Isaiah · chapter 20 · verse 6
Isaiah 20:6 in Hindi
और समुद्र के इस पार के बसनेवाले उस समय यह कहेंगे, देखो, जिन पर हम आशा रखते थे ओर जिनके पास हम अश्शूर के राजा से बचने के लिये भागने को थे उनकी ऐसी दशा हो गई है। तो फिर हम लोग कैसे बचेंगे?
Aur samudr ke is paar ke basanevaale us samay yah kahenge, dekho, jin par ham aashaa rakhate the or jinake paas ham ashshoor ke raajaa se bachane ke liye bhaagane ko the unakee aisee dashaa ho gaee hai. To phir ham log kaise bachenge?
Isaiah 20:6 in English
- King James Version (KJV)
- And the inhabitant of this isle shall say in that day, Behold, such [is] our expectation, whither we flee for help to be delivered from the king of Assyria: and how shall we escape?
- World English Bible (WEB)
- The inhabitants of this coast land will say in that day, ‘Behold, this is our expectation, where we fled for help to be delivered from the king of Assyria. And we, how will we escape?’”
- American Standard Version (ASV)
- And the inhabitant of this coast-land shall say in that day, Behold, such is our expectation, whither we fled for help to be delivered from the king of Assyria: and we, how shall we escape?
- Bible in Basic English (BBE)
- And those living by the sea will say in that day, See the fate of our hope to whom we went for help and salvation from the king of Assyria: what hope have we then of salvation?
- Darby Translation (DBY)
- And the inhabitants of this coast shall say in that day, Behold, such is our confidence, whither we fled for help to be delivered from the king of Assyria; and how shall we escape?
- Webster's Bible (WBS)
- And the inhabitant of this isle shall say in that day, Behold, such [is] our expectation, whither we flee for help to be delivered from the king of Assyria: and how shall we escape?
- Young's Literal Translation (YLT)
- and the inhabitant of this isle hath said in that day — Lo, thus [is] our trust, Whither we have fled for help, To be delivered from the king of Asshur, And how do we escape — we?'
Read in context
- 4उसी प्रकार अश्शूर का राजा मिद्दी और कूश के लोगों को बंधुआ करके देश- निकाल करेगा, क्या लड़के क्या बूढे,़ सभों को बंधुए करके उघाड़े और नंगे पांव और नितम्ब खुले ले जाएगा, जिस से मि लज्जित हो।
- 5तब वे कूश के कारण जिस पर उनकी आशा थी, और मि के हेतु जिस पर वे फूलते थे व्याकुल और लज्जित हो जाएंगे।
- 6और समुद्र के इस पार के बसनेवाले उस समय यह कहेंगे, देखो, जिन पर हम आशा रखते थे ओर जिनके पास हम अश्शूर के राजा से बचने के लिये भागने को थे उनकी ऐसी दशा हो गई है। तो फिर हम लोग कैसे बचेंगे?
Cross references
- Hebrews 2:3 इब्रानियों 2:3तो हम लोग ऐसे बड़े उद्धार से निश्चिन्त रह कर क्योंकर बच सकते हैं? जिस की चर्चा पहिले पहिल प्रभु के द्वारा हुई, और सुनने वालों के द्वारा हमें निश्चय हुआ।
- 1 Thessalonians 5:3 1 थिस्सलुनीकियों 5:3जब लोग कहते होंगे, कि कुशल हैं, और कुछ भय नहीं, तो उन पर एकाएक विनाश आ पड़ेगा, जिस प्रकार गर्भवती पर पीड़ा; और वे किसी रीति से बचेंगे।
- Matthew 23:33 मत्ती 23:33हे सांपो, हे करैतों के बच्चो, तुम नरक के दण्ड से क्योंकर बचोगे?
- Job 6:20 अय्यूब 6:20वे लज्जित हुए क्योंकि उन्हों ने भरोसा रखा था और वहां पहुचकर उनके मुंह सूख गए।
- Isaiah 30:1–7 यशायाह 30:1–7यहोवा की यह वाणी है, हाय उन बलवा करनेवाले लड़कों पर जो युक्ति तो करते परन्तु मेरी ओर से नहीं; वाचा तो बान्धते परन्तु मेरे आत्मा के सिखाये नहीं; और इस प्रकार पाप पर पाप बढ़ाते हैं। वे मुझ से बिन पूछे मि को जाते हैं कि फिरौन की रक्षा में रहे और मि की छाया में शरण लें। इसलिये फिरौन का शरणस्थान तुम्हारी लज्जा का, और मि की छाया में शरण लेना तुम्हारी निन्दा का कारण होगा। उसके हाकिम सोअन में आए तो हैं और उसके दूत अब हानेस में पहुंचे हैं। वे सब एक ऐसी जाति के कारण लज्जित होंगे जिस से उनका कुछ लाभ न होगा, जो सहायता और लाभ के बदले लज्जा और नामधराई का कारण होगी।। दक्खिन देश के पशुओं के विषय भारी वचन। वे अपनी धन सम्पति को जवान गदहों की पीठ पर, और अपने खजानों को ऊंटों के कूबड़ों पर लादे हुए, संकट और सकेती के देश में होकर, जहां सिंह और सिंहनी, नाग और उड़नेवाले तेज विषधर सर्प रहते हैं, उन लोगों के पास जा रहे हैं जिन से उनको लाभ न होगा। क्योंकि मि की सहायता व्यर्थ और निकम्मी है, इस कारण मैं ने उसको बैठी रहनेवाली रहब कहा है।।
- Isaiah 10:3 यशायाह 10:3तुम दण्ड के दिन और उस आपत्ति के दिन जो दूर से आएगी क्या करोगे? तुम सहायता के लिये किसके पास भाग कर जाओगे?
