Isaiah · chapter 55 · verse 10
Isaiah 55:10 in Hindi
जिस प्रकार से वर्षा और हिम आकाश से गिरते हैं और वहां यों ही लौट नहीं जाते, वरन भूमि पर पड़कर उपज उपजाते हैं जिस से बोलनेवाले को बीज और खानेवाले को रोटी मिलती है,
Jis prakaar se varshaa aur him aakaash se girate haim aur vahaam yom hee laut naheem jaate, varan bhoomi par padakar upaj upajaate haim jis se bolanevaale ko beej aur khaanevaale ko rotee milatee hai,
Isaiah 55:10 in English
- King James Version (KJV)
- For as the rain cometh down, and the snow from heaven, and returneth not thither, but watereth the earth, and maketh it bring forth and bud, that it may give seed to the sower, and bread to the eater:
- World English Bible (WEB)
- For as the rain comes down and the snow from the sky, and doesn’t return there, but waters the earth, and makes it grow and bud, and gives seed to the sower and bread to the eater;
- American Standard Version (ASV)
- For as the rain cometh down and the snow from heaven, and returneth not thither, but watereth the earth, and maketh it bring forth and bud, and giveth seed to the sower and bread to the eater;
- Bible in Basic English (BBE)
- For as the rain comes down, and the snow from heaven, and does not go back again, but gives water to the earth, and makes it fertile, giving seed to the planter, and bread for food;
- Darby Translation (DBY)
- For as the rain cometh down, and the snow from heaven, and returneth not thither, but watereth the earth, and maketh it bring forth and bud, that it may give seed to the sower, and bread to the eater:
- Webster's Bible (WBS)
- For as the rain cometh down, and the snow from heaven, and returneth not thither, but watereth the earth, and maketh it bring forth and bud, that it may give seed to the sower, and bread to the eater:
- Young's Literal Translation (YLT)
- For, as come down doth the shower, And the snow from the heavens, And thither returneth not, But hath watered the earth, And hath caused it to yield, and to spring up, And hath given seed to the sower, and bread to the eater,
Read in context
- 8क्योंकि यहोवा कहता है, मेरे विचार और तुम्हारे विचार एक समान नहीं है, न तुम्हारी गति और मेरी गति एक सी है।
- 9क्योंकि मेरी और तुम्हारी गति में और मेरे और तुम्हारे सोच विचारों में, आकाश और पृथ्वी का अन्तर है।।
- 10जिस प्रकार से वर्षा और हिम आकाश से गिरते हैं और वहां यों ही लौट नहीं जाते, वरन भूमि पर पड़कर उपज उपजाते हैं जिस से बोलनेवाले को बीज और खानेवाले को रोटी मिलती है,
- 11उसी प्रकार से मेरा वचन भी होगा जो मेरे मुख से निकलता है; वह व्यर्थ ठहरकर मेरे पास न लौटेगा, परन्तु, जो मेरी इच्छा है उसे वह पूरा करेगा, और जिस काम के लिये मैं ने उसको भेजा है उसे वह सुफल करेगा।।
- 12क्योंकि तुम आनन्द के साथ निकलोगे, और शान्ति के साथ पहुंचाए जाओगे; तुम्हारे आगे आगे पहाड़ और पहाड़ियां गला खोलकर जयजयकार करेंगी, और मैदान के सब वृक्ष आनन्द के मारे ताली बजाएंगे।
Cross references
