James · chapter 3 · verse 6
James 3:6 in Hindi
जीभ भी एक आग है: भी हमारे अंगों में अधर्म का एक लोक है और सारी देह पर कलंक लगाती है, और भवचक्र में आग लगा देती है और नरक कुण्ड की आग से जलती रहती है।
Jeebh bhee ek aag hai: bhee hamaare angom mem adharm kaa ek lok hai aur saaree deh par kalank lagaatee hai, aur bhavachakr mem aag lagaa detee hai aur narak kund kee aag se jalatee rahatee hai.
James 3:6 in English
- King James Version (KJV)
- And the tongue [is] a fire, a world of iniquity: so is the tongue among our members, that it defileth the whole body, and setteth on fire the course of nature; and it is set on fire of hell.
- World English Bible (WEB)
- And the tongue is a fire. The world of iniquity among our members is the tongue, which defiles the whole body, and sets on fire the course of nature, and is set on fire by Gehenna.
- American Standard Version (ASV)
- And the tongue is a fire: the world of iniquity among our members is the tongue, which defileth the whole body, and setteth on fire the wheel of nature, and is set on fire by hell.
- Bible in Basic English (BBE)
- And the tongue is a fire; it is the power of evil placed in our bodies, making all the body unclean, putting the wheel of life on fire, and getting its fire from hell.
- Darby Translation (DBY)
- and the tongue [is] fire, the world of unrighteousness; the tongue is set in our members, the defiler of the whole body, and which sets fire to the course of nature, and is set on fire of hell.
- Webster's Bible (WBS)
- And the tongue [is] a fire, a world of iniquity: so is the tongue among our members, that it defileth the whole body, and setteth on fire the course of nature; and it is set on fire from hell.
- Young's Literal Translation (YLT)
- and the tongue [is] a fire, the world of the unrighteousness, so the tongue is set in our members, which is spotting our whole body, and is setting on fire the course of nature, and is set on fire by the gehenna.
Read in context
- 4देखो, जहाज भी, यद्यपि ऐसे बड़े होते हैं, और प्रचण्ड वायु से चलाए जाते हैं, तौभी एक छोटी सी पतवार के द्वारा मांझी की इच्छा के अनुसार घुमाए जाते हैं।
- 5वैसे ही जीभ भी एक छोटा सा अंग है और बड़ी बड़ी डींगे मारती है: देखो, थोड़ी सी आग से कितने बड़े बन में आग लग जाती है।
- 6जीभ भी एक आग है: भी हमारे अंगों में अधर्म का एक लोक है और सारी देह पर कलंक लगाती है, और भवचक्र में आग लगा देती है और नरक कुण्ड की आग से जलती रहती है।
- 7क्योंकि हर प्रकार के बन- पशु, पक्षी, और रेंगनेवाले जन्तु और जलचर तो मनुष्य जाति के वश में हो सकते हैं और हो भी गए हैं।
- 8पर जीभ को मनुष्यों में से कोई वश में नहीं कर सकता; वह एक ऐसी बला है जो कभी रूकती ही नहीं; वह प्राण नाशक विष से भरी हुई है।
Cross references
- Psalm 120:2–3 भजन संहिता 120:2–3हे यहोवा, झूठ बोलनेवाले मुंह से और छली जीभ से मेरी रक्षा कर।। हे छली जीभ, तुझ को क्या मिले? और तेरे साथ और क्या अधिक किया जाए?