- Jeremiah 30:15–17 यिर्मयाह 30:15–17तू अपने घाव के मारे क्यों चिल्लाती है? तेरी पीड़ा की कोई औषध नहीं। तेरे बड़े अधर्म और भारी पापों के कारण मैं ने तुझ से ऐसा व्यवहार किया है। परन्तु जितने तुझे अब खाए लेते हैं, वे आप ही खाए जाएंगे, और तेरे द्रोही आप सब के सब बंधुआई में जाएंगे; और तेरे लूटनेवाले आप लुटेंगे ओर जितने तेरा धन छीनते हैं, उनका धन मैं छिनवाऊंगा। मैं तेरा इलाज करके तेरे घावों को चंगा करूंगा, यहोवा की यह वाणी है; क्योंकि तेरा नाम ठुकराई हुई पड़ा हैे वह तो सिरयोन है, उसकी चिन्ता कौन करता है?
- Job 22:30 अय्यूब 22:30वरन जो निदष न हो उसको भी वह बचाता है; तेरे शुठ्ठ कामों के कारण तू छुड़ाया जाएगा।
- Isaiah 31:1–3 यशायाह 31:1–3हाय उन पर जो सहायता पाने के लिये मि को जाते हैं और घोड़ों का आसरा करते हैं; जो रथों पर भरोसा रखते क्योंकि वे बहुत हैं, और सवारों पर, क्योंकि वे अति बलवान हैं, पर इस्राएल के पवित्रा की ओर दृष्टि नहीं करते और न यहोवा की खोज करते हैं! परन्तु वह भी बुद्धिमान है और दु:ख देगा, वह अपने वचन न टालेगा, परन्तु उठकर कुकर्मियों के घराने पर और अनर्थकारियों के सहायकों पर भी चढ़ाई करेगा। मिद्दी लोग ईश्वर नहीं, मनुष्य ही हैं; और उनके घोड़े आत्मा नहीं, मांस ही हैं। जब यहोवा हाथ बढ़ाएगा, तब सहायता करनेवाले और सहायतक चाहनेवाले दोनों ठोकर खाकर गिरेंगे, और वे सब के सब एक संग नष्ट हो जाएंगे।
- Isaiah 30:15–16 यशायाह 30:15–16प्रभु यहोवा, इस्राएल का पवित्रा यों कहता है, लौट आने और शान्त रहने में तुम्हारा उद्धार है; शान्त रहते और भरोसा रखने में तुम्हारी वीरता है। परन्तु तुम ने ऐसा नहीं किया, तुम ने कहा, नहीं, हम तो घोड़ों पर चढ़कर भागेंगे, इसलिये तुम भागोगे; और यह भी कहा कि हम तेज सवारी पर चलेंगे, सो तुम्हारा पीछा करनेवाले उस से भी तेज होंगे।
- Isaiah 28:17 यशायाह 28:17और मैं न्याय की डोरी और धर्म को साहुल ठहराऊंगा; और तुम्हारा झूठ का शरणस्थान ओलों से बह जाएगा, और तुम्हारे छिपने का स्थान जल से डूब जाएगा।
- Jeremiah 47:4 यिर्मयाह 47:4क्योंकि सब पलिश्तियों के नाश होने का दिन आता है; और सोर और सिदोन के सब बचे हुए सहायक मिट जाएंगे। क्योंकि यहोवा पलिश्तियों को जो कप्तोर नाम समुद्र तीर के बचे हुए रहनेवाले हैं, उनको भी नाश करने पर है।
Original words (Hebrew)
- inhabitant · H3427יָשַׁב yâshab
- isle · H339אִי ʼîy
- say · H559אָמַר ʼâmar
- day · H3117יוֹם yôwm
- such · H3541כֹּה kôh
- expectation · H4007מַבָּט mabbâṭ
- flee · H5127נוּס nûwç
- help · H5833עֶזְרָה ʻezrâh
- delivered · H5337נָצַל nâtsal
- from · H6440פָּנִים pânîym
- king · H4428מֶלֶךְ melek
- Assyria · H804אַשּׁוּר ʼAshshûwr
- escape · H4422מָלַט mâlaṭ