Luke · chapter 15 · verse 16
Luke 15:16 in Hindi
और वह चाहता था, कि उन फलियों से जिन्हें सूअर खाते थे अपना पेट भरे; और उसे कोई कुछ नहीं देता था।
Aur vah chaahataa thaa, ki un phaliyom se jinhem sooar khaate the apanaa pet bhare; aur use koee kuchh naheem detaa thaa.
Luke 15:16 in English
- King James Version (KJV)
- And he would fain have filled his belly with the husks that the swine did eat: and no man gave unto him.
- World English Bible (WEB)
- He wanted to fill his belly with the pods that the pigs ate, but no one gave him any.
- American Standard Version (ASV)
- And he would fain have filled his belly with the husks that the swine did eat: and no man gave unto him.
- Bible in Basic English (BBE)
- And so great was his need that he would have been glad to take the pigs' food, and no one gave him anything.
- Darby Translation (DBY)
- And he longed to fill his belly with the husks which the swine were eating; and no one gave to him.
- Webster's Bible (WBS)
- And he would fain have filled his belly with the husks that the swine did eat; and no man gave to him.
- Young's Literal Translation (YLT)
- and he was desirous to fill his belly from the husks that the swine were eating, and no one was giving to him.
Read in context
- 14जब वह सब कुछ खर्च कर चुका, तो उस देश में बड़ा अकाल पड़ा, और वह कंगाल हो गया।
- 15और वह उस देश के निवासियों में से एक के यहां जा पड़ा: उस ने उसे अपने खेतों में सूअर चराने के लिये भेजा।
- 16और वह चाहता था, कि उन फलियों से जिन्हें सूअर खाते थे अपना पेट भरे; और उसे कोई कुछ नहीं देता था।
- 17जब वह अपने आपे में आया, तब कहने लगा, कि मेरे पिता के कितने ही मजदूरों को भोजन से अधिक रोटी मिलती है, और मैं यहां भूखा मर रहा हूं।
- 18मैं अब उठकर अपने पिता के पास जाऊंगा और उस से कहूंगा कि पिता जी मैं ने स्वर्ग के विरोध में और तेरी दृष्टि में पाप किया है।
Cross references
- Romans 6:19–21 रोमियों 6:19–21मैं तुम्हारी शारीरिक दुर्बलता के कारण मनुष्यों की रीति पर कहता हूं, जैसे तुम ने अपने अंगो को कुकर्म के लिये अशुद्धता और कुकर्म के दास करके सौंपा था, वैसे ही अब अपने अंगों को पवित्राता के लिये धर्म के दास करके सौंप दो। जब तुम पाप के दास थे, तो धर्म की ओर से स्वतंत्रा थे। सो जिन बातों से अब तुम लज्जित होते हो, उन से उस समय तुम क्या फल पाते थे?
- Hosea 12:1 होशे 12:1एप्रैम पानी पीटता और पुरवाइ्र का पीछा करता रहता है; वह लगातार झूठ और उत्पात को बढ़ाता रहता है; वे अश्शूर के साथ वाचा बान्धते और मि में तेल भेजते हैं।
- Psalm 73:22 भजन संहिता 73:22मैं तो पशु सरीखा था, और समझता न था, मैं तेरे संग रहकर भी, पशु बन गया था।
- Isaiah 57:3 यशायाह 57:3परन्तु तुम, हे जादूगरती के पुत्रों, हे व्यभिचारी और व्यभिचारिणी की सन्तान, यहां निकट आओ।
- Isaiah 44:20 यशायाह 44:20वह राख खाता है; भरमाई हुई बुद्धि के कारण वह भटकाया गया है और वह न अपने को बचा सकता और न यह कह सकता है, क्या मेरे दहिने हाथ में मिथ्या नहीं?
- Lamentations 4:5 विलापगीत 4:5जो स्वादिष्ट भेजन खाते थे, वे अब सड़कों में व्याकुल फिरते हैं; जो मखमल के वस्त्रों में पले थो अब घूरों पर लेटते हैं।
- Jonah 2:2–8 योना 2:2–8मैं ने संकट में पड़े हुए यहोवा की दोहाई दी, और उस ने मेरी सुन ली है; अधोलोक के उदर में से मैं चिल्ला उठा, और तू ने मेरी सुन ली। तू ने मुझे गहिरे सागर में समुद्र की थाह तक डाल दिया; और मैं धाराओं के बीच में पड़ा था, तेरी भड़काई हुई सब तरंग और लहरें मेरे ऊपर से बह गईं। तब मैं ने कहा, मैं तेरे साम्हने से निकाल दिया गया हूं; तौभी तेरे पवित्रा मन्दिर की ओर फिर ताकूंगा। मैं जल से यहां तक घिरा हुआ था कि मेरे प्राण निकले जाते थे; गहिरा सागर मेरे चारों ओर था, और मेरे सिर में सिवार लिपटा हुआ था। मैं पहाड़ों की जड़ तक पहुंच गया था; मैं सदा के लिये भूमि में बन्द हो गया था; तौभी हे मेरे परमेश्वर यहोवा, तू ने मेरे प्राणों को गड़हे में से उठाया है। जब मैं मूर्छा खाने लगा, तब मैं ने यहोवा को स्मरण किया; और मेरी प्रार्थना तेरे पास वरन तेरे पवित्रा मन्दिर में पहुंच गई। जो लोग धोखे की व्यर्थ वस्तुओं पर मन लगाते हैं, वे अपने करूणानिधान को छोड़ देते हैं।
- Isaiah 55:2 यशायाह 55:2जो भोजनवस्तु नहीं है, उसके लिये तुम क्यों रूपया लगाते हो, और, जिस से पेट नहीं भरता उसके लिये क्यों परिश्रम करते हो? मेरी ओर मन लगाकर सुनो, तब उत्तम वस्तुएं खाने पाओगे और चिकनी चिकनी वस्तुएं खाकर सन्तुष्ट हो जाओगे।
- Psalm 142:4 भजन संहिता 142:4मैं ने दहिनी ओर देखा, परन्तु कोई मुझे नहीं देखता है। मेरे लिये शरण कहीं नहीं रही, न मुझ को कोई पूछता है।।