Nahum · chapter 1 · verse 5
Nahum 1:5 in Hindi
उसके स्पर्श से पहाड़ कांप उठते हैं और पहाड़ियां गल जाती हैं; उसके प्रताप से पृथ्वी वरन सारा संसार अपने सब रहनेवालों समेत थरथरा उठता है।।
Usake sparsh se pahaad kaamp uthate haim aur pahaadiyaam gal jaatee haim; usake prataap se pruthvee varan saaraa sansaar apane sab rahanevaalom samet tharatharaa uthataa hai..
Nahum 1:5 in English
- King James Version (KJV)
- The mountains quake at him, and the hills melt, and the earth is burned at his presence, yea, the world, and all that dwell therein.
- World English Bible (WEB)
- The mountains quake before him, and the hills melt away. The earth trembles at his presence, yes, the world, and all who dwell in it.
- American Standard Version (ASV)
- The mountains quake at him, and the hills melt; and the earth is upheaved at his presence, yea, the world, and all that dwell therein.
- Bible in Basic English (BBE)
- The mountains are shaking because of him, and the hills flowing away; the earth is falling to bits before him, the world and all who are in it.
- Darby Translation (DBY)
- The mountains quake before him, and the hills melt, and the earth is upheaved at his presence, and the world, and all that dwell therein.
- Webster's Bible (WBS)
- The mountains quake at him, and the hills melt, and the earth is burned at his presence, even the world, and all that dwell therein.
- Young's Literal Translation (YLT)
- Mountains have shaken because of Him, And the hills have been melted; And lifted up [is] the earth at His presence, And the world and all dwelling in it.
Read in context
- 3यहोवा विलम्ब से क्रोध करनेवाला और बड़ा शक्तिमान है; वह दोषी को किसी प्रकार निर्दोष न ठहराएगा।। यहोवा बवंडर और आंधी में होकर चलता है, और बादल उसके पांवों की धूलि है।
- 4उसके घुड़कने से महानद सूख जाते हैं, और समुद्र भी निर्जल हो जाता है; बाशान और कर्म्मैल कुम्हलाते और लबानोन की हरियाली जाती रहती है।
- 5उसके स्पर्श से पहाड़ कांप उठते हैं और पहाड़ियां गल जाती हैं; उसके प्रताप से पृथ्वी वरन सारा संसार अपने सब रहनेवालों समेत थरथरा उठता है।।
- 6उसके क्रोध का साम्हना कौन कर सकता है? और जब उसका क्रोध भड़कता है, तब कौन ठहर सकता है? उसकी जलजलाहट आग की नाईं भड़क जाती है, और चट्टानें उसकी शक्ति से फट फटकर गिरती हैं।
- 7यहोवा भला है; संकट के दिन में वह दृढ़ गढ़ ठहरता है, और अपने शरणागतों की सुधी रखता है।
Cross references
- Micah 1:4 मीका 1:4और पहाड़ उसके नीचे गल जाएंगे, और तराई ऐसे फटेंगी, जैसे मोम आग की आंच से, और पानी जो घाट से नीचे बहता है।
- Jeremiah 4:24 यिर्मयाह 4:24मैं ने पहाड़ों को देखा, मे हिल रहे थे, और सब पहाड़ियों को कि वे डोल रही थीं।
- 2 Samuel 22:8 2 शमूएल 22:8तब पृथ्वी हिल गई और डोल उठी; और आकाश की नेवें कांपकर बहुत ही हिल गई, क्योंकि वह अति क्रोधित हुआ था।
- Psalm 68:8 भजन संहिता 68:8तब पृथ्वी कांप उठी, और आकाश भी परमेश्वर के साम्हने टपकने लगा, उधर सीनै पर्वत परमेश्वर, हां इस्राएल के परमेश्वर के साम्हने कांप उठा।
- Judges 5:5 न्यायियों 5:5यहोवा के प्रताप से पहाड़, इस्राएल के परमेश्वर यहोवा के प्रताप से वह सीनै पिघलकर बहने लगा।
- Psalm 97:4–5 भजन संहिता 97:4–5उसकी बिजलियों से जगल प्रकाशित हुआ, पृथ्वी देखकर थरथरा गई है! पहाड़ यहोवा के साम्हने, मोम की नाई पिघल गए, अर्थात् सारी पृथ्वी के परमेश्वर के साम्हने।।
- Habakkuk 3:10 हबक्कूक 3:10पहाड़ तुझे देखकर कांप उठे; आंधी और जलप्रलय निकल गए; गहिरा सागर बोल उठा और अपने हाथों अर्थात् लहरों को ऊपर उठाया।
- Isaiah 64:1–2 यशायाह 64:1–2भला हो कि तू आकाश को फाड़कर उतर आए और पहाड़ तेरे साम्हने कांप उठे। जैसे आग झाड़- झंखाड़ को जला देती वा जल को उबालती है, उसी रीति से तू अपने शत्रुओं पर अपना नाम ऐसा प्रगट कर कि जाति जाति के लोग तेरे प्रताप से कांप उठें!
- Psalm 114:6 भजन संहिता 114:6हे पहाड़ों तुम्हें क्या हुआ, कि तुम भेड़ों की नाईं, और हे पहाड़ियों तुम्हें क्या हुआ, कि तुम भेड़- बकरियों के बच्चों की नाईं उछलीं?
- Psalm 114:4 भजन संहिता 114:4पहाड़ मेढ़ों की नाईं उछलने लगे, और पहाड़ियां भेड़- बकरियों के बच्चों की नाईं उछलने लगीं।।
- Psalm 98:7 भजन संहिता 98:7समुद्र औश्र उस में की सब वस्तुएं गरज उठें; जगत और उसके निवासी महाशब्द करें!
- Psalm 46:6 भजन संहिता 46:6जाति जाति के लोग झल्ला उठे, राज्य राज्य के लोग डगमगाने लगे; वह बोल उठा, और पृथ्वी पिघल गई।