- Proverbs 16:27 नीतिवचन 16:27अधर्मी मनुष्य बुराई की युक्ति निकालता है, और उसके वचनों से आग लगा जाती है।
- Mark 7:15 मरकुस 7:15ऐसी तो कोई वस्तु नहीं जो मनुष्य को बाहर से समाकर अशुद्ध करे; परन्तु जो वस्तुएं मनुष्य के भीतर से निकलती हैं, वे ही उसे अशुद्ध करती हैं।
- Matthew 15:11–20 मत्ती 15:11–20जो मुंह में जाता है, वह मनुष्य को अशुद्ध नहीं करता, पर जो मुंह से निकलता है, वही मनुष्य को अशुद्ध करता है। तब चेलों ने आकर उस से कहा, क्या तू जानता है कि फरीसियों ने यह वचन सुनकर ठोकर खाई? उस ने उत्तर दिया, हर पौधा जो मेरे स्वर्गीय पिता ने नहीं लगाया, उखाड़ा जाएगा। उन को जाने दो; वे अन्धे मार्ग दिखानेवाले हैं: और अन्धा यदि अन्धे को मार्ग दिखाए, तो दोनों गड़हे में गिर पड़ेंगे। यह सुनकर, पतरस ने उस से कहा, यह दृष्टान्त हमें समझा दे। उस ने कहा, क्या तुम भी अब तक ना समझ हो? क्या नहीं समझते, कि जो कुछ मुंह में जाता, वह पेट में पड़ता है, और सण्डास में निकल जाता है? पर जो कुछ मुंह से निकलता है, वह मन से निकलता है, और वही मनुष्य को अशुद्ध करता है। क्योंकि कुचिन्ता, हत्या, परस्त्रीगमन, व्यभिचार, चोरी, झूठी गवाही और निन्दा मन ही से निकलती है। यही हैं जो मनुष्य को अशुद्ध करती हैं, परन्तु हाथ बिना धोए भोजन करना मनुष्य को अशुद्ध नहीं करता।।
- Proverbs 15:1 नीतिवचन 15:1कोमल उत्तर सुनने से जलजलाहट ठण्डी होती है, परन्तु कटुवचन से क्रोध धधक उठता है।
- Mark 7:20–22 मरकुस 7:20–22फिर उस ने कहा; जो मनुष्य में से निकलता है, वही मनुष्य को अशुद्ध करता है। क्योंकि भीतर से अर्थात् मनुष्य मे मन से, बुरी बुरी चिन्ता व्यभिचार। चोरी, हत्या, परस्त्रीगमन, लोभ, दुष्टता, छल, लुचपन, कुदृष्टि, निन्दा, अभिमान, और मूर्खता निकलती हैं।
- Luke 16:24 लूका 16:24और उस ने पुकार कर कहा, हे पिता इब्राहीम, मुझ पर दया करके लाजर को भेज दे, ताकि वह अपनी उंगुली का सिरा पानी में भिगो कर मेरी जीभ को ठंडी करे, क्योंकि मैं इस ज्वाला में तड़प रहा हूं।
- Colossians 3:8–9 कुलुस्सियों 3:8–9पर अब तुम भी इन सब को अर्थात् क्रोध, रोष, बैरभाव, निन्दा, और मुंह से गालियां बकना ये सब बातें छोड़ दो। एक दूसरे से झूठ मत बोलो क्योंकि तुम ने पुराने मनुष्यत्व को उसके कामों समेत उतार डाला है।
- Matthew 12:32–36 मत्ती 12:32–36जो कोई मनुष्य के पुत्रा के विरोध में कोई बात कहेगा, उसका यह अपराध क्षमा किया जाएगा, परन्तु जो कोई पवित्राआत्मा के विरोध में कुछ कहेगा, उसका अपराध न तो इस लोक में और न परलोक में क्षमा किया जाएगा। यदि पेड़ को अच्छा कहो, तो उसके फल को भी अच्छा कहो; या पेड़ को निकम्मा कहो; क्योंकि पेड़ फल ही से पहचाना जाता है। हे सांप के बच्चों, तुम बुरे होकर क्योंकर अच्छी बातें कह सकते हो? क्योंकि जो मन में भरा है, वही मुंह पर आता है। भला, मनुष्य मन के भले भण्डार से भली बातें निकालता है; और बुरा मनुष्य बुरे भण्डार से बुरी बातें निकालता है। और मै तुम से कहता हूं, कि जो जो निकम्मी बातें मनुष्य कहेंगे, न्याय के दिन हर एक बात का लेखा देंगे।
- Psalm 140:3 भजन संहिता 140:3उनका बोलना सांप का काटना सा है, उनके मुंह में नाग का सा विष रहता है।।
- Proverbs 6:19 नीतिवचन 6:19झूठ बोलनेवाला साक्षी और भाइयों के बीच में झगड़ा उत्पन्न करनेवाला मनुष्य।
- Psalm 64:3 भजन संहिता 64:3उन्हों ने अपनी जीभ को तलवार की नाईं तेज किया है, और अपने कड़वे बचनों के तीरों को चढ़ाया है;
Original words (Greek)
- And · G2532καί kaí
- tongue · G1100γλῶσσα glōssa
- fire · G4442πῦρ pŷr
- world · G2889κόσμος kósmos
- iniquity · G93ἀδικία adikía
- so · G3779οὕτω hoútō
- is · G2525καθίστημι kathístēmi
- tongue · G1100γλῶσσα glōssa
- among · G1722ἐν en
- our · G2257ἡμῶν hēmōn
- members · G3196μέλος mélos
- defileth · G4695σπιλόω spilóō
- whole · G3650ὅλος hólos
- body · G4983σῶμα sōma
- and · G2532καί kaí
- fire · G5394φλογίζω phlogízō
- course · G5164τροχός trochós
- nature · G1078γένεσις génesis
- and · G2532καί kaí
- fire · G5394φλογίζω phlogízō
- of · G5259ὑπό hypó
- hell · G1067γέεννα géenna