अकाल बहुत भारी था, और अकाल के कारण मि और कनान दोनों देश नाश हो गए।
Aur us saare desh mem khaane ko kuchh na rahaa; kyonki akaal bahut bhaaree thaa, aur akaal ke kaaran mi aur kanaan donom desh naash ho gae.
Genesis 47:13 in English
- King James Version (KJV)
- And [there was] no bread in all the land; for the famine [was] very sore, so that the land of Egypt and [all] the land of Canaan fainted by reason of the famine.
- World English Bible (WEB)
- There was no bread in all the land; for the famine was very severe, so that the land of Egypt and the land of Canaan fainted by reason of the famine.
- American Standard Version (ASV)
- And there was no bread in all the land; for the famine was very sore, so that the land of Egypt and the land of Canaan fainted by reason of the famine.
- Bible in Basic English (BBE)
- Now there was no food to be had in all the land, so that all Egypt and Canaan were wasted from need of food.
- Darby Translation (DBY)
- And there was no bread in all the land; for the famine was very grievous; and the land of Egypt and the land of Canaan were exhausted through the famine.
- Webster's Bible (WBS)
- And [there was] no bread in all the land; for the famine [was] very distressing, so that the land of Egypt, and [all] the land of Canaan, fainted by reason of the famine.
- Young's Literal Translation (YLT)
- And there is no bread in all the land, for the famine [is] very grievous, and the land of Egypt and the land of Canaan are feeble because of the famine;
Read in context
- 11तब यूसुफ ने अपने पिता और भाइयों को बसा दिया, और फिरौन की आज्ञा के अनुसार मि देश के अच्छे से अच्छे भाग में, अर्थात् रामसेस नाम देश में, भूमि देकर उनको सौंप दिया।
- 12और यूसुफ अपने पिता का, और अपने भाइयों का, और पिता के सारे घराने का, एक एक के बालबच्चों के घराने की गिनती के अनुसार, भोजन दिला दिलाकर उनका पालन पोषण करने लगा।।
- 13और उस सारे देश में खाने को कुछ न रहा; क्योंकि अकाल बहुत भारी था, और अकाल के कारण मि और कनान दोनों देश नाश हो गए।
- 14और जितना रूपया मि और कनान देश में था, सब को यूसुफ ने उस अन्न की सन्ती जो उनके निवासी मोल लेते थे इकट्ठा करके फिरौन के भवन में पहुंचा दिया।
- 15जब मि और कनान देश का रूपया चुक गया, तब सब मिद्दी यूसुफ के पास आ आकर कहने लगे, हम को भोजनवस्तु दे, क्या हम रूपये के न रहने से तेरे रहते हुए मर जाएं?
Cross references
- Acts 7:11 प्रेरितों के काम 7:11तब मिसर और कनान के सारे देश में अकाल पडा; जिस से भारी क्लेश हुआ, और हमारे बाप दादों को अन्न नहीं मिलता था।
- Jeremiah 9:12 यिर्मयाह 9:12जो बुध्दिमान मुरूष हो वह इसका भेद समझ ले, और जिस ने यहोवा के मुख से इसका कारण सुना हो वह बता दे। देश का नाश क्यों हुआ? क्यों वह जंगल की नाई ऐसा जल गया कि उस में से होकर कोई नहीं चलता?
- Lamentations 2:19–20 विलापगीत 2:19–20रात के हर पहर के आरम्भ में उठकर चिल्लाया कर! प्रभु के सम्मुख अपने मन की बातों को घारा की नाई उण्डेल! तेरे बालबच्चे जो हर एक सड़क के सिरे पर भूख के कारण मूर्च्छित हो रहे हैं, उनके प्राण के निमित्त अपने हाथ उसकी ओर फैला। हे यहोवा दृष्टि कर, और ध्यान से देख कि तू ने यह सब दु:ख किस को दिया है? क्या स्त्रियां अपना फल अर्थात् अपनी गोद के बच्चों को खा डालें? हे प्रभु, क्या याजक और भविष्यद्वक्ता तेरे पवित्रास्थान में घात किए जएं?
- Genesis 41:30–31 उत्पत्ति 41:30–31उनके पश्चात् सात वर्ष अकाल के आयेंगे, और सारे मि देश में लोग इस सारी उपज को भूल जायेंगे; और अकाल से देश का नाश होगा। और सुकाल (बहुतायत की उपज) देश में फिर स्मरण न रहेगा क्योंकि अकाल अत्यन्त भयंकर होगा।
- 1 Kings 18:5 1 राजा 18:5और अहाब ने ओबद्याह से कहा, कि देश में जल के सब सोतों और सब नदियों के पास जा, कदाचित इतनी घास मिले कि हम घेड़ों और खच्चरों को जीवित बचा सकें,
- Jeremiah 14:1–6 यिर्मयाह 14:1–6यहोवा का वचन जो यिर्मयाह के पास सूखे वर्ष के विषय में पहुंचो यहूदा विलाप करता और फाटकों में लोग शोक का पहिरावा पहिने हुए भूमि पर उदास बैठे हैं; और यरूशलेम की चिल्लाहट आकाश तक पहुंच गई है। और उनके बड़े लोग उनके छोटे लोगों को पानी के लिये भेजते हैं; वे गड़हों पर आकर पानी नहीं पाते इसलिये छूछे बर्तन लिए हुए घर लौट जाते हैं; वे लज्जित और निराश होकर सिर ढांप लेते हैं। देश में पानी न बरसने से भूमि में दरार पड़ गए हैं, इस कारण किसान लोग निराश होकर सिर ढांप लेते हैं। हरिणी भी मैदान में बच्चा जनकर छोड़ जाती है क्योंकि हरी घास नहीं मिलती। जंगली गदहे भी मुंडे टीलों पर खड़े हुए गीदड़ों की नाई हांफते हैं; उनकी आंखें धुंधला जाती हैं क्योंकि हरियाली कुछ भी नहीं है।
- Joel 1:10–12 योएल 1:10–12खेती मारी गई, भूमि विलाप करती है; क्योंकि अन्न नाश हो गया, नया दाखमधु सूख गया, तेल भी सूख गया है।। हे किसानो, लज्जित हो, हे दाख की बारी के मालियों, गेहूं और जव के लिये हाय, हाय करो; क्योंकि खेती मारी गई है। दाखलता सूख गई, और अंजीर का वृक्ष कुम्हला गया है। अनार, ताड़, सेव, वरन मैदान के सब वृक्ष सूख गए हैं; और मनुष्यों का हर्ष जाता रहा है।।
- Lamentations 4:9 विलापगीत 4:9तलवार के मारे हुए भूख के मारे हुओं से अधिक अच्छे थे जिनका प्राण खेत की उपज बिना भूख के मारे सूखता जाता हे।
Original words (Hebrew)
- bread · H3899לֶחֶם lechem
- land · H776אֶרֶץ ʼerets
- famine · H7458רָעָב râʻâb
- very · H3966מְאֹד mᵉʼôd
- sore · H3515כָּבֵד kâbêd
- land · H776אֶרֶץ ʼerets
- Egypt · H4714מִצְרַיִם Mitsrayim
- land · H776אֶרֶץ ʼerets
- Canaan · H3667כְּנַעַן Kᵉnaʻan
- fainted · H3856לָהַהּ lâhahh
- reason · H6440פָּנִים pânîym
- famine · H7458רָעָב râʻâb