Joshua · chapter 4 · verse 3
Joshua 4:3 in Hindi
कि तुम यरदन के बीच में, जहां याजकों ने पांव धरे थे वहां से बारह पत्थर उठाकर अपने साथ पाल ले चलो, और जहां आज की रात पड़ाव होगा वहीं उनको रख देना।
Ki tum yaradan ke beech mem, jahaam yaajakom ne paanv dhare the vahaam se baarah patthar uthaakar apane saath paal le chalo, aur jahaam aaj kee raat padaav hogaa vaheem unako rakh denaa.
Joshua 4:3 in English
- King James Version (KJV)
- And command ye them, saying, Take you hence out of the midst of Jordan, out of the place where the priests’ feet stood firm, twelve stones, and ye shall carry them over with you, and leave them in the lodging place, where ye shall lodge this night.
- World English Bible (WEB)
- and command them, saying, ‘Take from out of the middle of the Jordan, out of the place where the priests’ feet stood firm, twelve stones, carry them over with you, and lay them down in the place where you’ll camp tonight.’”
- American Standard Version (ASV)
- and command ye them, saying, Take you hence out of the midst of the Jordan, out of the place where the priests’ feet stood firm, twelve stones, and carry them over with you, and lay them down in the lodging-place, where ye shall lodge this night.
- Bible in Basic English (BBE)
- And say to them, Take up from the middle of Jordan, from the place where the feet of the priests were resting, twelve stones, and take them over with you and put them down in the place where you take your rest tonight.
- Darby Translation (DBY)
- and command them, saying, Take up hence out of the midst of the Jordan, from the place where the priests' feet stood firm, twelve stones, and carry them over with you, and lay them down in the lodging-place where ye shall lodge this night.
- Webster's Bible (WBS)
- And command ye them, saying, Take you hence out of the midst of Jordan, from the place where the priests' feet stood firm, twelve stones, and ye shall carry them over with you, and leave them in the lodging-place where ye shall lodge this night.
- Young's Literal Translation (YLT)
- and command ye them, saying, Take up for you from this [place], from the midst of the Jordan, from the established standing-place of the feet of the priests, twelve stones, and ye have removed them over with you, and placed them in the lodging-place in which ye lodge to-night.'
Read in context
- 1जब उस सारी जाति के लोग यरदन के पार उतर चुके, तब यहोवा ने यहोशू से कहा,
- 2प्रजा में से बारह पुरूष, अर्थात्गोत्रा पीछे एक एक पुरूष को चुनकर यह आज्ञा दे,
- 3कि तुम यरदन के बीच में, जहां याजकों ने पांव धरे थे वहां से बारह पत्थर उठाकर अपने साथ पाल ले चलो, और जहां आज की रात पड़ाव होगा वहीं उनको रख देना।
- 4तब यहोशू ने उन बारह पुरूषों को, जिन्हें उस ने इस्राएलियों के प्रत्येक गोत्रा में से छांटकर ठहरा रखा था,
- 5बुलवाकर कहा, तुम अपने परमेश्वर यहोवा के सन्दूक के आगे यरदन के बीच में जाकर इस्राएलियों के गोत्रों की गिनती के अनुसार एक एक पत्थर उठाकर अपने अपने कन्धे पर रखो,
Cross references
- Joshua 4:19–20 यहोशू 4:19–20पहिले महिने के दसवें दिन को प्रजा के लोगों ने यरदन में से निकलकर यरीहो के पूर्वी सिवाने पर गिलगाल में अपने डेरे डाले। और जो बारह पत्थर यरदन में से निकाले गए थे, उनको यहोशू ने गिलगाल में खड़े किए।
- Joshua 3:13 यहोशू 3:13और जिस समय पृथ्वी भर के प्रभु यहोवा की वाचा का सन्दूक उठानेवाले याजकों के पांव यरदन के जल में पड़ेंगे, उस समय यरदन का ऊपर से बहता हुआ जल थम जाएगा, और ढेर होकर ठहरा रहेगा।
- Joshua 4:8 यहोशू 4:8यहोशू की इस आज्ञा कें अनुसार इ एलियों ने किया, जैसा यहोवा ने यहोशू से कहा था वैसा ही उन्हों ने इस्राएलियों ने किया, जैसा यहोवा ने यहोशू से कहा था वैसा ही उन्हों ने इस्राएली गोत्रों की गिनती के अनुसार बारह पत्थर यरदन के बीच में से उठा लिए; और उनको अपने साथ ले जाकर पड़ाव में रख दिया।
- Genesis 28:22 उत्पत्ति 28:22और यह पत्थर, जिसका मैं ने खम्भा खड़ा किया है, परमेश्वर का भवन ठहरेगा: और जो कुछ तू मुझे दे उसका दशमांश मैं अवश्य ही तुझे दिया करूंगा।।
