Mark · chapter 4 · verse 20
Mark 4:20 in Hindi
और जो अच्छी भूमि में बोए गए, ये वे हैं, जो वचन सुनकर ग्रहण करते और फल लाते हैं, कोई तीस गुणा, कोई साठ गुणा, और कोई सौ गुणा।।
Aur jo achchhee bhoomi mem boe gae, ye ve haim, jo vachan sunakar grahan karate aur phal laate haim, koee tees gunaa, koee saath gunaa, aur koee sau gunaa..
Mark 4:20 in English
- King James Version (KJV)
- And these are they which are sown on good ground; such as hear the word, and receive [it], and bring forth fruit, some thirtyfold, some sixty, and some an hundred.
- World English Bible (WEB)
- Those which were sown on the good ground are those who hear the word, accept it, and bear fruit, some thirty times, some sixty times, and some one hundred times.”
- American Standard Version (ASV)
- And those are they that were sown upon the good ground; such as hear the word, and accept it, and bear fruit, thirtyfold, and sixtyfold, and a hundredfold.
- Bible in Basic English (BBE)
- And these are they who were planted on the good earth; such as give ear to the word, and take it into their hearts, and give fruit, thirty and sixty and a hundred times as much.
- Darby Translation (DBY)
- And these are they who have been sown on the good ground, such as hear the word and receive it, and bear fruit; one thirty, and one sixty, and one a hundred [fold].
- Webster's Bible (WBS)
- And these are they who are sown on good ground; such as hear the word, and receive [it] , and bring forth fruit, some thirty-fold, some sixty, and some a hundred.
- Young's Literal Translation (YLT)
- 'And these are they who on the good ground have been sown: who do hear the word, and receive, and do bear fruit, one thirty-fold, and one sixty, and one an hundred.'
Read in context
- 18और जो झाडियों में बोए गए ये वे हैं जिन्हों ने वचन सुना।
- 19और संसार की चिन्ता, और धन का धोखा, और और वस्तुओं का लोभ उन में समाकर वचन को दबा देता है। और वह निष्फल रह जाता है।
- 20और जो अच्छी भूमि में बोए गए, ये वे हैं, जो वचन सुनकर ग्रहण करते और फल लाते हैं, कोई तीस गुणा, कोई साठ गुणा, और कोई सौ गुणा।।
- 21और उस ने उन से कहा; क्या दिये को इसलिये लाते हैं कि पैमाने या खाट के निचे रखा जाए? क्या इसलिये नहीं, कि दीवट पर रखा जाए?
- 22क्योंकि कोई वस्तु छिपी नहीं, परन्तु इसलिये कि प्रगट हो जाए;
Cross references
- Colossians 1:10 कुलुस्सियों 1:10ताकि तुम्हारा चाल- चलन प्रभु के योग्य हो, और वह सब प्रकार से प्रसन्न हो, और तुम में हर प्रकार के भले कामों का फल लगे, और परमेश्वर की पहिचान में बढ़ते जाओ।
- Luke 8:15 लूका 8:15पर अच्छी भूमि में के वे हैं, जो वचन सुनकर भले और उत्तम मन में सम्भाले रहते हैं, और धीरज से फल लाते हैं॥
- John 15:4–5 यूहन्ना 15:4–5तुम मुझ में बने रहो, और मैं तुम में: जैसे डाली यदि दाखलता में बनी न रहे, तो अपने आप से नहीं फल सकती, वैसे ही तुम भी यदि मुझ में बने न रहो तो नहीं फल सकते। में दाखलता हूं: तुम डालियां हो; जो मुझ में बना रहता है, और मैं उस में, वह बहुत फल फलता है, क्योंकि मुझ से अलग होकर तुम कुछ भी नहीं कर सकते।
- Matthew 13:23 मत्ती 13:23जो अच्छी भूमि में बोया गया, यह वह है, जो वचन को सुनकर समझता है, और फल लाता है कोई सौ गुना, कोई साठ गुना, कोई तीस गुना।
- Mark 4:8 मरकुस 4:8परन्तु कुछ अच्छी भूमि पर गिरा; और वह उगा, और बढ़कर फलवन्त हुआ; और कोई तीस गुणा, कोई साठ गुणा और कोई सौ गुणा फल लाया।
- Galatians 5:22–23 गलातियों 5:22–23पर आत्मा का फल प्रेम, आनन्द, मेल, धीरज, और कृपा, भालाई, विश्वास, नम्रता, और संयम हैं; ऐसे ऐसे कामों के विरोध में कोई व्यवस्था नहीं।
- 2 Peter 1:8 2 पतरस 1:8क्योंकि यदि ये बातें तुम में वर्तमान रहें, और बढ़ती जाएं, तो तुम्हें हमारे प्रभु यीशु मसीह के पहचानने में निकम्मे और निष्फल न होने देंगी।
- John 15:16 यूहन्ना 15:16तुम ने मुझे नहीं चुना परन्तु मैं ने तुम्हें चुना है और तुम्हें ठहराया ताकि तुम जाकर फल लाओ; और तुम्हारा फल बना रहे, कि तुम मेरे नाम से जो कुछ पिता से मांगो, वह तुम्हें दे।
- Romans 7:4 रोमियों 7:4सो हे मेरे भाइयो, तुम भी मसीह की देह के द्वारा व्यवस्था के लिये मरे हुए बन गए, कि उस दूसरे के हो जाओ, जो मरे हुओं में से जी उठा: ताकि हम परमेश्वर के लिये फल लाएं।
- Genesis 26:12 उत्पत्ति 26:12फिर इसहाक ने उस देश में जोता बोया, और उसी वर्ष में सौ गुणा फल पाया: और यहोवा ने उसको आशीष दी।
- Philippians 1:11 फिलिप्पियों 1:11और उस धार्मिकता के फल से जो यीशु मसीह के द्वारा होते हैं, भरपूर होते जाओ जिस से परमेश्वर की महिमा और स्तुति होती रहे।।
- 1 Thessalonians 4:1 1 थिस्सलुनीकियों 4:1निदान, हे भाइयों, हम तुम से बिनती करते हैं, और तुम्हें प्रभु यीशु में समझाते हैं, कि जैसे तुम ने हम से योग्य चाल चलना, और परमेश्वर को प्रसन्न करना सीखा है, और जैसा तुम चलते भी हो, वैसे ही और भी बढ़ते जाओ।