Job · chapter 34 · verse 33
Job 34:33 in Hindi
क्या वह तेरे ही मन के अनुसार बदला पाए क्योंकि तू उस से अप्रसन्न है? क्योंकि तुझे निर्णय करना है, न कि मुझे; इस कारण जो कुछ तुझे समझ पड़ता है, वह कह दे।
Kyaa vah tere hee man ke anusaar badalaa paae kyonki too us se aprasann hai? Kyonki tujhe nirnay karanaa hai, na ki mujhe; is kaaran jo kuchh tujhe samajh padataa hai, vah kah de.
Job 34:33 in English
- King James Version (KJV)
- [Should it be] according to thy mind? he will recompense it, whether thou refuse, or whether thou choose; and not I: therefore speak what thou knowest.
- World English Bible (WEB)
- Shall his recompense be as you desire, that you refuse it? For you must choose, and not I. Therefore speak what you know.
- American Standard Version (ASV)
- Shall his recompense be as thou wilt, that thou refusest it? For thou must choose, and not I: Therefore speak what thou knowest.
- Bible in Basic English (BBE)
- ...
- Darby Translation (DBY)
- Shall he recompense according to thy mind? for thou hast refused [his judgment]; for thou so choosest, and not I; speak then what thou knowest.
- Webster's Bible (WBS)
- [Should it be] according to thy mind? he will recompense it, whether thou shalt refuse, or whether thou shalt choose; and not I: therefore speak what thou knowest.
- Young's Literal Translation (YLT)
- By thee doth He recompense, That thou hast refused — That thou dost choose, and not I? And what thou hast known, speak.
Read in context
- 31क्या किसी ने कभी ईश्वर से कहा, कि मैं ने दणड सहा, अब मैं भविष्य में बुराई न करूंगा,
- 32जो कुछ मुझे नहीं सूझ पड़ता, वह तू मुझे सिखा दे; और यदि मैं ने टेढ़ा काम किया हो, तो भविष्य में वैसा न करूंगा?
- 33क्या वह तेरे ही मन के अनुसार बदला पाए क्योंकि तू उस से अप्रसन्न है? क्योंकि तुझे निर्णय करना है, न कि मुझे; इस कारण जो कुछ तुझे समझ पड़ता है, वह कह दे।
- 34सब ज्ञानी पुरूष वरन जितले बुध्दिमान मेरी सुनते हैं वे मुझ से कहेंगे, कि
- 35अरयूब ज्ञान की बातें नहीं कहता, और न उसके वचन समझ के साथ होते हैं।
Cross references
- Job 33:32 अय्यूब 33:32यदि तुझे बात कहनी हो, तो मुझे उत्तर दे; बोल, क्योंकि मैं तुझे निदष ठहराना चाहता हूँ।
- Isaiah 45:9 यशायाह 45:9हाय उस पर जो अपने रचनेवाले से झगड़ता है! वह तो मिट्टी के ठीकरों में से एक ठीकरा ही है! क्या मिट्टी कुम्हार से कहेगी, तू यह क्या करता है? क्या कारीगर का बनाया हुआ कार्य उसके विषय कहेगा कि उसके हाथ नहीं है?
- Job 34:11 अय्यूब 34:11वह मनुष्य की करनी का फल देता है, और प्रत्येक को अपनी अपनी चाल का फल भुगताता है।
- Psalm 135:6 भजन संहिता 135:6जो कुछ यहोवा ने चाहा उसे उस ने आकाश और पृथ्वी और समुद्र और सब गहिरे स्थानों में किया है।
- Proverbs 11:31 नीतिवचन 11:31देख, धर्मी को पृथ्वी पर फल मिलेगा, तो निश्चय है कि दुष्ट और पापी को भी मिलेगा।।
- Job 15:31 अय्यूब 15:31वह अपने को धोखा देकर व्यर्थ बातों का भरोसा न करे, क्योंकि उसका बदला धोखा ही होगा।
- Hebrews 2:2 इब्रानियों 2:2क्योंकि जो वचन स्वर्गदूतों के द्वारा कहा गया था जब वह स्थिर रहा और हर एक अपराध और आज्ञा न मानने का ठीक ठीक बदला मिला।
- Job 18:4 अय्यूब 18:4हे अपने को क्रोध में फाड़नेवाले क्या तेरे निमित्त पृथ्वी उजड़ जाएगी, और चट्टान अपने स्थान से हट जाएगी?
- Job 41:11 अय्यूब 41:11किस ने पुझे पहिले दिया है, जिसका बदला मुझे देना पड़े! देख, जो कुछ सारी धरती पर है सो मेरा है।
- Job 9:12 अय्यूब 9:12देखो, जब वह छीनने लगे, तब उसको कौन रोकेगा? कोन उस से कह सकता है कि तू यह क्या करता है?
- Job 33:5 अय्यूब 33:5यदि तू मुझे उत्तर दे सके, तो दे; मेरे साम्हने अपनी बातें क्रम से रचकर खड़ा हो जा।
- Romans 9:20 रोमियों 9:20हे मनुष्य, भला तू कौन है, जो परमेश्वर का साम्हना करता है? क्या गढ़ी हुई वस्तु गढ़नेवाले से कह सकती है कि तू ने मुझे ऐसा क्यों बनाया है?