- 1 Samuel 7:12 1 शमूएल 7:12तब शमूएल ने एक पत्थर लेकर मिस्पा और शेन के बीच में खड़ा किया, और यह कहकर उसका नाम एबेनेजेर रखा, कि यहां तक यहोवा ने हमारी सहायता की है।
- Joshua 24:27 यहोशू 24:27तब यहोशू ने सब लोगों से कहा, सुनो, यह पत्थर हम लोगों का साक्षी रहेगा, क्योंकि जितने वचन यहोवा ने हम से कहें हैं उन्हें इस ने सुना है; इसलिये यह तुम्हारा साक्षी रहेगा, ऐसा न हो कि तुम अपने परमेश्वर से मुकर जाओ।
- Psalm 103:2 भजन संहिता 103:2हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह, और उसके किसी उपकार को न भूलना।
- Luke 19:40 लूका 19:40उस ने उत्तर दिया, कि तुम में से कहता हूं, यदि ये चुप रहें, तो पत्थर चिल्ला उठेंगे।।
- Deuteronomy 27:1–26 व्यवस्थाविवरण 27:1–26फिर इस्राएल के वृद्ध लोगों समेत मूसा ने प्रजा के लोगों को यह आज्ञा दी, कि जितनी आज्ञाएं मैं आज तुम्हें सुनाता हूं उन सब को मानना। और जब तुम यरदन पार होके उस देश में पहुंचो, जो तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे देता है, तब बड़े बड़े पत्थर खड़े कर लेना, और उन पर चूना पोतना; और पार होने के बाद उन पर इस व्यवस्था के सारे वचनों को लिखना, इसलिये कि जो देश तेरे पूर्वजों का परमेश्वर यहोवा अपने वचन के अनुसार तुझे देता है, और जिस में दूध और मधु की धाराएं बहती हैं, उस देश में तू जाने पाए। फिर जिन पत्थरों के विषय में मैं ने आज आज्ञा दी है, उन्हें तुम यरदन के पार होकर एबाल पहाड़ पर खड़ा करना, और उन पर चूना पोतना। और वहीं अपने परमेश्वर यहोवा के लिये पत्थरों की एक वेदी बनाना, उन पर कोई औजार न चलाना। अपने परमेश्वर यहोवा की वेदी अनगढ़े पत्थरों की बनाकर उन पर उसके लिये होमबलि चढ़ाना; और वहीं मेलबलि भी चढ़ाकर भोजन करना, और अपने परमेश्वर यहोवा के सम्मुख आनन्द करना। और उन पत्थरों पर इस व्यवस्था के सब वचनों को शुद्ध रीति से लिख देना।। फिर मूसा और लेवीय याजकों ने सब इस्राएलियों से यह भी कहा, कि हे इस्राएल, चुप रहकर सुन; आज के दिन तू अपने परमेश्वर यहोवा की प्रजा हो गया है। इसलिये अपने परमेश्वर यहोवा की बात मानना, और उसकी जो जो आज्ञा और विधि मैं आज तुझे सुनाता हूं उनका पालन करना। फिर उसी दिन मूसा ने प्रजा के लोगों को यह आज्ञा दी, कि जब तुम यरदन पार हो जाओ तब शिमौन, लेवी, यहूदा, इस्साकार, युसुफ, और बिन्यामीन, ये गिरिज्जीम पहाड़ पर खडे होकर आशीर्वाद सुनाएं। और रूबेन, गाद, आशेर, जबूलून, दान, और नप्ताली, ये एबाल पहाड़ पर खड़े होके शाप सुनाएं। तब लेवीय लोग सब इस्राएली पुरूषों से पुकारके कहें, कि शापित हो वह मनुष्य जो कोई मूर्त्ति कारीगर से खुदवाकर वा ढलवाकर निराले स्थान में स्थापन करे, क्योंकि इस से यहोवा को घृणा लगती है। तब सब लोग कहें, आमीन।। शापित हो वह जो अपने पिता वा माता को तुच्छ जाने। तब सब लोग कहें, आमीन।। शापित हो वह जो किसी दूसरे के सिवाने को हटाए। तब सब लोग कहें, आमीन।। शापित हो वह जो अन्धे को मार्ग से भटका दे। तब सब लोग कहें, आमीन।। शापित हो वह जो परेदशी, अनाथ, वा विधवा का न्याय बिगाड़े। तब सब लोग कहें आमीन।। शापित हो वह जो अपनी सौतेली माता से कुकर्म करे, क्योंकि वह अपने पिता का ओढ़ना उघारता है। तब सब लोग कहें, आमीन।। शापित हो वह जो किसी प्रकार के पशु से कुकर्म करे। तब सब लोग कहें, आमीन।। शापित हो वह जो अपनी बहिन, चाहे सगी हो चाहे सौतेली, उस से कुकर्म करे। तब सब लोग कहें, आमीन।। शापित हो वह जो अपनी सास के संग कुकर्म करे। तब सब लोग कहें, आमीन।। शापित हो वह जो किसी को छिपकर मारे। तब सब लोग कहें, आमीन।। शापित हो वह जो निर्दोष जन के मार डालने के लिये धन ले। तब सब लोग कहें, आमीन।। शापित हो वह जो इस व्यवस्था के वचनों को मानकर पूरा न करे। तब सब लोग कहें, आमीन।।
- Psalm 11:4 भजन संहिता 11:4परमेश्वर अपने पवित्रा भवन में है; परमेश्वर का सिंहासन स्वर्ग में है; उसकी आंखें मनुष्य की सन्तान को नित देखती रहती हैं और उसकी पलकें उनको जांचती हैं।
Original words (Hebrew)
- command · H6680צָוָה tsâvâh
- saying · H559אָמַר ʼâmar
- Take · H5375נָשָׂא nâsâʼ
- midst · H8432תָּוֶךְ tâvek
- Jordan · H3383יַרְדֵּן Yardên
- priests’ · H3548כֹּהֵן kôhên
- feet · H7272רֶגֶל regel
- stood · H4673מַצָּב matstsâb
- firm · H3559כּוּן kûwn
- twelve · H8147שְׁנַיִם shᵉnayim
- stones · H68אֶבֶן ʼeben
- over · H5674עָבַר ʻâbar
- leave · H3240יָנַח yânach
- place · H4411מָלוֹן mâlôwn
- lodge · H3885לוּן lûwn
- night · H3915לַיִל layil