- 2 Corinthians 9:9–11 2 कुरिन्थियों 9:9–11जेसा लिखा है, उस ने बिथराया, उस ने कंगालों को दान दिया, उसका धर्म सदा बना रहेगा। सो जो बोनेवाले को बीज, और भोजन के लिये रोटी देता है वह तुम्हें बीज देगा, और उसे फलवन्त करेगा; और तुम्हारे धर्म के फलों को बढ़ाएगा। कि तुम हर बात में सब प्रकार की उदारता के लिये जो हमारे द्वारा परमेश्वर का धन्यवाद करवाती है, धनवान किए जाओ।
- Deuteronomy 32:2 व्यवस्थाविवरण 32:2मेरा उपदेश मेंह की नाईं बरसेगा और मेरी बातें ओस की नाईं टपकेंगी, जैसे कि हरी घास पर झीसी, और पौधों पर झड़ियां।।
- Isaiah 30:23 यशायाह 30:23और वह तुम्हारे लिये जल बरसाएगा कि तुम खेत में बीज बो सको, और भूमि की उपज भी उत्तम और बहुतायत से होगी। उस समय तुम्हारे जानवरों को लम्बी- चौड़ी चराई मिलेगी।
- Ezekiel 34:26 यहेजकेल 34:26और मैं उन्हें और अपनी पहाड़ी के आस पास के स्थानों को आशीष का कारण बना दूंगा; और मेंह को मैं ठीक समय में बरसाया करूंगा; और वे आशीषों की वर्षा होंगी।
- Hosea 10:12 होशे 10:12अपने लिये धर्म का बीज बोओ, तब करूणा के अनुसार खेत काटने पाओगे; अपनी पड़ती भूमि को जोतो; देखो, अभी यहोवा के पीछे हो लेने का समय है, कि वह आए और तुम्हारे ऊपर उद्धार बरसाए।।
- Isaiah 61:11 यशायाह 61:11क्योंकि जैसे भूमि अपनी उपज को उगाती, और बारी में जो कुछ बोया जाता है उसको वह उपजाती है, वैसे ही प्रभु यहोवा सब जातियों के साम्हने धार्मिकता और धन्यवाद को बढ़ाएगा।।
- Psalm 65:9–13 भजन संहिता 65:9–13तू भूमि की सुधि लेकर उसको सींचता हैं, तू उसको बहुत फलदायक करता है; परमेश्वर की नहर जल से भरी रहती है; तू पृथ्वी को तैयार करके मनुष्यों के लिये अन्न को तैयार करता है। तू रेघारियों को भली भांति सींचता है, और उनके बीच की मिट्टी को बैठाता है, तू भूमि को मेंह से नरम करता है, और उसकी उपज पर आशीष देता है। अपनी भलाई से भरे हुए वर्ष पर तू ने मानो मुकुट धर दिया है; तेरे मार्गों में उत्तम उत्तम पदार्थ पाए जाते हैं। वे जंगल की चराइयों में पाए जाते हैं; और पहाड़ियां हर्ष का फेंटा बान्धे हुए है।। चराइयां भेड़- बकरियों से भरी हुई हैं; और तराइयां अन्न से ढंपी हुई हैं, वे जयजयकार करतीं और गाती भी हैं।।
- Revelation 11:6 प्रकाशितवाक्य 11:6इन्हें अधिकार है, कि आकाश को बन्द करें, कि उन की भविष्यद्ववाणी के दिनों में मेंह न बरसे, और उन्हें सब पानी पर अधिकार है, कि उसे लोहू बनाएं, और जब जब चाहें तब तब पृथ्वी पर हर प्रकार की आपत्ति लाएं।
- Isaiah 5:6 यशायाह 5:6मैं उसे उजाड़ दूंगा; वह न तो फिर छांटी और न खोदी जाएगी और उस में भांति भांति के कटीले पेड़ उगेंगे; मैं मेघों को भी आज्ञा दूंगा कि उस पर जल न बरसाएं।।
- 1 Samuel 23:4 1 शमूएल 23:4तब दाऊद ने यहोवा से फिर पूछा, और यहोवा ने उसे उत्तर देकर कहा, कमर बान्धकर कीला को जा; क्योंकि मैं पलिश्तियों को तेरे हाथ में कर दूंगा।
- Psalm 72:6–7 भजन संहिता 72:6–7वह घास की खूंटी पर बरसनेवाले मेंह, और भूमि सींचनेवाली झाड़ियों के समान होगा। उसके दिनों में धर्मी फूले फलेंगे, और जब तक चन्द्रमा बना रहेगा, तब तक शान्ति बहुत रहेगी।।
Original words (Hebrew)
- rain · H1653גֶּשֶׁם geshem
- down · H3381יָרַד yârad
- snow · H7950שֶׁלֶג sheleg
- heaven · H8064שָׁמַיִם shâmayim
- returneth · H7725שׁוּב shûwb
- watereth · H7301רָוָה râvâh
- earth · H776אֶרֶץ ʼerets
- forth · H3205יָלַד yâlad
- bud · H6779צָמַח tsâmach
- give · H5414נָתַן nâthan
- seed · H2233זֶרַע zeraʻ
- sower · H2232זָרַע zâraʻ
- bread · H3899לֶחֶם lechem
- eater · H398אָכַל ʼâkal