Mark · chapter 3 · verse 4
Mark 3:4 in Hindi
और उन से कहा; क्या सब्त के दिन भला करना उचित है या बुरा करता, प्राण को बचाना या मारना? पर वे चुप रहे।
Aur un se kahaa; kyaa sabt ke din bhalaa karanaa uchit hai yaa buraa karataa, praan ko bachaanaa yaa maaranaa? Par ve chup rahe.
Mark 3:4 in English
- King James Version (KJV)
- And he saith unto them, Is it lawful to do good on the sabbath days, or to do evil? to save life, or to kill? But they held their peace.
- World English Bible (WEB)
- He said to them, “Is it lawful on the Sabbath day to do good or to do harm? To save a life or to kill?” But they were silent.
- American Standard Version (ASV)
- And he saith unto them, Is it lawful on the sabbath day to do good, or to do harm? to save a life, or to kill? But they held their peace.
- Bible in Basic English (BBE)
- And he said to them, Is it right to do good on the Sabbath or to do evil? to give life or to put to death? But they said nothing.
- Darby Translation (DBY)
- And he says to them, Is it lawful on the sabbath to do good or to do evil, to save life or to kill? But they were silent.
- Webster's Bible (WBS)
- And he saith to them, Is it lawful to do good on the sabbath, or to do evil? to save life, or to kill? but they held their peace.
- Young's Literal Translation (YLT)
- And he saith to them, 'Is it lawful on the sabbaths to do good, or to do evil? life to save, or to kill?' but they were silent.
Read in context
- 2और वे उस पर दोष लगाने के लिये उस की घात में लगे हुए थे, कि देखें, वह सब्त के दिन में उसे चंगा करता है कि नहीं।
- 3उस ने सूखे हाथवाले मनुष्य से कहा; बीच में खड़ा हो।
- 4और उन से कहा; क्या सब्त के दिन भला करना उचित है या बुरा करता, प्राण को बचाना या मारना? पर वे चुप रहे।
- 5और उस ने उन के मन की कठोरता से उदास होकर, उन को क्रोध से चारों ओर देखा, और उस मनुष्य से कहा, अपना हाथ बढ़ा उस ने बढ़ाया, और उसका हाथ अच्छा हो गया।
- 6तब फरीसी बाहर जाकर तुरन्त हेरोदियों के साथ उसके विरोध में सम्मति करने लगे, कि उसे किस प्रकार नाश करें।।
Cross references
- Luke 6:9 लूका 6:9यीशु ने उन से कहा; मैं तुम से यह पूछता हूं कि सब्त के दिन क्या उचित है, भला करन या बुरा करना; प्राण को बचाना या नाश करना?
- Luke 14:1–5 लूका 14:1–5फिर वह सब्त के दिन फरीसियों के सरदारों में से किसी के घर में रोटी खाने गया: और वे उस की घात में थे। और देखो, एक मनुष्य उसके साम्हने था, जिसे जलन्धर का रोग था। इस पर यीशु ने व्यवस्थापकों और फरीसियों से कहा; क्या सब्त के दिन अच्छा करना उचित है, कि नहीं? परन्तु वे चुपचाप रहे। तब उस ने उसे हाथ लगा कर चंगा किया, और जाने दिया। और उन से कहा; कि तुम में से ऐसा कौन है, जिस का गदहा या बैल कुएं में गिर जाए और वह सब्त के दिन उसे तुरन्त बाहर न निकाल ले?
- Matthew 12:10–12 मत्ती 12:10–12और देखो, एक मनुष्य था, जिस का हाथ सूखा हुआ था; और उन्हों ने उस पर दोष लगाने के लिेय उस से पूछा, कि क्या सब्त के दिन चंगा करना उचित है? उस ने उन से कहा; तुम में ऐसा कौन है, जिस की एक भेड़ हो, और वह सब्त के दिन गड़हे में गिर जाए, तो वह उसे पकड़कर न निकाले? भला, मनुष्य का मूल्य भेड़ से कितना बढ़ कर है; इसलिये सब्त के दिन भलाई करना उचित है: तब उस ने उस मनुष्य से कहा, अपना हाथ बढ़ा।
- Luke 13:13–17 लूका 13:13–17तब उस ने उस पर हाथ रखे, और वह तुरन्त सीधी हो गई, और परमेश्वर की बड़ाई करने लगी। इसलिये कि यीशु ने सब्त के दिन उसे अच्छा किया था, आराधनालय का सरदार रिसियाकर लोगों से कहने लगा, छ: दिन हैं, जिन में काम करना चाहिए, सो उन ही दिनों में आकर चंगे होओ; परन्तु सब्त के दिन में नहीं। यह सुन कर प्रभु ने उत्तर देकर कहा; हे कपटियों, क्या सब्त के दिन तुम में से हर एक अपने बैल या गदहे को थान से खोलकर पानी पिलाने नहीं ले जाता? और क्या उचित न था, कि यह स्त्री जो इब्राहीम की बेटी है जिसे शैतान ने अठारह वर्ष से बान्ध रखा था, सब्त के दिन इस बन्धन से छुड़ाई जाती? जब उस ने ये बातें कहीं, तो उसके सब विरोधी लज्जित हो गए, और सारी भीड़ उन महिमा के कामों से जो वह करता था, आनन्दित हुई।।
- Hosea 6:6 होशे 6:6क्योंकि मैं बलिदान से नहीं, स्थिर प्रेम ही से प्रसन्न होता हूं, और होमबलियों से अधिक यह चाहता हूं कि लोग परमेश्वर का ज्ञान रखें।।
- Mark 2:27–28 मरकुस 2:27–28और उस ने उन से कहा; सब्त का दिन मनुष्य के लिये बनाया गया है, न कि मनुष्य सब्त के दिन के लिये। इसलिये मनुष्य का पुत्रा सब्त के दिन का भी स्वामी है।।
- Mark 9:34 मरकुस 9:34वे चुप रहे, क्योंकि मार्ग में उन्हों ने आपस में यह वाद- विवाद किया था, कि हम में से बड़ा कौन है?