Habakkuk · chapter 3 · verse 6
Habakkuk 3:6 in Hindi
वह खड़ा होकर पृथ्वी को नाप रहा था; उस ने देखा और जाति जाति के लोग घबरा गए; तब सनातन पर्वत चकनाचूर हो गए, और सनातन की पहाड़ियां झुक गई उसकी गति अनन्त काल से एक सी है।
Vah khadaa hokar pruthvee ko naap rahaa thaa; us ne dekhaa aur jaati jaati ke log ghabaraa gae; tab sanaatan parvat chakanaachoor ho gae, aur sanaatan kee pahaadiyaam jhuk gaee usakee gati anant kaal se ek see hai.
Habakkuk 3:6 in English
- King James Version (KJV)
- He stood, and measured the earth: he beheld, and drove asunder the nations; and the everlasting mountains were scattered, the perpetual hills did bow: his ways [are] everlasting.
- World English Bible (WEB)
- He stood, and shook the earth. He looked, and made the nations tremble. The ancient mountains were crumbled. The age-old hills collapsed. His ways are eternal.
- American Standard Version (ASV)
- He stood, and measured the earth; He beheld, and drove asunder the nations; And the eternal mountains were scattered; The everlasting hills did bow; His goings were [as] of old.
- Bible in Basic English (BBE)
- From his high place he sent shaking on the earth; he saw and nations were suddenly moved: and the eternal mountains were broken, the unchanging hills were bent down; his ways are eternal.
- Darby Translation (DBY)
- He stood, and measured the earth; He beheld, and discomfited the nations; And the eternal mountains were scattered, The everlasting hills gave way: His ways are everlasting.
- Webster's Bible (WBS)
- He stood, and measured the earth: he beheld, and drove asunder the nations; and the everlasting mountains were scattered, the perpetual hills did bow: his ways [are] everlasting.
- Young's Literal Translation (YLT)
- He hath stood, and He measureth earth, He hath seen, and He shaketh off nations, And scatter themselves do mountains of antiquity, Bowed have the hills of old, The ways of old [are] His.
Read in context
- 4उसकी ज्योति सूर्य के तुल्य थी, उसके हाथ से किरणे निकल रही थीं; और इन में उसका सामर्थ छिपा हुआ था।
- 5उसके आगे आगे मरी फैलती गई, और उसके पांवों से महाज्वर निकलता गया।
- 6वह खड़ा होकर पृथ्वी को नाप रहा था; उस ने देखा और जाति जाति के लोग घबरा गए; तब सनातन पर्वत चकनाचूर हो गए, और सनातन की पहाड़ियां झुक गई उसकी गति अनन्त काल से एक सी है।
- 7मुझे कूशान के तम्बू में रहनेवाले दु:ख से दबे दिखाई पड़े; और मिद्यान देश के डेरे डगमगा गए।
- 8हे यहोवा, क्या तू नदियों पर रिसियाया था? क्या तेरा क्रोध नदियों पर भड़का था, अथवा क्या तेरी जलजलाहट समुद्र पर भड़की थी, जब तू अपने घोड़ों पर और उद्धार करनेवाले विजयी रथों पर चढ़कर आ रहा था?
Cross references
- Genesis 49:26 उत्पत्ति 49:26तेरे पिता के आशीर्वाद मेरे पितरों के आशीर्वाद से अधिक बढ़ गए हैं और सनातन पहाड़ियों की मन- चाही वस्तुओं की नाई बने रहेंगे: वे यूसुफ के सिर पर, जो अपने भाइयों में से न्यारा हुआ, उसी के सिर के मुकुट पर फूले फलेंगे।।
- Nahum 1:5 नहूम 1:5उसके स्पर्श से पहाड़ कांप उठते हैं और पहाड़ियां गल जाती हैं; उसके प्रताप से पृथ्वी वरन सारा संसार अपने सब रहनेवालों समेत थरथरा उठता है।।
- Deuteronomy 33:15 व्यवस्थाविवरण 33:15और प्राचीन पहाड़ों के उत्तम पदार्थ, और सनातन पहाड़ियों के अनमोल पदार्थ,
