Matthew · chapter 15 · verse 18
Matthew 15:18 in Hindi
पर जो कुछ मुंह से निकलता है, वह मन से निकलता है, और वही मनुष्य को अशुद्ध करता है।
Par jo kuchh munh se nikalataa hai, vah man se nikalataa hai, aur vahee manushy ko ashuddh karataa hai.
Matthew 15:18 in English
- King James Version (KJV)
- But those things which proceed out of the mouth come forth from the heart; and they defile the man.
- World English Bible (WEB)
- But the things which proceed out of the mouth come out of the heart, and they defile the man.
- American Standard Version (ASV)
- But the things which proceed out of the mouth come forth out of the heart; and they defile the man.
- Bible in Basic English (BBE)
- But the things which come out of the mouth come from the heart; and they make a man unclean.
- Darby Translation (DBY)
- but the things which go forth out of the mouth come out of the heart, and those defile man.
- Webster's Bible (WBS)
- But those things which proceed out of the mouth come forth from the heart; and they defile the man.
- Young's Literal Translation (YLT)
- but the things coming forth from the mouth from the heart do come forth, and these defile the man;
Read in context
- 16उस ने कहा, क्या तुम भी अब तक ना समझ हो?
- 17क्या नहीं समझते, कि जो कुछ मुंह में जाता, वह पेट में पड़ता है, और सण्डास में निकल जाता है?
- 18पर जो कुछ मुंह से निकलता है, वह मन से निकलता है, और वही मनुष्य को अशुद्ध करता है।
- 19क्योंकि कुचिन्ता, हत्या, परस्त्रीगमन, व्यभिचार, चोरी, झूठी गवाही और निन्दा मन ही से निकलती है।
- 20यही हैं जो मनुष्य को अशुद्ध करती हैं, परन्तु हाथ बिना धोए भोजन करना मनुष्य को अशुद्ध नहीं करता।।
Cross references
- Proverbs 15:28 नीतिवचन 15:28धर्मी मन में सोचता है कि क्या उत्तर दूं, परन्तु दुष्टों के मुंह से बुरी बातें उबल आती हैं।
- Matthew 12:34 मत्ती 12:34हे सांप के बच्चों, तुम बुरे होकर क्योंकर अच्छी बातें कह सकते हो? क्योंकि जो मन में भरा है, वही मुंह पर आता है।
- Matthew 15:11 मत्ती 15:11जो मुंह में जाता है, वह मनुष्य को अशुद्ध नहीं करता, पर जो मुंह से निकलता है, वही मनुष्य को अशुद्ध करता है।
- James 3:6–10 याकूब 3:6–10जीभ भी एक आग है: भी हमारे अंगों में अधर्म का एक लोक है और सारी देह पर कलंक लगाती है, और भवचक्र में आग लगा देती है और नरक कुण्ड की आग से जलती रहती है। क्योंकि हर प्रकार के बन- पशु, पक्षी, और रेंगनेवाले जन्तु और जलचर तो मनुष्य जाति के वश में हो सकते हैं और हो भी गए हैं। पर जीभ को मनुष्यों में से कोई वश में नहीं कर सकता; वह एक ऐसी बला है जो कभी रूकती ही नहीं; वह प्राण नाशक विष से भरी हुई है। इसी से हम प्रभु और पिता की स्तुति करते हैं; और इसी से मनुष्यों को जो परमेश्वर के स्वरूप में उत्पन्न हुए हैं स्राप देते हैं। एक ही मुंह से धन्यवाद और स्राप दोनों निकलते हैं।
- Proverbs 10:32 नीतिवचन 10:32धर्मी गहणयोग्य बात समझ कर बोलता है, परन्तु दुष्टों के मुंह से उलट फेर की बातें निकलती हैं।।
- Proverbs 15:2 नीतिवचन 15:2बुद्धिमान ज्ञान का ठीक बखान करते हैं, परन्तु मूर्खों के मुंह से मूढ़ता उबल आती है।
- Proverbs 6:12 नीतिवचन 6:12ओछे और अनर्थकारी को देखो, वह टेढ़ी टेढ़ी बातें बकता फिरता है,
- 1 Samuel 24:13 1 शमूएल 24:13प्राचीनों के नीति वचन के अनुसार दुष्टता दुष्टों से होती है; परन्तु मेरा हाथ तुझ पर न उठेगा।
- Luke 19:22 लूका 19:22उस ने उस से कहा; हे दुष्ट दास, मैं तेरे ही मुंह से तुझे दोषी ठहराता हूं: तू मुझे जानता था कि कठोर मनुष्य हूं, जो मैं ने नहीं रखा उसे उठा लेता, और जो मैं ने नहीं बोया, उसे काटता हूं।
- Psalm 36:3 भजन संहिता 36:3उसकी बातें अनर्थ और छल की हैं; उस ने बुद्धि और भलाई के काम करने से हाथ उठाया है।
- Revelation 13:5–6 प्रकाशितवाक्य 13:5–6कौन उस से लड़ सकता है? और बड़े बोल बोलने और निन्दा करने के लिये उसे एक मुंह दिया गया, और उसे बयालीस महीने तक काम करने का अधिकार दिया गया। और उस ने परमेश्वर की निन्दा करने के लिये मुंह खोला, कि उसके नाम और उसके तम्बू अर्थात् स्वर्ग के रहनेवालों की निन्दा करे।