Isaiah · chapter 20 · verse 5
Isaiah 20:5 in Hindi
तब वे कूश के कारण जिस पर उनकी आशा थी, और मि के हेतु जिस पर वे फूलते थे व्याकुल और लज्जित हो जाएंगे।
Tab ve koosh ke kaaran jis par unakee aashaa thee, aur mi ke hetu jis par ve phoolate the vyaakul aur lajjit ho jaaenge.
Isaiah 20:5 in English
- King James Version (KJV)
- And they shall be afraid and ashamed of Ethiopia their expectation, and of Egypt their glory.
- World English Bible (WEB)
- They will be dismayed and confounded, because of Ethiopia their expectation, and of Egypt their glory.
- American Standard Version (ASV)
- And they shall be dismayed and confounded, because of Ethiopia their expectation, and of Egypt their glory.
- Bible in Basic English (BBE)
- And they will be full of fear, and will no longer have faith in Ethiopia which was their hope, or in Egypt which was their glory.
- Darby Translation (DBY)
- And they shall be terrified and ashamed of Ethiopia their confidence, and of Egypt their boast.
- Webster's Bible (WBS)
- And they shall be afraid and ashamed of Cush their expectation, and of Egypt their glory.
- Young's Literal Translation (YLT)
- and they have been affrighted and ashamed of Cush their confidence, and of Egypt their beauty,
Read in context
- 3और यहोवा ने कहा, जिस प्रकार मेरा दास यशायाह तीन वर्ष से उघाड़ा और नंगे पांव चलता आया है, कि मि और कूश के लिये चिन्ह और चमत्कार हो,
- 4उसी प्रकार अश्शूर का राजा मिद्दी और कूश के लोगों को बंधुआ करके देश- निकाल करेगा, क्या लड़के क्या बूढे,़ सभों को बंधुए करके उघाड़े और नंगे पांव और नितम्ब खुले ले जाएगा, जिस से मि लज्जित हो।
- 5तब वे कूश के कारण जिस पर उनकी आशा थी, और मि के हेतु जिस पर वे फूलते थे व्याकुल और लज्जित हो जाएंगे।
- 6और समुद्र के इस पार के बसनेवाले उस समय यह कहेंगे, देखो, जिन पर हम आशा रखते थे ओर जिनके पास हम अश्शूर के राजा से बचने के लिये भागने को थे उनकी ऐसी दशा हो गई है। तो फिर हम लोग कैसे बचेंगे?
Cross references
- Isaiah 30:5 यशायाह 30:5वे सब एक ऐसी जाति के कारण लज्जित होंगे जिस से उनका कुछ लाभ न होगा, जो सहायता और लाभ के बदले लज्जा और नामधराई का कारण होगी।।
- Isaiah 30:3 यशायाह 30:3इसलिये फिरौन का शरणस्थान तुम्हारी लज्जा का, और मि की छाया में शरण लेना तुम्हारी निन्दा का कारण होगा।
- 2 Kings 18:21 2 राजा 18:21सुन, तू तो उस कुचले हुए नरकट अर्थात् मिस्र पर भरोसा रखता है, उस पर यदि कोई टेक लगाए, तो वह उसके हाथ में चुभकर छेदेगा। मिस्र का राजा फ़िरौन अपने सब भरोसा रखनेवालों के लिये ऐसा ही है।
- Ezekiel 29:6–7 यहेजकेल 29:6–7तब मिस्र के सारे निवासी जान लेंगे कि मैं यहोवा हूँ। वे तो इस्राएल के घराने के लिये नरकट की टेक ठहरे थे। जब उन्होंने तुझ पर हाथ का बल दिया तब तू टूट गया और उनके पखौड़े उखड़ ही गए; और जब उन्होंने तुझ पर टेक लगाई, तब तू टूट गया, और उनकी कमर की सारी नसें चढ़ गई।
- Jeremiah 9:23–24 यिर्मयाह 9:23–24यहोवा यों कहता है, बुध्दिमान अपनी बुध्दि पर घमणड न करे, न वीर अपनी वीरता पर, त धनी अपने धन पर घमणड करे; परन्तु जो घमणड करे वह इसी बात पर घमणड करे, कि वह मुझे जानता और समझता हे, कि मैं ही वह यहोवा हूँ, जो पृथ्वी पर करूणा, न्याय और धर्म के काम करता है; क्योंकि मैं इन्हीं बातों से प्रसन्न रहता हूँ।
- 1 Corinthians 3:21 1 कुरिन्थियों 3:21इसलिये मनुष्यों पर कोई घमण्ड न करे, क्योंकि सब कुछ तुम्हारा है।
- Jeremiah 17:5 यिर्मयाह 17:5यहोवा यों कहता है, स्रापित है वह पुरूष जो मनुष्य पर भरोसा रखता है, और उसका सहारा लेता है, जिसका मन यहोवा से भटक जाता है।
- Isaiah 30:7 यशायाह 30:7क्योंकि मि की सहायता व्यर्थ और निकम्मी है, इस कारण मैं ने उसको बैठी रहनेवाली रहब कहा है।।
- Isaiah 36:6 यशायाह 36:6सुन, तू तो उस कुचले हुए नरकट अर्थात् मि पर भरोसा रखता है; उस पर यदि कोई टेक लगाए तो वह उसके हाथ में चुभकर छेद कर देगा। मि का राजा फिरौन उन सब के साथ ऐसा ही करता है जो उस पर भरोसा रखते हैं।
- Isaiah 2:22 यशायाह 2:22सो तुम मनुष्य से परे रहो जिसकी श्वास उसके नथनों में है, क्योंकि उसका मूल्य है ही क्या?