- Zechariah 14:4–5 जकर्याह 14:4–5और उस समय वह जलपाई के पर्वत पर पांव धरेगा, जो पूरब ओर यरूशलेम के साम्हने है; तब जलपाई का पर्वत पूरब से लेकर पच्छिम तक बीचोबीच से फटकर बहुत बड़ा खड्ड हो जाएगा; तब आधा पर्वत उत्तर की ओर और आधा दक्खिन की ओर हट जाएगा। तब तुम मेरे बनाए हुए उस खड्ड आसेल तक पहुंचेगा, वरन तुम ऐसे भागोगे जैसे उस भुईडौल के डर से भागे थे जो यहूदा के राजा उज्जियाह के दिनों में हुआ था। तब मेरा परमेश्वर यहोवा आएगा, और सब पवित्रा लोग उसके साथ होंगे।।
- Isaiah 64:1–3 यशायाह 64:1–3भला हो कि तू आकाश को फाड़कर उतर आए और पहाड़ तेरे साम्हने कांप उठे। जैसे आग झाड़- झंखाड़ को जला देती वा जल को उबालती है, उसी रीति से तू अपने शत्रुओं पर अपना नाम ऐसा प्रगट कर कि जाति जाति के लोग तेरे प्रताप से कांप उठें! जब तू ने ऐसे भयानक काम किए जो हमारी आशा से भी बढ़कर थे, तब तू उतर आया, पहाड़ तेरे प्रताप से कांप उठे।
- Isaiah 51:6 यशायाह 51:6आकाश की ओर अपनी आंखें उठाओ, और पृथ्वी को निहारो; क्योंकि आकाश धुंए ही नाई लोप हो जाएगा, पृथ्वी कपड़े के समान पुरानी हो जाएगी, और उसके रहनेवाले यों ही जाते रहेंगे; परन्तु जो उद्धार मैं करूंगा वह सर्वदा ठहरेगा, और मेरे धर्म का अन्त न होगा।।
- Joshua 11:18–23 यहोशू 11:18–23उन सब राजाओं से युद्ध करते करते यहोशू को बहुत दिन लग गए। गिबोन के निवासी हिव्वियों को छोड़ और किसी नगर के लोगों ने इस्राएलियों से मेल न किया; और सब नगरों को उन्हों ने लड़ लड़कर जीत लिया। क्योंकि यहोवा की जो मनसा थी, कि अपनी उस आज्ञा के अनुसार जो उस ने मूसा को दी थी उन पर कुछ भी दया न करे; वरन सत्यानाश कर डाले, इस कारण उस ने उनके मन ऐसे कठोर कर दिए, कि उन्हों ने इस्राएलियों का साम्हना करके उन से युद्ध किया।। उस समय यहोशू ने पहाड़ी देश में आकर हेब्रोन, दबीर, अनाब, वरन यहूदा और इस्राएल दोनों के सारे पहाड़ी देश में रहनेवाले अनाकियों को नाश किया; यहोशू ने नगरों समेत उन्हें सत्यानाश कर डाला। इस्राएलियों के देश में कोई अनाकी न रह गया; केवल अज्जा, गत, और अशदोद में कोई कोई रह गए। जैसा यहोवा ने मूसा से कहा था, वैसा ही यहोशू ने वह सारा देश ले लिया; और उसे इस्राएल के गोत्रों और कुलों के अनुसार बांट करके उन्हें दे दिया। और देश को लड़ाई से शान्ति मिली।।
- Micah 5:8 मीका 5:8और याकूब के बचे हुए लोग जातियों में और देश देश के लोगों के बीच ऐसे होंगे जैसे वनपशुओं में सिंह, वा भेड़- बकरियों के झुण्डों में जवान सिंह होता है, क्योंकि जब वह उनके बीच में से जाए, तो लताड़ता और फाड़ता जाएगा, और कोई बचा न सकेगा।
- Psalm 114:4–7 भजन संहिता 114:4–7पहाड़ मेढ़ों की नाईं उछलने लगे, और पहाड़ियां भेड़- बकरियों के बच्चों की नाईं उछलने लगीं।। हे समुद्र, तुझे क्या हुआ, कि तू भागा? और हे यर्दन तुझे क्या हुआ, कि तू उलठी बही? हे पहाड़ों तुम्हें क्या हुआ, कि तुम भेड़ों की नाईं, और हे पहाड़ियों तुम्हें क्या हुआ, कि तुम भेड़- बकरियों के बच्चों की नाईं उछलीं? हे पृथ्वी प्रभु के साम्हने, हां याकूब के परमेश्वर के साम्हने थरथरा।
- Isaiah 51:8 यशायाह 51:8क्योंकि धुन उन्हें कपड़े की नाईं और कीड़ा उन्हें ऊन की नाईं खाएगा; परन्तु मेरा धर्म अनन्तकाल तक, और मेरा उद्धार पीढ़ी से पीढ़ी तक बना रहेगा।
- Psalm 68:16 भजन संहिता 68:16परन्तु हे शिखरवाले पहाड़ों, तुम क्यों उस पर्वत को घूरते हो, जिसे परमेश्वर ने अपने वास के लिये चाहा है, और जहां यहोवा सदा वास किए रहेगा?
- Habakkuk 3:10 हबक्कूक 3:10पहाड़ तुझे देखकर कांप उठे; आंधी और जलप्रलय निकल गए; गहिरा सागर बोल उठा और अपने हाथों अर्थात् लहरों को ऊपर उठाया।
Original words (Hebrew)
- stood · H5975עָמַד ʻâmad
- measured · H4128מוּד mûwd
- earth · H776אֶרֶץ ʼerets
- beheld · H7200רָאָה râʼâh
- asunder · H5425נָתַר nâthar
- nations · H1471גּוֹי gôwy
- everlasting · H5703עַד ʻad
- mountains · H2042הָרָר hârâr
- scattered · H6327פּוּץ pûwts
- perpetual · H5769עוֹלָם ʻôwlâm
- hills · H1389גִּבְעָה gibʻâh
- bow · H7817שָׁחַח shâchach
- ways · H1979הֲלִיכָה hălîykâh
- everlasting · H5769עוֹלָם ʻôwlâm