Job · chapter 26 · verse 7
Job 26:7 in Hindi
वह उत्तर दिशा को निराधार फैलाए रहता है, और बिना अेक पृथ्वी को लटकाए रखता है।
Vah uttar dishaa ko niraadhaar phailaae rahataa hai, aur binaa aేk pruthvee ko latakaae rakhataa hai.
Job 26:7 in English
- King James Version (KJV)
- He stretcheth out the north over the empty place, [and] hangeth the earth upon nothing.
- World English Bible (WEB)
- He stretches out the north over empty space, and hangs the earth on nothing.
- American Standard Version (ASV)
- He stretcheth out the north over empty space, And hangeth the earth upon nothing.
- Bible in Basic English (BBE)
- By his hand the north is stretched out in space, and the earth is hanging on nothing.
- Darby Translation (DBY)
- He stretcheth out the north over empty space, he hangeth the earth upon nothing;
- Webster's Bible (WBS)
- He stretcheth out the north over the empty place, [and] hangeth the earth upon nothing.
- Young's Literal Translation (YLT)
- Stretching out the north over desolation, Hanging the earth upon nothing,
Read in context
- 5बहुत दिन के मरे हुए लोग भी जलनिधि और उसके निवासियों के तले तड़पते हैं।
- 6अधोलोक उसके साम्हने उधड़ा रहता है, और विनाश का स्थान ढंप नहीं सकता।
- 7वह उत्तर दिशा को निराधार फैलाए रहता है, और बिना अेक पृथ्वी को लटकाए रखता है।
- 8वह जल को अपनी काली घटाओं में बान्ध रखता, और बादल उसके बोझ से नहीं फटता।
- 9वह अपने सिंहासन के साम्हने बादल फैलाकर उसको छिपाए रखता है।
Cross references
- Job 9:8 अय्यूब 9:8वह आकाशमणडल को अकेला ही फैलाता है, और समुद्र की ऊंची ऊंची लहरों पर चलता है;
- Psalm 104:2–5 भजन संहिता 104:2–5जो उजियाले को चादर की नाई ओढ़े रहता है, और आकाश को तम्बू के समान ताने रहता है, जो अपनी अटारियों की कड़ियां जल में धरता है, और मेघों को अपना रथ बनाता है, और पवन के पंखों पर चलता है, जो पवनों को अपने दूत, और धधकती आग को अपने टहलुए बनाता है।। तू ने पृथ्वी को उसकी नीव पर स्थिर किया है, ताकि वह कभी न डगमगाए।
- Isaiah 40:22 यशायाह 40:22यह वह है जो पृथ्वी के घेरे के ऊपर आकाशमण्डल पर विराजमान है; और पृथ्वी के रहनेवाले टिड्डी के तुल्य है; जो आकाश को मलमल की नाईं फैलाता और ऐसा तान देता है जैसा रहने के लिये तम्बू ताना जाता है;
- Isaiah 42:5 यशायाह 42:5ईश्वर जो आकाश का सृजने और ताननेवाला है, जो उपज सहित पृथ्वी का फैलानेवाला और उस पर के लोगों को सांस और उस पर के चलनेवालों को आत्मा देनेवाला यहावेा है, वह यों कहता है:
- Psalm 24:2 भजन संहिता 24:2क्योंकि उसी ने उसकी नींव समुद्रों के ऊपर दृढ़ करके रखी, और महानदों के ऊपर स्थिर किया है।।
- Proverbs 8:23–27 नीतिवचन 8:23–27मैं सदा से वरन आदि ही से पृथ्वी की सृष्टि के पहिले ही से ठहराई गई हूं। जब न तो गहिरा सागर था, और न जल के सोते थे तब ही से मैं उत्पन्न हुई। जब पहाड़ वा पहाड़ियां स्थिर न की गई थीं, जब यहोवा ने न तो पृथ्वी और न मैदान, न जगत की धूलि के परमाणु बनाए थे, इन से पहिले मैं उत्पन्न हुई। जब उस ने अकाश को स्थिर किया, तब मैं वहां थी, जब उस ने गहिरे सागर के ऊपर आकाशमण्डल ठहराया,
- Isaiah 40:26 यशायाह 40:26अपनी आंखें ऊपर उठाकर देखो, किस ने इनको सिरजा? वह इन गणों को गिन गिनकर निकालता, उन सब को नाम ले लेकर बुलाता है? वह ऐसा सामर्थी और अत्यन्त बली है कि उन में के कोई बिना आए नहीं रहता।।
- Genesis 1:1–2 उत्पत्ति 1:1–2आदि में परमेश्वर ने आकाश और पृथ्वी की सृष्टि की। और पृथ्वी बेडौल और सुनसान पड़ी थी; और गहरे जल के ऊपर अन्धियारा था: तथा परमेश्वर का आत्मा जल के ऊपर मण्डलाता था।